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अपने ही दो भाइयों, दो बहनों समेत 7 लोगों को मारने वाली पर नहीं कर सकते रहम: हाईकोर्ट

Wed, 18 Jul 2018 11:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 18 Jul 2018 11:30 AM IST
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No Mercy for Murderer of Seven People of Own Family, Highcourt Said
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अपने ही दो भाइयों, दो बहनों और दादी समेत सात लोगों की हत्या करने वाली पर रहम नहीं किया जा सकता। उसकी और उसके प्रेमी की मौत की सजा बरकरार रहेगी। रोहतक के कबूलपुर गांव में अपने परिवार के तीन छोटे बच्चों और 70 वर्षीय बुजुर्ग सहित 7 लोगों को जहर देकर हत्या करने वाली सोनम और उसके प्रेमी की मौत की सजा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा इस तरह से अपने माता-पिता और छोटे-छोटे बच्चों की हत्या करने वालों पर किसी भी सूरत में रहम नहीं किया जा सकता है।
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ट्रायल कोर्ट ने दोनो को दोषी करार दे मौत की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दािखल की थी। मंगलवार को हाईकोर्ट ने यह दोनों ही याचिकाएं खारिज कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने का निर्णय लिया। हालांकि दोनों को जहर उपलब्ध करवाने वाले जसबीर की अपील स्वीकार कर हाईकोर्ट ने उसे रिहा कर दिया। सोनम उर्फ सोनू और नवीन उर्फ मोनू का प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों का जाति गोत्र एक होने के चलते सोनम के परिवार वाले इस रिश्ते के खिलाफ थे। लगातार इन दोनों पर संबंध तोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
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14 सितंबर 2009 की रात को सोनम की दादी भूरी देवी (60), ताई प्रोमिला (35), ताऊ सुरेंद्र (40), बहन सोनिका (12), भाई अरविंदर (16), बहन मोनिका  (10) भाई विशाल (8) की हत्या कर दी गई। सभी सात लोगों को जहर देकर हत्या की गई थी। यह मामला बेहद सुर्खियों में रहा था। पुलिस ने गहन जांच के बाद इस मामले में सोनम नवीन और उनके एक अन्य साथी जयवीर को गिरफ्तार कर लिया था। वर्ष 2014 में ट्रायल कोर्ट ने इन तीनों को दोषी करार दे सोनम और नवीन को फांसी की सजा सुना दी थी।
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हत्या में इस्तेमाल होने वाला जहर उपलब्ध करवाने के लिए जसबीर को भी दोषी करार दिया था। ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ इन तीनों ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर दी थी। मंगलवार को जस्टिस ए.बी. चौधरी एवं जस्टिस कुलदीप सिंह की खंडपीठ ने सोनम और नवीन की फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दिया। जसबीर की अपील स्वीकार करते हुए उसे बरी किये जाने के आदेश दे दिए हैं।

जीवन जीने के अधिकार की दलील भी मंजूर नहीं
मामला जब ट्रायल कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए पहुंचा था तो दोनों की ओर से जीने के अधिकार की दलील देते हुए रहम की मांग की गई थी। वहीं पुलिस की ओर से 2001 से रेलू राम पुनिया हट हत्याकांड तथा 2010 में उत्तराखंड में हुए सुंदर केस का हवाला देते हुए कहा गया था कि इन दोनों मामलों में परिवार की हत्या की गई थी। ऐसे में यह मामला भी रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है और दोनों को मौत की सजा होनी चाहिए। सेशन जज एसके गुप्ता ने इसके बाद दोनों को मौत की सजा सुनाते हुए सुनारिया जेल भेज दिया था।


ऐसे दिया गया था साजिश को अंजाम
14 सितंबर 2009 की रात को सोनम ने परिवार के खाने में जहर मिला दिया था। खुद उसे वह खाना न खाना पड़े, इसलिए परिवार को बताया कि उसका व्रत है।  जब परिवार के सभी सदस्य गहरी नींद में सो गए थे तो बारी-बारी से सभी का गला दबा दिया गया। इसके बाद सोनम ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया और सुबह  जब ग्रामीण पहुंचे तो बताया कि लूटपाट करने वालों ने परिवार के सभी सदस्यों की हत्या कर दी और उसे बाथरूम में बंद कर दिया। जब पुलिस ने पूछताछ की तो उन्होंने वारदात कबूल कर ली।
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