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Chandigarh News: दिल्ली में धड़केगा पंचकूला के पवन का दिल
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चंडीगढ़। पंचकूला के सकेतड़ी के रहने वाले 33 साल के पवन का दिल दिल्ली निवासी 18 साल के युवक के सीने में धड़केगा। पवन की दोनों किडनी, पैनक्रियाज व कॉर्निया ने भी चार अन्य लोगों की जिंदगी में खुशहाली बिखेरी है। पीजीआई में इलाज के दौरान ब्रेन डेड घोषित होने पर पवन की पत्नी व परिवार ने बहादुरी का परिचय देते हुए अंगदान का निर्णय लिया। इसकी बदौलत वह दुनिया से जाते हुए पांच लोगों की जिंदगी में खुशियां बिखेरने का काम किया।14 मार्च को घर में गिरकर चोटिल होने के बाद पवन को पहले निजी अस्पताल फिर वहां से पीजीआई में भर्ती करवाया गया। जहां पवन को 19 मार्च को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद पवन की पत्नी बेबी रानी से अंगदान का अनुरोध किया गया। उन्होंने धैर्यता दिखाते हुए सहमति दी और कहा कि मेरे पति जीवन की आशा थे लेकिन अब वह उम्मीद चली गई है। अंगदान के जरिए वे ऐसा काम कर जाएंगे, जो 100 साल जीकर कर भी लोग नहीं कर पाते हैं। पवन के बड़े भाई दीपक और प्रदीप ने कहा कि उनका भाई इस दुनिया से वैसे ही गया, जैसे जीता था। उसने जाते हुए भी जरूरतमंदों की मदद की है।
पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने दाता परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते कहा कि गंभीर त्रासदी के बावजूद पवन के परिवार की ओर से अंगदान के लिए सहमति देने के निर्णय ने त्रासदी को विजय में बदल दिया है। उनके निर्णय से उन लोगों को जीवन जीने का मौका मिला है, जो अंगदान की प्रतीक्षा सूची में शामिल थे। दाता परिवार की उदारता की विरासत उन लोगों के दिलों की धड़कनों और नेत्र ज्योति बहाल करने में फैलती रहेगी, जिन्हें पवन के अंगदान से जीवन का उपहार मिला है।
एम्स गया दिल
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि क्रॉस मैचिंग के दौरान हृदय का कोई मिलान प्राप्तकर्ता उपलब्ध न होने पर अन्य प्रत्यारोपण अस्पतालों से संपर्क किया गया। दिल्ली एम्स में भर्ती 18 वर्षीय युवक को हृदय आवंटित किया गया। प्रो. कौशल ने बताया कि हृदय को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 20 मार्च को सुबह 11 बजे दिल्ली के लिए एयरलिफ्ट किया गया। वहीं, पीजीआई में भर्ती 34 वर्षीय मरीज को पवन का पैनक्रियाज और एक किडनी प्रत्यारोपित की गई है। दूसरी किडनी 36 वर्षीय महिला को प्रत्यारोपित हुई, जबकि दोनों कॉर्निया दो दृष्टिहीनों को प्रत्यारोपित की गई हैं।
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पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने दाता परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते कहा कि गंभीर त्रासदी के बावजूद पवन के परिवार की ओर से अंगदान के लिए सहमति देने के निर्णय ने त्रासदी को विजय में बदल दिया है। उनके निर्णय से उन लोगों को जीवन जीने का मौका मिला है, जो अंगदान की प्रतीक्षा सूची में शामिल थे। दाता परिवार की उदारता की विरासत उन लोगों के दिलों की धड़कनों और नेत्र ज्योति बहाल करने में फैलती रहेगी, जिन्हें पवन के अंगदान से जीवन का उपहार मिला है।
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एम्स गया दिल
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि क्रॉस मैचिंग के दौरान हृदय का कोई मिलान प्राप्तकर्ता उपलब्ध न होने पर अन्य प्रत्यारोपण अस्पतालों से संपर्क किया गया। दिल्ली एम्स में भर्ती 18 वर्षीय युवक को हृदय आवंटित किया गया। प्रो. कौशल ने बताया कि हृदय को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 20 मार्च को सुबह 11 बजे दिल्ली के लिए एयरलिफ्ट किया गया। वहीं, पीजीआई में भर्ती 34 वर्षीय मरीज को पवन का पैनक्रियाज और एक किडनी प्रत्यारोपित की गई है। दूसरी किडनी 36 वर्षीय महिला को प्रत्यारोपित हुई, जबकि दोनों कॉर्निया दो दृष्टिहीनों को प्रत्यारोपित की गई हैं।
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