{"_id":"61212c148ebc3e79f46efd02","slug":"now-pu-postpones-senate-faculty-elections-chandigarh-news-pkl4241623186","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब पीयू ने टाले सीनेट संकाय चुनाव, घमासान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब पीयू ने टाले सीनेट संकाय चुनाव, घमासान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय ने सीनेट स्नातक वर्ग चुनाव टालने के बाद अब संकाय चुनाव भी स्थगित कर दिए हैं। इसके कारण किसी को नहीं बताए गए हैं। इसे लेकर पूर्व सीनेटरों में घमासान शुरू हो गया है। आरोप लगाए हैं कि पीयू के अफसर जान-बूझकर ऐसा कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि पीयू में सीनेट का गठन हो। अफसर मनमानी कर रहे हैं।
पीयू ने 12 अगस्त को यह कहते हुए स्नातक वर्ग का चुनाव टाल दिया था कि उत्तराखंड, दिल्ली से बूथ बनाने के लिए अनुमति नहीं मिली। इसके अलावा कुछ अन्य कारण दिए। हाईकोर्ट ने पीयू के अफसरों पर विश्वास जताया था कि वे चुनाव करवाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि हाईकोर्ट ने अफसरों को यह भी कहा था कि स्थितियां उनके नियंत्रण से बाहर हों तो वह निर्णय ले सकते हैं। स्नातक वर्ग चुनाव टालने को लेकर पूर्व सीनेटर, छात्र संघर्ष कर रहे हैं। धरना-प्रदर्शन चल रहा है। इसी बीच शुक्रवार को संकाय चुनाव टाल दिए गए। हालांकि एक सितंबर चुनाव के लिए तिथि तय है, लेकिन वह चांसलर व यूटी प्रशासन की अनुमति के बाद ही होगा। कुल मिलाकर यह चुनाव भी अब होता नहीं दिख रहा।
पूर्व सीनेटरों व छात्रों में आक्रोश
इसे लेकर पूर्व सीनेटरों ने पीयू के अफसरों पर आरोप लगाए हैं। डीपीएस रंधावा का कहना है कि जब कॉलेजों के चुनाव हो सकते हैं तो 300 वोटों वाला संकाय चुनाव क्यों नहीं। अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और इसे जानबूझकर टाल रहे हैं। चुनाव टालने के कारण भी नहीं बताए गए। यह गैर-जिम्मेदाराना काम है और दोषियों को दंड भी मिलना चाहिए। कुछ अन्य पूर्व सीनेटरों ने चांसलर को भी पत्र लिखा है। वीसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर छात्र उग्र प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। छात्रों ने साफ कह दिया है कि जो कुछ भी होगा, उसके जिम्मेदार अब अफसर होंगे। लगातार छात्रों में इसे लेकर आक्रोश पनप रहा है। उन्होंने शनिवार को एक बैठक भी की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पीयू ने 12 अगस्त को यह कहते हुए स्नातक वर्ग का चुनाव टाल दिया था कि उत्तराखंड, दिल्ली से बूथ बनाने के लिए अनुमति नहीं मिली। इसके अलावा कुछ अन्य कारण दिए। हाईकोर्ट ने पीयू के अफसरों पर विश्वास जताया था कि वे चुनाव करवाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि हाईकोर्ट ने अफसरों को यह भी कहा था कि स्थितियां उनके नियंत्रण से बाहर हों तो वह निर्णय ले सकते हैं। स्नातक वर्ग चुनाव टालने को लेकर पूर्व सीनेटर, छात्र संघर्ष कर रहे हैं। धरना-प्रदर्शन चल रहा है। इसी बीच शुक्रवार को संकाय चुनाव टाल दिए गए। हालांकि एक सितंबर चुनाव के लिए तिथि तय है, लेकिन वह चांसलर व यूटी प्रशासन की अनुमति के बाद ही होगा। कुल मिलाकर यह चुनाव भी अब होता नहीं दिख रहा।
विज्ञापन
पूर्व सीनेटरों व छात्रों में आक्रोश
इसे लेकर पूर्व सीनेटरों ने पीयू के अफसरों पर आरोप लगाए हैं। डीपीएस रंधावा का कहना है कि जब कॉलेजों के चुनाव हो सकते हैं तो 300 वोटों वाला संकाय चुनाव क्यों नहीं। अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और इसे जानबूझकर टाल रहे हैं। चुनाव टालने के कारण भी नहीं बताए गए। यह गैर-जिम्मेदाराना काम है और दोषियों को दंड भी मिलना चाहिए। कुछ अन्य पूर्व सीनेटरों ने चांसलर को भी पत्र लिखा है। वीसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर छात्र उग्र प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। छात्रों ने साफ कह दिया है कि जो कुछ भी होगा, उसके जिम्मेदार अब अफसर होंगे। लगातार छात्रों में इसे लेकर आक्रोश पनप रहा है। उन्होंने शनिवार को एक बैठक भी की है।
विज्ञापन