फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Parents afraid sending children students arrived the next day

बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं अभिभावक, दूसरे दिन पहुंचे सिर्फ 800 विद्यार्थी

Tue, 22 Sep 2020 10:48 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2020 10:48 PM IST
विज्ञापन
Parents afraid sending children students arrived the next day
चंडीगढ़। यूटी शिक्षा विभाग ने तमाम तैयारियों के साथ नौवीं से 12वीं तक के स्कूलों को खोल दिया है लेकिन अभिभावक अभी भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। मंगलवार को शहर के 90 सरकारी स्कूलों में सिर्फ 800 विद्यार्थी ही पहुंचे, जबकि पहले दिन 960 विद्यार्थी पहुंचे थे। उम्मीद थी कि दूसरे दिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी लेकिन संख्या बढ़ने की बजाय घट गई। ज्यादातर स्कूलों में दो से तीन विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे।
विज्ञापन

सीनियर सेकेंडरी स्कूल एक दिन दसवीं और दूसरे दिन 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को बुला रहे हैं। एक स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि प्रत्येक बच्चे को हफ्ते में तीन दिन ही स्कूल आने की अनुमति होगी। इसके अलावा जो विद्यार्थी जिस कक्षा में बैठ रहा है, उसे उसी कक्षा में बैठाया जाएगा। अगले दिन दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों को अलग कक्षा में बैठाया जाएगा। ठीक इसी तरह 10वीं तक के स्कूलों में एक दिन नौवीं कक्षा और दूसरे दिन दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को बुलाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों अलग-अलग रहेंगे और संक्रमण के फैलने का खतरा न के बराबर रहेगा।
विज्ञापन

मंगलवार को भी स्कूलों में इक्का-दुक्का विद्यार्थी ही स्कूलों में पहुंचे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को भी सुबह विभिन्न स्कूलों में जाकर सुरक्षा मानकों की जांच की। ज्यादातर स्कूलों ने विद्यार्थियों के लिए सुबह 9 बजे का समय रखा था। इस दौरान ज्यादातर स्कूलों में दो विषय की कक्षाएं लगीं। सुबह 9:30 बजे से कक्षाएं शुरू हुईं और 11:30 बजे तक चलीं। इस दौरान विद्यार्थियों और अध्यापकों ने मुंह पर मास्क लगाए हुए थे और एक दूसरे से दूरी बनाकर पढ़ाई की।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्कूलों में सुरक्षा के ये हैं इंतजाम
1. सबसे पहले स्कूल के गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग
2. अभिभावकों द्वारा दिया गया सहमति पत्र देखने के बाद स्कूल में प्रवेश
3. हर विद्यार्थी के हाथों का सैनिटाइजेशन
4. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कक्षा में बैठाना
5. एक कक्षा में 10 विद्यार्थियों को ही जगह
6. जिन्होंने मास्क नहीं पहना, उन्हें स्कूल में प्रवेश नहीं
7. विद्यार्थियों को दूर से ही सवाल पूछने की इजाजत
8. स्कूल में न पानी, न ही मिल रहा खाने का कोई सामान
9. प्रत्येक विद्यार्थी दो से तीन घंटे ही स्कूल में रह सकता है
10. हफ्ते में तीन दिन ही स्कूल आने की अनुमति
स्कूल खोलने का फैसला ही गलत
शहर के स्कूलों को खेलने का फैसला ही गलत है। एक तरफ जो संसद का सत्र चल रहा है, उसे कोरोना की वजह से कम दिनों का कर दिया गया है लेकिन दूसरी तरफ बच्चों को स्कूल बुलाया जा रहा है। शहर के अस्पतालों में बेड कम होते जा रहे हैं, ऐसे में अगर किसी बच्चे को कुछ हो जाता है को इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। कई राज्यों ने अभी स्कूल खोलने से मना कर दिया है, चंडीगढ़ प्रशासन को भी ऐसा ही करना चाहिए। - नितिन गोयल, प्रेसिडेंट, चंडीगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन

बच्चे भी संक्रमित हो सकते हैं, खतरा ज्यादा है
मेरे दोनों बच्चों में से एक 10वीं और दूसरा 12वीं में है लेकिन ऐसे माहौल में जब रोजाना सैकड़ों कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, मैं उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहती। स्कूल में काफी खतरा है। बच्चे दूर-दूर से आते हैं। वह भी तो कोविड पॉजिटिव हो सकते हैं। वह घर पर भी संक्रमण को ला सकते हैं। शिक्षा विभाग को सोचना चाहिए कि बहुत से राज्यों ने स्कूल खोलने से मना किया है। न जाने प्रशासन किसके दबाव में आकर स्कूल को खोलने का फैसला लिया गया है।
- दीपिका, अभिभावक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed