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300 साल पुराने पावन स्वरूप को लाहौर संग्रहालय में दर्शनों के लिए रखने पर नाराजगी, जानिए मामला
Fri, 11 Sep 2020 10:52 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 11 Sep 2020 10:52 AM IST
सार
- पाकिस्तानी सिखों की मांग, किसी एतिहासिक गुरुद्वारा साहिबान में सुशोभित किया जाए पावन स्वरूप
- विभाजन के दौरान पलायन करने वाले सिख इस पावन स्वरूप को लाहौर संग्रहालय में भेंट कर गए थे
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गुरु ग्रंथ साहिब की हस्तलिखित प्रति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लगभग 300 साल पुराने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के हस्त लिखित पावन स्वरूप को लाहौर के एक संग्रहालय में दर्शनों के लिए रखे जाने पर पाकिस्तानी सिखों ने आपत्ति जताई है। पीएसजीपीसी ने इस पावन स्वरूप को किसी गुरुद्वारा साहिबान में सुशोभित करने की मांग की है। इस पावन स्वरूप पर कोई तारीख तो अंकित नहीं है लेकिन इसकी लिखाई और स्याही से अनुमान लगाया जाता है कि यह तीन सौ साल से अधिक पुराना है।
इस हस्त लिखित पावन स्वरूप की पवित्र बीड़ देश विभाजन के दौरान पलायन करने वाले सिख लाहौर संग्रहालय में भेंट कर गए थे। तभी से पावन स्वरूप को यहां संभाला गया था। बुधवार को इसे दर्शनों के लिए रखा गया। एक लिखित स्वरूप सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन की पहली मंजिल में भी संगत के दर्शनों के लिए सुशोभित है। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) के पूर्व अध्यक्ष बिशन सिंह ने कहा कि इस पावन स्वरूप को पाकिस्तान स्थित किसी भी एतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में सुशोभित किया जाना चाहिए। इसे किसी अन्य किताब की तरह एक कोठरी में नहीं रखा जा सकता।
पावन स्वरूप गुरुद्वारा साहिबान में ही सुशोभित होते हैं। बिशन सिंह के अनुसार, वह इस संवेदनशील मुद्दे पर पीएसजीपीसी की आगामी बैठक में चर्चा करने की मांग करेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि संग्रहालय को इस दुर्लभ ग्रंथ को गुरुद्वारे में देना चाहिए और सिखों के एक समूह को पवित्र ग्रंथ की सेवा संभाल के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए। जानकारी के अनुसार, कई हस्तलिखित पावन स्वरूप मुल्तान संग्रहालय व दयाल सिंह ट्रस्ट लाइब्रेरी में संरक्षित किए हुए हैं। स्थानीय सिख इस प्राचीन पावन स्वरूप को लाहौर स्थित गुरु द्वारा डेरा साहिब में सुशोभित करने की मांग कर रहे हैं।
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इस हस्त लिखित पावन स्वरूप की पवित्र बीड़ देश विभाजन के दौरान पलायन करने वाले सिख लाहौर संग्रहालय में भेंट कर गए थे। तभी से पावन स्वरूप को यहां संभाला गया था। बुधवार को इसे दर्शनों के लिए रखा गया। एक लिखित स्वरूप सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य भवन की पहली मंजिल में भी संगत के दर्शनों के लिए सुशोभित है। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) के पूर्व अध्यक्ष बिशन सिंह ने कहा कि इस पावन स्वरूप को पाकिस्तान स्थित किसी भी एतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में सुशोभित किया जाना चाहिए। इसे किसी अन्य किताब की तरह एक कोठरी में नहीं रखा जा सकता।
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पावन स्वरूप गुरुद्वारा साहिबान में ही सुशोभित होते हैं। बिशन सिंह के अनुसार, वह इस संवेदनशील मुद्दे पर पीएसजीपीसी की आगामी बैठक में चर्चा करने की मांग करेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि संग्रहालय को इस दुर्लभ ग्रंथ को गुरुद्वारे में देना चाहिए और सिखों के एक समूह को पवित्र ग्रंथ की सेवा संभाल के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए। जानकारी के अनुसार, कई हस्तलिखित पावन स्वरूप मुल्तान संग्रहालय व दयाल सिंह ट्रस्ट लाइब्रेरी में संरक्षित किए हुए हैं। स्थानीय सिख इस प्राचीन पावन स्वरूप को लाहौर स्थित गुरु द्वारा डेरा साहिब में सुशोभित करने की मांग कर रहे हैं।
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पावन स्वरूप पीएसजीपीसी को सौंपे लाहौर संग्रहालय: सतवंत सिंह
पीएसजीपीसी अध्यक्ष सतवंत सिंह ने एक संदेश में कहा कि वह लाहौर संग्रहालय के संपर्क में हैं। संग्रहालय की प्रभारी अलिजा सबा रिजवी से आग्रह किया गया है कि वहां सुशोभित पावन स्वरूप व अन्य हस्त लिखित धार्मिक ग्रंथ पीएसजीपीसी को सौंपे जाए। संग्रहालय में सुशोभित पावन स्वरूप की संभाल गुरु मर्यादाओं के अनुसार हो, इसके लिए सिखों का एक जत्था हर हफ्ते संग्रहालय जाता है। वहां पावन स्वरूप के रुमाला साहिब बदले जाते हैं।
गुरु मर्यादाओं के साथ होगी सेवा संभाल: रिजवी
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की यह हस्तलिखित प्रति दुर्लभ है। यह पावन स्वरूप कब लिखा गया था इस पर कोई तारीख तो अंकित नहीं है, लेकिन इस पावन स्वरूप की लिखाई और स्याही से अनुमान लगाया जाता है कि यह तीन सौ साल से अधिक पुराना है। संग्रहालय में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप सिख धर्म की मर्यादाओं और परंपराओं के तहत संरक्षित किया जाएगा। सिख पावन स्वरूप पालकी साहिब में सुशोभित करते हैं। इस परंपरा का पालन भी किया जाएगा। संग्रहालय में सिख धर्म के कई ऐतिहासिक हस्तलिखित ग्रंथ और अन्य धार्मिक किताबें संरक्षित की हुई हैं। संग्रहालय में एक अलग गैलरी भी तैयार की गई है।
- अलिजा सबा रिजवी, मुखिया, लाहौर संग्रहालय
गुरु मर्यादाओं के साथ होगी सेवा संभाल: रिजवी
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की यह हस्तलिखित प्रति दुर्लभ है। यह पावन स्वरूप कब लिखा गया था इस पर कोई तारीख तो अंकित नहीं है, लेकिन इस पावन स्वरूप की लिखाई और स्याही से अनुमान लगाया जाता है कि यह तीन सौ साल से अधिक पुराना है। संग्रहालय में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप सिख धर्म की मर्यादाओं और परंपराओं के तहत संरक्षित किया जाएगा। सिख पावन स्वरूप पालकी साहिब में सुशोभित करते हैं। इस परंपरा का पालन भी किया जाएगा। संग्रहालय में सिख धर्म के कई ऐतिहासिक हस्तलिखित ग्रंथ और अन्य धार्मिक किताबें संरक्षित की हुई हैं। संग्रहालय में एक अलग गैलरी भी तैयार की गई है।
- अलिजा सबा रिजवी, मुखिया, लाहौर संग्रहालय