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Chandigarh News: नाइट क्लबों में मस्ती फुल, सुरक्षा जीरो

Sun, 24 May 2026 11:15 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2026 11:15 PM IST
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Night clubs are full of fun, but there's zero security.
पंचकूला सेक्टर-5, 9 और 11 के कई क्लबों में इमरजेंसी एग्जिट तक नहीं
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बेसमेंट से रूफटॉप तक चल रहे लाउंज बार, हादसे की स्थिति में फंस सकते हैं सैकड़ों लोग


पंचकूला। शहर में तेजी से बढ़ रही नाइट लाइफ और क्लब कल्चर के बीच सुरक्षा इंतजामों की हकीकत चिंता बढ़ा रही है। सेक्टर-5, 9 और 11 समेत कई इलाकों में संचालित क्लबों और लाउंज बार में इमरजेंसी एग्जिट, निकासी मार्ग और आपातकालीन सुरक्षा इंतजाम नाकाफी हैं। यहां पर आग, शॉर्ट सर्किट, गैस रिसाव या भगदड़ जैसी किसी भी आपात स्थिति में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। शहर में संचालित करीब 20 क्लब और लाउंज बार में से अधिकांश बेसमेंट, ऊपरी मंजिलों और रूफटॉप पर चल रहे हैं। इनमें कई जगह मुख्य प्रवेश द्वार ही अंदर आने और बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता बना हुआ है। वीकेंड पर लाइव म्यूजिक नाइट और निजी आयोजनों के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है। कई प्रतिष्ठानों में क्षमता से अधिक लोगों की मौजूदगी भी देखने को मिलती है लेकिन सुरक्षा इंतजाम उसी अनुपात में मजबूत नहीं किए गए। 20 क्लब और लाउंज बार में से एक से दो के पास ही इमरजेंसी एग्जिट है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बंद स्थानों में आग लगने या धुआं भरने की स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक होती है। बिजली गुल होने या अफरा-तफरी मचने पर भगदड़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हाल ही में गोवा के एक क्लब में आग लगने की घटना के बाद देशभर में क्लबों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। उस हादसे में लोगों को बाहर निकलने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।



पंचकूला के कई क्लबों में फायर एनओसी तो प्रदर्शित की जाती है लेकिन जमीनी स्तर पर इमरजेंसी एग्जिट, ग्लो साइन बोर्ड, आपातकालीन लाइटिंग और नियमित मॉक ड्रिल जैसी व्यवस्थाएं दिखाई नहीं देतीं। कई जगह पार्किंग अव्यवस्थित होने के कारण दमकल वाहनों के पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है। बेसमेंट क्लबों में वेंटिलेशन की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है।
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-गोवा के एक क्लब में आग लगने से 25 लोगों की हुई थी मौत


गोवा के एक क्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत के बाद सुरक्षा प्रबंधों को लेकर देशभर में चिंता बढ़ा दी है। आग लगने के बाद धुआं तेजी से फैलने के कारण लोगों को बाहर निकलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था और इस हादसे में लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे हादसे इस बात की चेतावनी हैं कि भीड़भाड़ वाले मनोरंजन स्थलों पर सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
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क्या कहते हैं नियम



अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुसार भीड़भाड़ वाले किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में क्षमता के अनुरूप प्रवेश और निकास द्वार, वैकल्पिक निकासी मार्ग, सुरक्षित, फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और बाधा रहित कॉरिडोर अनिवार्य हैं। इमरजेंसी एग्जिट हर समय खुला और साफ रूप से चिन्हित होना चाहिए। राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार क्लब और सामाजिक समारोह स्थल असेंबली बिल्डिंग (ग्रुप-डी) की श्रेणी में आते हैं, जहां आग या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध अनिवार्य हैं। एनबीसी के नियमों के मुताबिक ऐसे भवनों में पर्याप्त संख्या में चौड़े निकास द्वार, बाहर की ओर खुलने वाले दरवाजे, आपातकालीन सीढिय़ां और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पैनिक बार की व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि हादसे की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इसके अलावा दमकल वाहनों की आवाजाही के लिए भवन के चारों ओर पर्याप्त चौड़ा मार्ग और अग्निशमन उपकरण भी अनिवार्य हैं। क्लबों में फायर एनओसी के साथ-साथ इमरजेंसी एग्जिट, स्पष्ट निकासी मार्ग, वेंटिलेशन के लिए सुविधाएं तथा अन्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।




क्या कहते हैं फायर ऑफिसर



फायर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिन क्लबों और लाउंज बार को एक्साइज अनुमति दी गई है, उनके पास फायर एनओसी मौजूद है। हालांकि अब सभी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था और इमरजेंसी निकासी की दोबारा जांच की जाएगी। सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।- रविंदर पराशर, फायर ऑफिसर
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