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Chandigarh News: एक साल बाद भी पंचायतें पैसा खर्च नहीं कर पाई, सरकार ने मांगा जवाब
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कुछ पंचायतों ने भेजा जवाब, कहा-तकनीकी कारणों की वजह से नहीं खर्च पाए पैसे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने उन पंचायतों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जो दी गई ग्रांट एक साल में खर्च नहीं कर पाए हैं। विकास एवं पंचायत विभाग ने राज्य की ऐसी 44 पंचायतों को चिन्हित किया है, जो अपने जिले में आबादी के हिसाब से सबसे बड़ी हैं। साथ ही उपायुक्त को निर्देश दिया गया है कि वह पंचायतों से ग्रांट खर्च नहीं कर पाने का स्पष्टीकरण लें और दो महीने के भीतर कार्यवाही की रिपोर्ट भेजें। वहीं, उपायुक्तों ने सभी पंचायतों से जवाब मांग लिया है। इन पंचायतों को 15 दिन के भीतर बताना होगा कि आखिर ग्रांट क्यों नहीं खर्च पाए। सरकार ने यह भी कहा है कि जिन पंचायतों के जवाब से उपायुक्त संतुष्ट नहीं है, वह उन पंचायतों को हटा भी सकते हैं। राज्य सरकार ने साल 2022-23 में राज्य की सभी पंचायतों को करीब 11 सौ करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर की थी। इन पंचायतों को आबादी के हिसाब से ग्रांट सौंपी गई थी। जिस पंचायत के पास ज्यादा आबादी थी, उन्हें ज्यादा राशि सौंपी गई।
एक साल बाद पंचायत विभाग ने अपनी समीक्षा में पाया कि कई पंचायतें ऐसी हैं, जो एक साल पूरा होने के बावजूद अपनी ग्रांट खर्च नहीं कर पाईं। पंचायत विभाग ने सभी 22 जिले की दो-दो पंचायत को चिन्हित किया और उसकी एक रिपोर्ट बनाकर सभी उपायुक्त को सौंप दी है। उपायुक्त 15 दिन में इसकी जांच करेंगे। साथ ही पंचायतों से जवाब लेंगे। हालांकि कुछ पंचायतों ने अपना जवाब भेज दिया है, जिसमें उन्होंने ग्रांट खर्च नहीं कर पाने के पीछे तकनीकी कारण को बताया है।
इन पंचायतों के पास है सबसे ज्यादा ग्रांट
पंचायत
राशि
सकरास(नूंह) 96.79
मुआना (जींद)
73.16
कौल (कैथल)
58.49
राहरा(करनाल)
56.83
मुलाना(अंबाला)
56.10
बापौली(पानीपत)
53.61
पटवार(हिसार)
52.11
दाता(हिसार)
51.53
चांदहट(पलवल)
50.22
अबूबशहर(सिरसा)
49.88
खानपुरकलां(सोनीपत)
49.00
कथूरा(सोनीपत)
46.73
झोझूकलां(चरखीदादरी)
45.43
अराड़ाना(करनाल)
40.04
उगला (अंबाला)
39.96
संडवा(भिवानी)
35.96
खरावड़(रोहतक)
34.27
पकस्मा(रोहतक)
29.81
कहीं एनओसी नहीं तो कहीं विभाग की ही ढिलाई
सरकार की ओर से भले ही पंचायतों से स्पष्टीकरण मांग लिया गया हो, मगर कई पंचायतों ने इसके पीछे तकनीकी कारण बताए हैं। कई जगह पंचायत विभाग की ढिलाई भी सामने आई है। अंबाला की मुलाना ग्राम पंचायत की ओर से बताया गया है कि 56 लाख में से 23 लाख रुपये नाले के निर्माण के लिए जारी हुए थे, मगर वन विभाग की ओर से एनओसी नहीं मिलने से काम अटका पड़ा है।
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करनाल के पंचायती राज के एक्सईएन परमिंदर सिंह ने बताया कि अराड़ना व राहड़ा पंचायत के 25-25 लाख रुपये के विकास कार्य हो चुके हैं। दोनों पंचायतों की स्टेट फाइनेंस कमीशन से पेमेंट नहीं हुई, इसलिए अभी पोर्टल पर दोनों पंचायतों द्वारा काम न होने की जानकारी प्रदर्शित हुई है। वहीं, कोसली के गुड़ियानी सरपंच नरेंद्र का कहना है कि उनके गांव में ई-टेंडरिंग के तीस लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, जिसका काम चल रहा है, लेकिन पंचायती राज एक्सईएन की ओर से हेड ऑफिस में देरी से कागज भेजने पर उनके नाम ग्रांट खर्च न करने का नोटिस आया है, जबकि जो ई-टेंडरिंग का पैसा मंजूर हुआ था, उसका काम चल रहा है।
भिवानी की संडवा व लोहानी पंचायतों ने दावा किया है कि जो ग्रांट आई थी, उसके विकास कार्य करवा दिए गए हैं। पंचायतों का तर्क है कि दस्तावेज में दुरस्त नहीं है, इसलिए सही जानकारी नहीं पहुंची। इसमें ग्राम पंचायतों के खाते भी बदले गए हैं।
चरखी दादरी के झोझूकलां सरपंच अशोक कुमार का दावा है कि 85 लाख की राशि के प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुके हैं, लेकिन विभाग की ओर से ही उनके प्रस्ताव को लंबित करके रखा गया है।
क्या बोले अधिकारी
आखिर झोझूकलां के प्रस्ताव क्यों लटके हैं। इस विषय की जांच करवाई जा रही है। इसकी रिपोर्ट लेकर सरकार को भेजी जाएगी। -नरेंद्र सरवान, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, चरखीदादरी।
सिरसा की दो पंचायतों को लेकर नोटिस मिला था। इन गांवों में विकास कार्य करवाए जा चुके हैं। जल्द ही इस संबंध में मुख्यालय को जानकारी उपलब्ध करवा दी जाएगी। -विशाल कुमार, डीपीआरओ, सिरसा।
खर्चा अंतिम प्रक्रिया है। कई जगह मामला भुगतान पर जाकर फंस जाता है। इस संबंध में जांच जारी है। -विवेक चौधरी, सीईओ,जिला परिषद,पानीपत।
इन ग्राम पंचायतों की ओर से ग्रांट न खर्च करने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इस समय दोनों की ग्राम पंचायतों को नोटिस जारी किए गए हैं।- अश्वनी मलिक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, कैथल।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने उन पंचायतों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जो दी गई ग्रांट एक साल में खर्च नहीं कर पाए हैं। विकास एवं पंचायत विभाग ने राज्य की ऐसी 44 पंचायतों को चिन्हित किया है, जो अपने जिले में आबादी के हिसाब से सबसे बड़ी हैं। साथ ही उपायुक्त को निर्देश दिया गया है कि वह पंचायतों से ग्रांट खर्च नहीं कर पाने का स्पष्टीकरण लें और दो महीने के भीतर कार्यवाही की रिपोर्ट भेजें। वहीं, उपायुक्तों ने सभी पंचायतों से जवाब मांग लिया है। इन पंचायतों को 15 दिन के भीतर बताना होगा कि आखिर ग्रांट क्यों नहीं खर्च पाए। सरकार ने यह भी कहा है कि जिन पंचायतों के जवाब से उपायुक्त संतुष्ट नहीं है, वह उन पंचायतों को हटा भी सकते हैं। राज्य सरकार ने साल 2022-23 में राज्य की सभी पंचायतों को करीब 11 सौ करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर की थी। इन पंचायतों को आबादी के हिसाब से ग्रांट सौंपी गई थी। जिस पंचायत के पास ज्यादा आबादी थी, उन्हें ज्यादा राशि सौंपी गई।
एक साल बाद पंचायत विभाग ने अपनी समीक्षा में पाया कि कई पंचायतें ऐसी हैं, जो एक साल पूरा होने के बावजूद अपनी ग्रांट खर्च नहीं कर पाईं। पंचायत विभाग ने सभी 22 जिले की दो-दो पंचायत को चिन्हित किया और उसकी एक रिपोर्ट बनाकर सभी उपायुक्त को सौंप दी है। उपायुक्त 15 दिन में इसकी जांच करेंगे। साथ ही पंचायतों से जवाब लेंगे। हालांकि कुछ पंचायतों ने अपना जवाब भेज दिया है, जिसमें उन्होंने ग्रांट खर्च नहीं कर पाने के पीछे तकनीकी कारण को बताया है।
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इन पंचायतों के पास है सबसे ज्यादा ग्रांट
पंचायत
राशि
सकरास(नूंह) 96.79
मुआना (जींद)
73.16
कौल (कैथल)
58.49
राहरा(करनाल)
56.83
मुलाना(अंबाला)
56.10
बापौली(पानीपत)
53.61
पटवार(हिसार)
52.11
दाता(हिसार)
51.53
चांदहट(पलवल)
50.22
अबूबशहर(सिरसा)
49.88
खानपुरकलां(सोनीपत)
49.00
कथूरा(सोनीपत)
46.73
झोझूकलां(चरखीदादरी)
45.43
अराड़ाना(करनाल)
40.04
उगला (अंबाला)
39.96
संडवा(भिवानी)
35.96
खरावड़(रोहतक)
34.27
पकस्मा(रोहतक)
29.81
कहीं एनओसी नहीं तो कहीं विभाग की ही ढिलाई
सरकार की ओर से भले ही पंचायतों से स्पष्टीकरण मांग लिया गया हो, मगर कई पंचायतों ने इसके पीछे तकनीकी कारण बताए हैं। कई जगह पंचायत विभाग की ढिलाई भी सामने आई है। अंबाला की मुलाना ग्राम पंचायत की ओर से बताया गया है कि 56 लाख में से 23 लाख रुपये नाले के निर्माण के लिए जारी हुए थे, मगर वन विभाग की ओर से एनओसी नहीं मिलने से काम अटका पड़ा है।
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करनाल के पंचायती राज के एक्सईएन परमिंदर सिंह ने बताया कि अराड़ना व राहड़ा पंचायत के 25-25 लाख रुपये के विकास कार्य हो चुके हैं। दोनों पंचायतों की स्टेट फाइनेंस कमीशन से पेमेंट नहीं हुई, इसलिए अभी पोर्टल पर दोनों पंचायतों द्वारा काम न होने की जानकारी प्रदर्शित हुई है। वहीं, कोसली के गुड़ियानी सरपंच नरेंद्र का कहना है कि उनके गांव में ई-टेंडरिंग के तीस लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, जिसका काम चल रहा है, लेकिन पंचायती राज एक्सईएन की ओर से हेड ऑफिस में देरी से कागज भेजने पर उनके नाम ग्रांट खर्च न करने का नोटिस आया है, जबकि जो ई-टेंडरिंग का पैसा मंजूर हुआ था, उसका काम चल रहा है।
भिवानी की संडवा व लोहानी पंचायतों ने दावा किया है कि जो ग्रांट आई थी, उसके विकास कार्य करवा दिए गए हैं। पंचायतों का तर्क है कि दस्तावेज में दुरस्त नहीं है, इसलिए सही जानकारी नहीं पहुंची। इसमें ग्राम पंचायतों के खाते भी बदले गए हैं।
चरखी दादरी के झोझूकलां सरपंच अशोक कुमार का दावा है कि 85 लाख की राशि के प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुके हैं, लेकिन विभाग की ओर से ही उनके प्रस्ताव को लंबित करके रखा गया है।
क्या बोले अधिकारी
आखिर झोझूकलां के प्रस्ताव क्यों लटके हैं। इस विषय की जांच करवाई जा रही है। इसकी रिपोर्ट लेकर सरकार को भेजी जाएगी। -नरेंद्र सरवान, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, चरखीदादरी।
सिरसा की दो पंचायतों को लेकर नोटिस मिला था। इन गांवों में विकास कार्य करवाए जा चुके हैं। जल्द ही इस संबंध में मुख्यालय को जानकारी उपलब्ध करवा दी जाएगी। -विशाल कुमार, डीपीआरओ, सिरसा।
खर्चा अंतिम प्रक्रिया है। कई जगह मामला भुगतान पर जाकर फंस जाता है। इस संबंध में जांच जारी है। -विवेक चौधरी, सीईओ,जिला परिषद,पानीपत।
इन ग्राम पंचायतों की ओर से ग्रांट न खर्च करने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इस समय दोनों की ग्राम पंचायतों को नोटिस जारी किए गए हैं।- अश्वनी मलिक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, कैथल।