पीयू छात्र संघ चुनाव: एबीवीपी ने रच दिया इतिहास, गौरव वीर सोहल बने अध्यक्ष; खास बातचीत में बताई प्राथमिकताएं
पंजाब यूनिवर्सिटी के चुनाव में एबीवीपी ने पहली बार इतिहास रच दिया है। प्रधान पद पर एबीपी के गौरव वीर सोहल ने बाजी मारी है। डिटेल में पढ़ें खबर...
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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में इस बार इतिहास रचा गया है। पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाते हुए छात्र राजनीति में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। एबीवीपी उम्मीदवार गौरव वीर सोहल ने 3148 मत हासिल कर भारी अंतर से जीत दर्ज की।
गौरव वीर सोहल ने स्टूडेंट फ्रंट के सुमित शर्मा को 488 वोटों से हराया। उपाध्यक्ष पद पर सत्थ के अशमीत सिंह, सचिव पद पर सोपू के गुरनूर ग्रुप से अभिषेक डागर और संयुक्त सचिव पद पर आजाद उम्मीदवार मोहित मंडेरा ने बाजी मारी। जीत के बाद स्टूडेंट्स सेंटर पर एबीवीपी समर्थकों ने जश्न मनाया और नारों से माहौल गूंज उठा।
एनएसयूआई की हार पर राहुल गांधी ने लिया एक्शन
वहीं चुनाव में एनएसयूआई की हार पर राहुल गांधी ने चंडीगढ़ के प्रभारी दिलीप चौधरी की छुट्टी कर दी है।
छात्र हितों की आवाज करेंगे बुलंद
गौरव वीर सोहल और उनकी टीम ने भरोसा दिलाया कि अब संघर्ष सिर्फ चुनावी मंच तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि छात्र हितों की आवाज और बुलंद होगी। एबीवीपी ने साफ किया कि उनकी प्राथमिकताओं में कैंपस में छात्रों के लिए बेहतर प्लेसमेंट उपलब्ध कराना और 24 घंटे डिस्पेंसरी और हॉस्टल शुरू कराना सबसे ऊपर रहेगा। इस जीत ने पीयू छात्र राजनीति के पुराने समीकरण हिला दिए हैं और संकेत दे दिए हैं कि आने वाले समय में कैंपस की राजनीति का चेहरा बदल सकता है।
किसे कितने वोट मिले
गौरव वीर सोहल ने 3148 मत पाकर सभी प्रत्याशियों को पीछे छोड़ दिया। स्टूडेंट्स फ्रंट से उनके निकटतम कंपीटिटर सुमित शर्मा को 2660 वोट मिले। एनएसयूआई से प्रभजोत सिंह गिल को 1359, पीएसयू ललकार से जोबनप्रीत सिंह को 198, एएसएपी से मनकीरत सिंह मान को 1184, एएसएफ से नवनीत कौर को 136, सोई से सीरत को 422 और नोटा को 188 वोट मिले।
- उपाध्यक्ष पद के लिए सत्थ से अश्मित सिंह को 3478, ईशा चंदेर को 120, यूएसओ से जतिन कंबोज को 758, एचएसआरए के नवदीप सिंह मील को 2074, एबीवीपी फ्रंट से नवीन कुमार को 2828 और नोटा को 335 वोट पड़े।
- सचिव पद के लिए सोपू के अभिषेक डागर को 3438, जतिन डागर को 160, एएसएपी से कोमलप्रीत कौर को 1735, साहिल जांगड़ा को 531, इनसो के विशेष आनंद ढाका को 2716 और नोटा को 464 वोट पड़े।
- संयुक्त सचिव पद के लिए एचपीएसयू के आर्यन वर्मा को 2820, मोहित मंडेरा को 3138, एचएसआरए के सागर खत्री को 1093, पुसु के आकाशदीप ग्रुप से सिद्धार्थ बूरा को 2074 और नोटा पर 410 लोगों ने वोट किया।
बारिश ने धोए उम्मीदवारों के 7 प्रतिशत वोट
पिछले साल के मुकाबले इस बार बारिश के चलते 7% वोटिंग कम हुई है। पिछले साल 66.5% विद्यार्थियों ने वोट किया था, लेकिन इस बार केवल 59.16% विद्यार्थियों ने वोट किया है। 7% वोट बारिश ने धो दिए जिसके कारण उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ा। सुबह 11:00 बजे के बाद किसी को भी विभाग में एंट्री नहीं दी गई। तेज बारिश के चलते पंजाब के विद्यार्थी तो वोट ही नहीं कर पाए। कुछ पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों से समय पर नहीं पहुंच पाए। इससे भी एबीवीपी को फायदा मिला है।
प्रधान बोले- यदि हारता तब भी रब की मर्जी का सम्मान करते
गौरववीर सोहल ने कहा यह जीत केवल मेरी नहीं बल्कि पंजाब विश्वविद्यालय के हर उस विद्यार्थी की जीत है, जिसने बदलाव और सकारात्मक राजनीति पर विश्वास जताया। मैं उन सभी सहयोगी इनसो व एचएसआरए छात्र संगठन का भी धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने अभाविप के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस चुनाव में छात्रहित की मशाल को जलाया। साथ ही सभी समर्थकों के प्रति आभार प्रकट करता हूं। मैं वादा करता हूं कि यह जिम्मेदारी मेरे लिए पद नहीं, बल्कि एक संघर्ष और सेवा का अवसर है। उन्होंने कहा कि वह सबसे बड़े युवाओं को रोजगार दिलाने के उद्देश्य प्लेसमेंट पर कार्य करेंगे। इसके अलावा वह 24 घंटे हॉस्टल, डिस्पेंसरी, सिथेंटिक ट्रैक और टीचरों की कमी को पूरा करने पर आवाज उठाएंगे। उनका कोई पॉलिटिकल बैंकग्राउंड नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि वह हार जाते तब भी विद्यार्थियों के फैसले और रब की मर्जी का सम्मान करते।
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एक समय में दो-दो जगह मौजूद रहते थे गौरववीर
दरअसल गौरववीर सोहल के जुड़वा भाई हर्ष भी उनके साथ पीयू में पढ़ाई कर रहे हैं। हर्ष का उनकी कैंपेनिंग में बहुत योगदान रहा है। अपने भाई के कारण वह एक समय में दो-दो जगह पर कैंपेनिंग कर पाते थे। उनके जुड़वा भाई उनकी जगह पर कैंपेनिंग करते थे। हर्ष बिलकुल गौरव की तरह दिखते हैं। दोनों की पहचान करना बहुत मुश्किल है। ऐसे में गौरव को हर्ष ने प्रचार प्रसार में बहुत सहायता की। उन्होंने कहा कि भाई ने दिन रात प्रयत्न किया। इसलिए वह अपने भाई के आभारी हैं।
मोहित मंडेरा ग्रुप की वोट रिजेक्ट होने पर हुई हल्की बहस
मोहित मंडेरा ग्रुप से एक सदस्य ने वोट रिजेक्ट होने पर विद्यार्थियों ने स्टाफ से हल्की बहस की। हालांकि अथॉरिटी ने विद्यार्थियों की बात को शांतिपूर्वक सुना। उसके बाद उनकी रिजेक्ट हुई वोट को चेक करके उस पर विद्यार्थियों को दिखाकर निर्णय लिया गया। विद्यार्थी भी उससे सहमत हुए और मामला आगे नहीं बढ़ा।