चंडीगढ़: नई आयुक्त आनंदिता मित्रा के सामने वित्तीय संकट से उबारने व कचरा गाड़ियों के संचालन तक की चुनौती
निगम ने साल 2019 में वेंडरों को वेंडिंग जोन में स्थानांतरित किया था। इसके बाद कोरोना आ गया। पंजाब-हरियाणा के वेंडरों से निगम फीस ले रहा है लेकिन जगह नहीं दी है। वह पार्किंग में बैठे हैं। इस व्यवस्था को फिर से पटरी लाने में मशक्कत करनी होगी।
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चंडीगढ़ नगर निगम की नई आयुक्त आनंदिता मित्रा सोमवार को अपना कार्यभार संभालेंगी। आनंदिता मित्रा के सामने कई चुनौतियां रहेंगी। सबसे बड़ी चुनौती निगम को वित्तीय संकट से उबारना होगा। दूसरी ओर, शहर में कचरा उठाने वाली गाड़ियों के संचालन और शुल्क को लेकर आ रही समस्याओं को ठीक करना भी चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा ई-गवर्नेंस को और मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।
पूर्व आयुक्त केके यादव ने पिछले तीन साल में स्मार्ट सिटी व नगर निगम की कई योजनाओं को शुरू कराया है। इन योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने और उनमें सुधार भी नई आयुक्त के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इस साल के अंत में नगर निगम के चुनाव होने हैं। इससे पहले पार्षदों को अपने क्षेत्र में बेहतर काम कर दिखाना है, ताकि लोगों के सामने अपने कार्यकाल की उपलब्धि रख सकें।
वित्तीय संकट
बढ़ी पानी की दर कम होने से निगम को 90 करोड़ का नुकसान हो रहा है। निगम ने प्रशासन को अतिरिक्त फंड देने के लिए पत्र लिखा, लेकिन प्रशासन ने इनकार कर दिया। वहीं, केंद्र से बजट में 20 प्रतिशत की कटौती के लिए भी कहा गया है। ऐसे में विकास कार्यों को चालू रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
घरों से कचरा उठाने की व्यवस्था
निगम ने घरों से कचरा लेने के लिए शहर में गाड़ियां संचालित कर दीं हैं लेकिन गाड़ियों को लेकर असमंजस है। पानी के बिल के साथ जुड़कर आ रहे कचरे के शुल्क को लेकर लोगों में नाराजगी है। इस व्यवस्था को ठीक करना आयुक्त की जिम्मेदारी होगी।
राजनीतिक पार्टियों से तालमेल
पूर्व आयुक्त केके यादव से भाजपा व कांग्रेस के कई पार्षदों से बवाल हुआ था। बवाल के बाद आयुक्त सदन की बैठक छोड़कर भी निकल चुके हैं। मामला प्रशासक के पास तक पहुंचा था। पार्षद अपने क्षेत्र के कार्यों को कराना चाहेंगे। पार्षदों से तालमेल बनाना बड़ी चुनौती होगी।
कर्मचारियों से तालमेल की रणनीति बनानी होगी
स्मार्ट घड़ी बांधने, फील्ड में कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, सफाई का निजीकरण करने जैसे मुद्दों पर कर्मचारी व आयुक्त के बीच हमेशा तनातनी रही। इस दौरान कर्मचारी हड़ताल तक पर चले गए। कर्मचारियों के साथ तालमेल बनाने की आयुक्त को रणनीति बनानी होगी।
कचरा निस्तारण प्लांट
शहर के कचरे का निस्तारण सबसे बड़ी चुनौती है। निगम ने प्लांट तो ले लिया लेकिन उसे चला नहीं सका। अब निगम गीले कचरे की मशीन को अपग्रेड करने और सूखे कचरे की नई मशीन लगाने की योजना बना रहा है, जो पिछले सात माह से कागजों में ही है।
सफाई व्यवस्था को संभालना होगा
शहर में लॉयंस कंपनी का ठेका खत्म होने वाला है। सेक्टर एक से लेकर 30 तक की भी पार्षद सफाई के निजीकरण की बात कर रहे हैं। कुछ पार्षदों ने लॉयंस का समर्थन किया था। स्वच्छता अभियान में लगातार गिरती रैंक को सुधारने के लिए व्यवस्था करनी होगी।