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पैरोल अच्छे आचरण वाले कैदियों का विशेषाधिकार, उल्लंघनकर्ता नहीं हकदार : हाईकोर्ट

Tue, 05 Mar 2024 12:41 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Mar 2024 12:41 AM IST
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Parole is a privilege for prisoners with good conduct: Court
-10 एफआईआर, हत्या के तीन मामले में दोषी करार कैदी पैरोल के लाभ का नहींं हकदार
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-भिवानी जेल सुपरिंटेंडेंट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हत्या के तीन मामलों में दोषी करार और पहली पैरोल के दौरान जान से मारने की धमकी के चलते एफआईआर झेलने वाले कैदी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पैरोल से इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पैरोल जेल में कैदी के अच्छे आचरण के चलते मिलने वाला विशेषाधिकार है, यह उल्लंघनकर्ता को नहीं दिया जा सकता। याचिका दाखिल करते हुए विनोद कुमार ने हाईकोर्ट को बताया कि उसने पैरोल के लिए आवेदन किया था लेकिन उसका आवेदन उसे हार्डकोर अपराधी बताते हुए जेल अधीक्षक ने रद्द कर दिया। याची ने कहा कि इसके लिए आधार यह बनाया गया कि बीते दिनों मिली पहली पैरोल के दौरान उसके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। याची ने कहा कि एफआईआर में जो धाराएं हैं वह याची को जेल में हार्डकोर अपराधी साबित नहीं करती हैं। हरियाणा सरकार ने पैरोल का विरोध करते हुए बताया कि याची पर कुल 10 एफआईआर दर्ज हैं और वह हत्या के तीन मामलों में दोषी करार दिया जा चुका है। ऐसे में उसे पैरोल देना सही नहीं है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची का पूर्व का व्यवहार उसके पैरोल निवेदन के दौरान ध्यान में रख कर जेल अधीक्षक ने पैरोल से इन्कार का निर्णय लिया है। याची हत्या के तीन मामलों में दोषी करार दिया जा चुका है और ऐसे में वह जमानत का हकदार नहीं है। पैरोल या फरलो देना एक दोषी करार दिए जा चुके कैदी को दिया जाने वाला विशेषाधिकार है जो अच्छा आचरण बनाए रखने के लिए दिया गया है। नियमित पैरोल और फरलाे देने का अधिकार केवल उसके पूर्ववृत्त को ध्यान में रखते हुए ही उपलब्ध होना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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