भारत में फंसे 198 पाक नागरिक अपने वतन लौटे, भारतीय विदेश मंत्रालय का किया शुक्रिया
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कोरोना के कारण देश के कई राज्यों में फंसे 198 पाकिस्तानी नागरिक गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय अटारी सड़क सीमा से अपने वतन रवाना हो गए। इनमें भारतीय मूल की पाकिस्तान में विवाहित कई महिलाएं भी शामिल थीं। अटारी सीमा पर तैनात प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण पाल सिंह के अनुसार दोपहर तक 60 से अधिक पाकिस्तानी सीमा पार कर चुके थे।
पाकिस्तान जाने वाले सभी नागरिकों की मेडिकल जांच उन शहरों में हो चुकी है, जहां वह रुके थे। अटारी सड़क सीमा पर स्थित आईसीपी में सभी पाकिस्तानी नागरिकों का कोरोना टेस्ट किया गया। कस्टम और इमीग्रेशन अधिकारियों ने इनके दस्तावेजों व सामान की गहन जांच की। पाकिस्तान वाघा सीमा में प्रवेश से पहले बीएसएफ के जवानों ने उनके दस्तावेजों की जांच की।
पाकिस्तान लौट रही सलमा चौधरी ने बताया कि वह करीब सात माह बाद अपने घर जा रही है। घर पर उसका सात साल का बेटा और पति इंतजार कर रहे हैं। सहारनपुर की रहने वाली सलमा का विवाह नौ वर्ष पहले कराची में हुआ था। लॉकडाउन लागू होने के 15 दिन पहले वह अपने मायके सहारनपुर आई थी।
Punjab: Few Pakistani nationals who were stuck in India due to #COVID19 lockdown crossed over to Pakistan via Attari-Wagah border today.
"I came in March & got stuck here due to lockdown. I thank MEA & Pakistan High Commission for helping me," says a Karachi resident. pic.twitter.com/X4oINuIP79 — ANI (@ANI) September 3, 2020
सलमा ने बताया कि वह अपने बेटे से मिलने के लिए उत्साहित है। भारतीय विदेश मंत्रालय का शुक्रिया जिन्होंने कोरोना के दौरान बेटियों को अपने ससुराल जाने के लिए मंजूरी दी है। सलमा कहती हैं कि हालांकि मायके में मुझे कोई परेशानी नहीं थी। वह अपने माता-पिता व भाई बहनों के साथ थी, लेकिन सात साल के बेटे को मिलने की चाहत उसे रुला देती थी। कराची में बेटे व पति से रोज मोबाइल पर बात हो जाती थी लेकिन जब बेटा यह पूछता था कि घर कब आओगे तो आंसू रोकना मुश्किल हो जाता था।
हिंदुस्तान मेरी जन्म भूमि, पाकिस्तान मेरा ससुराल
शगुफ्ता ने बताया कि वह अपनी बीमार मां से मिलने मायके आई थी। इसके तीन दिन बाद ही लॉकडाउन लागू हो गया था। परिवार पाकिस्तान में है। अटारी पहुंच गई हूं, अब जल्दी बच्चों के पास पहुंच जाऊंगी, यह सोच कर ही सीमा के उस पार खड़े पति व बच्चों की तरफ कदम अपने आप आगे बढ़ रहे हैं।
शगुफ्ता के अनुसार, हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों देश अच्छे हैं। हिंदुस्तान की माटी में मैं पैदा हुई हूं। यह देश मुझे बहुत अजीज है। पाकिस्तान मेरे पति का घर है। वह भी दिल के करीब है। दोनों देशों की सरकारों का शुक्रिया, जिन्होंने पाकिस्तानी नागरिकों को अपने-अपने घरों में भेजने का प्रबंध किया।
इंशा अल्लाह! वह दिन जल्द आएगा जब समझौता एक्सप्रेस फिर शुरू होगी
अपने साले के बेटे की शादी में शामिल होने के लिए 23 फरवरी को अपनी पत्नी के साथ हिंदुस्तान आए अजर अब्बास ने बताया कि उनकी वापसी का टिकट 19 अप्रैल का था। लॉकडाउन के कारण वह अपने ससुराल भोपाल में फंस गए थे। उन्होंने मजाक में कहा कि छह महीने अपनी पत्नी के साथ ससुराल में बिताना उनके लिए किसी तारीख से कम नहीं रहा।
दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंध हैं। एक-दूसरे के यहां आने से एक सुकून मिलता है। यह कह कर अजर अब्बास की आंखें छलक गई। उन्होंने कहा इंशा अल्लाह! वह दिन जल्द आएगा जब समझौता एक्सप्रेस व अन्य साधन खुल जाएंगे। उनकी पत्नी अपने मायके आती-जाती रहती है, वह कई साल बाद आए थे। दोनों देशों के बीच मोहब्बत व भाईचारा स्थापित रहना चाहिए, यही दुआ कर लौट रहा हूं। दोनों देशों के लोगों के बीच बहुत प्यार है।
शवि फातिमा ने बताया कि मायके को छोड़ने का गम तो है लेकिन अपने घर जाने और बच्चों से मिलने की उत्सुकता रोमांचित कर रही है। कराची की रहने वाली जहांगीर ने बताया कि वह साढ़े तीन वर्ष के बाद अपने मायके अपना भारतीय पासपोर्ट रिन्यू करवाने आई थी। अब छह माह बाद घर लौट रही हैं।