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Chandigarh News: अब कॉपी-किताब और ड्रेस के लिए चुनिंदा दुकान नहीं बताएंगे निजी स्कूल

Wed, 27 Sep 2023 02:00 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Sep 2023 02:00 AM IST
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Now private schools will not tell selected shops for copies, books and dresses
चंडीगढ़। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक हर साल नया सत्र शुरू होने से पहले कॉपी-किताब और ड्रेस की खरीदारी को लेकर परेशान होते हैं। स्कूलों की ओर से खरीदारी के लिए चुनिंदा दुकानें तय करने से अभिभावकों की जेब भी ढीली होती है। सत्र 2024-25 में किताबों और ड्रेस की खरीदारी में अभिभावकों से लूट न हो इसलिए शिक्षा विभाग ने मंगलवार को नए दिशानिर्देश जारी किए। साथ ही एक नई समिति का गठन किया, जो पंजाब एजुकेशन कोड के अंतर्गत वर्तमान दिशानिर्देश की समीक्षा करेगी और 31 अक्तूबर को विभाग को रिपोर्ट देगी। शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशानिर्देशों के तहत अभिभावक किसी भी किताब की दुकान से पुस्तकें ले सकते हैं। स्कूल उन्हें किसी भी निश्चित दुकान से किताब या ड्रेस लेने के लिए नहीं कह सकता। सभी निजी स्कूलों के लिए अनिवार्य है कि कक्षा अनुसार किताबों की सूची, अन्य शिक्षण सामग्री और ड्रेस की जानकारी अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करवाए। ये जानकारी सत्र शुरू होने से पहले अभिभावकों के लिए उपलब्ध करवानी होगी।
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बता दें कि हर साल की तरह इस बार भी अप्रैल माह में नए सत्र शुरु होते ही शहर की चुनिंदा दुकानों पर महंगे दामों पर अभिभावकों को किताबों के महंगे सेट खरीदने पड़े। विभाग ने अपने दिशानिर्देश में परिजनों को हुई परेशानी का जिक्र किया है। अगले सत्र में ऐसी स्थिति पैदा न हो इसलिए गठित समिति मामले से जुड़ी समस्याओं और दिशानिर्देशों का अध्ययन करेगी और सुझाव देगी। शिक्षा विभाग की ओर से गठित समिति में उप निदेशक-1 सुनील बेदी, उप निदेशक-3 नीना कालिया, कानून अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी बिंदु अरोड़ा, जीएमएसएसएस-21 और जीएमएसएसएस-35 के प्रधानाचार्य शामिल हैं।
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अपने ही दिशानिर्देश को भूला प्रशासन : गोयल
शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशानिर्देश पर चंडीगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्ष 2018 में शिक्षा विभाग ने स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को अनिवार्य किया था, जिसे उच्च न्यायालय ने सही ठहराया था लेकिन विभाग की ओर से इस आदेश को लागू करने पर कभी जोर नहीं दिया गया। इसकी वजह से निजी स्कूल कई महंगी किताबें बच्चों को लगा देते हैं। विभाग की ओर से जारी किए गए नए दिशानिर्देशों में भी एनसीईआरटी की पुस्तकों का कोई जिक्र नहीं है। गोयल ने कहा कि समिति गठित करने के बजाय विभाग अपने ही आदेशों को मजबूती से लागू करे तो अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी।
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