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पंजाब: विधानसभा परिसर में शहीद भगत सिंह, बाबा साहेब व महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा लगाने पर फंसा पेंच, अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 25 Mar 2022 05:41 PM IST
सार

प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि सरकार को इस मामले में विधानसभा में कार्यवाही आगे बढ़ाने से पहले संबंधित तथ्यों की जानकारी कर लेनी थी। उन्होंने लिखा कि वर्ष 2016 में ऐसा ही एक प्रस्ताव यूटी प्रशासन ने रद्द कर दिया था।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान - फोटो : फाइल
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विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा परिसर में शहीद भगत सिंह, डॉ, बाबा साहेब आंबेडकर और महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा लगाने की घोषणा की थी। मगर अब इसमें पेंच फंसता दिख रहा है। नियमानुसार चंडीगढ़ की किसी भी हेरिटेज बिल्डिंग में कोई प्रतिमा नहीं लगाई जा सकती है। यह खुलासा कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने किया।  



उन्होंने सीएम मान को टैग कर ट्वीट किया कि विधानसभा में उक्त शख्सियतों की प्रतिमा लगाने के बारे में तथ्य छिपाने वाले अफसरों पर सख्त कार्रवाई की जाए। मैंने विधानसभा में यह सोचकर मुद्दा उठाया गया था कि सरकार को पूरे तथ्य और जानकारी होगी लेकिन तथ्य यह है कि विधानसभा परिसर की जगह चंडीगढ़ कैपिटल कांप्लेक्स का हिस्सा है और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर में आती है। 


उन्होंने आगे लिखा कि विधानसभा परिसर में ऐसा कोई भी निर्माण संबंधित अथॉरिटी की आज्ञा के बिना नहीं किया जा सकता। उन्होंने लिखा कि ली-कार्बूजिए के बनाए नियमों के अनुसार, चंडीगढ़ की विरासती इमारतों में कोई प्रतिमा को नहीं लगाया जा सकता है। बाजवा ने कहा है कि सरकार को इस मामले में विधानसभा में कार्यवाही आगे बढ़ाने से पहले संबंधित तथ्यों की जानकारी कर लेनी थी। उन्होंने लिखा कि वर्ष 2016 में ऐसा ही एक प्रस्ताव यूटी प्रशासन ने रद्द कर दिया था।

अजय जग्गा ने भी सीएम मान को लिखा खत
चंडीगढ़ हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया है कि चंडीगढ़ की योजना के अनुसार यहां मूर्ति स्थापित नहीं की जा सकती। जग्गा ने पत्र में लिखा कि शहीद भगत सिंह, भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर और महाराजा रणजीत सिंह के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। पंजाब सरकार की सम्मान देने की भावना सराहनीय है लेकिन आपका ध्यान चंडीगढ़ के उस आदेश की ओर आकर्षित करना चाहता हूं जिसमें शहर को मानव पैमाने पर परिभाषित किया गया है और ‘कोई व्यक्तिगत मूर्ति नहीं लगाई जाएगी’ का उल्लेख किया गया है। 

यह भी लिखा है कि विधानसभा भवन कैपिटल कांप्लेक्स के तहत है और ये एक विश्व धरोहर स्थल है। यहां किसी भी तरह के बदलाव के लिए सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेनी होगी। ‘चंडीगढ़ का आदेश’ शहर के मूल स्वरूप को बनाए रखने का एक आदर्श है। जग्गा ने उम्मीद जताई है कि पंजाब के सीएम अपने निर्णय की समीक्षा करेंगे। 

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