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Parkash Singh Badal: राजनीतिक दांवपेंच के माहिर थे प्रकाश सिंह बादल... फिर भी पूरी नहीं हो पाई एक इच्छा
Thu, 27 Apr 2023 04:22 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 27 Apr 2023 04:22 PM IST
सार
2012 में जब मनप्रीत बादल ने अपनी अलग पार्टी बनाई थी तो उस समय उनके पिता गुरदास बादल ने अपने मुख्यमंत्री भाई प्रकाश सिंह बादल के साथ बातचीत कर प्रयास किया था कि दोनों भाई एकजुट हो जाए लेकिन किसी कारण के चलते गुरदास बादल का प्रयास सिरे नहीं चढ़ा।
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सुखबीर बादल और मनप्रीत बादल
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल राजनीति के पुरोधा थे लेकिन उनके राजनीतिक जीवन की एक इच्छा पूरी नहीं हो पाई। बादल चाहते थे कि उनके बेटे सुखबीर बादल और उनका भतीजा मनप्रीत बादल एक हो जाएं लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
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पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भाई गुरदास बादल भी चाहते थे कि मनप्रीत बादल एवं सुखबीर बादल अपने गिले शिकवे दूर कर एकजुट हो जाए लेकिन दोनों बादल भाई अपनी अंतिम इच्छा को अपने साथ ही ले गए।
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2012 में मनप्रीत ने बनाई थी अलग पार्टी
2012 में जब मनप्रीत बादल ने अपनी अलग पार्टी बनाई थी तो उस समय उनके पिता गुरदास बादल ने अपने मुख्यमंत्री भाई प्रकाश सिंह बादल के साथ बातचीत कर प्रयास किया था कि दोनों भाई एकजुट हो जाए लेकिन किसी कारण के चलते गुरदास बादल का प्रयास सिरे नहीं चढ़ा।
मजबूर होकर गुरदास बादल को अपने बेटे मनप्रीत बादल के साथ उनकी पार्टी के लिए काम करना पड़ा था। मनप्रीत और सुखबीर बादल को एकजुट करने का प्रयास सिर्फ बादल भाईयों ने ही नहीं किया था बल्कि शिअद के बडे़ नेताओं और गांव बादल के बड़े बुजुर्गों ने भी इसकी कोशिश की थी। इसके बाद प्रकाश सिंह बादल ने भी जीतोड़ प्रयास किया था कि मनप्रीत एवं सुखबीर को एकजुट किया जाए।
राम लक्ष्मण की जोड़ी माने जाते थे प्रकाश-गुरदास बादल
जानकार बताते हैं कि प्रकाश सिंह बादल ने एक बार अपने भाई गुरदास बादल से कहा था कि उनकी इच्छा है कि मनप्रीत एवं सुखबीर एक होकर शिअद के लिए काम करें। लेकिन बडे़ बादल का प्रयास भी सफल नहीं हो पाया था। सुखबीर एवं मनप्रीत की खटास के बीच प्रकाश बादल एवं गुरदास बादल मिलते रहे। कई बार तो प्रकाश सिंह बादल खुद अपने भाई गुरदास से मिलने पहुंच जाते थे। पूरे इलाके में प्रकाश सिंह बादल एवं गुरदास बादल की जोड़ी को लोगों ने राम लक्षमण की जोड़ी का नाम दिया था।