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नवजोत सिद्धू के नए विभाग से लग सकते हैं सरकार को झटके, मंत्री मनमर्जी से लेते रहे हैं बड़े फैसले
Sun, 09 Jun 2019 10:21 AM IST
खुशबू गोयल
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 09 Jun 2019 10:21 AM IST
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Navjot Singh Sidhu
- फोटो : file photo
कैप्टन ने नवजोत सिद्धू का विभाग तो बदल दिया, लेकिन एक मंत्रालय से सरकार को झटके लग सकते हैं, क्योंकि सिद्धू मनमर्जी से फैसले लेते रहे हैं। उन्होंने कभी भी सीएम की सलाह से फैसले लेने की परंपरा नहीं निभाई है। नए विभाग में भी वे पिछली सरकार के समझौतों पर बड़े फैसले ले सकते हैं।
कैप्टन ने सिद्धू से लोकल बॉडीज विभाग और पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले का विभाग वापस लेकर बिजली और अक्षय ऊर्जा स्रोत विभाग सौंपे हैं। आशंका है कि अगर सिद्धू ने अपने काम करने का स्टाइल लोकल बॉडीज विभाग वाला ही रखा तो एक तरफ जहां वे राज्य सरकार को झटके देंगे, वहीं कैप्टन के लिए भी नए सिरदर्द बन सकते हैं।
भले ही इसे सिद्धू के खिलाफ कैप्टन की कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन सिद्धू के हाथ आया नया विभाग भी बहुत ही अहम है, जिससे सीधे आम जनता के सरोकार जुड़े हैं। बिजली मंत्री के रूप में सिद्धू के नाम की घोषणा होते ही आम आदमी पार्टी ने उन्हें पत्र लिखकर पिछली सरकार द्वारा निजी कंपनियों से किए बिजली समझौते रद्द करने की मांग उठा दी है। इस बारे में खुद कैप्टन भी कह चुके हैं कि शर्तों के मुताबिक यह समझौते रद्द नहीं किए जा सकते हैं।
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कैप्टन ने सिद्धू से लोकल बॉडीज विभाग और पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले का विभाग वापस लेकर बिजली और अक्षय ऊर्जा स्रोत विभाग सौंपे हैं। आशंका है कि अगर सिद्धू ने अपने काम करने का स्टाइल लोकल बॉडीज विभाग वाला ही रखा तो एक तरफ जहां वे राज्य सरकार को झटके देंगे, वहीं कैप्टन के लिए भी नए सिरदर्द बन सकते हैं।
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भले ही इसे सिद्धू के खिलाफ कैप्टन की कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन सिद्धू के हाथ आया नया विभाग भी बहुत ही अहम है, जिससे सीधे आम जनता के सरोकार जुड़े हैं। बिजली मंत्री के रूप में सिद्धू के नाम की घोषणा होते ही आम आदमी पार्टी ने उन्हें पत्र लिखकर पिछली सरकार द्वारा निजी कंपनियों से किए बिजली समझौते रद्द करने की मांग उठा दी है। इस बारे में खुद कैप्टन भी कह चुके हैं कि शर्तों के मुताबिक यह समझौते रद्द नहीं किए जा सकते हैं।
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सिद्धू और अकालियों में छत्तीस का आंकड़ा
नवजोत सिद्धू का अकालियों और बादल पिता-पुत्र के साथ छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। अगर वे बिजली मंत्री का पद संभालते हैं तो संभव है कि बिजली समझौतों के साथ ही अकालियों को मिल रही बिजली सब्सिडी पर भी अंकुश लगाने की कोशिश करेंगे।
खास बात है कि लोकल बॉडीज मंत्री रहते हुए भी वे कोई फैसला मुख्यमंत्री की सलाह लेकर नहीं करते थे, बल्कि खुद फैसला लेकर प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेज देते थे। बिजली मंत्री के रूप में भी सिद्धू का यह वर्किंग स्टाइल कैप्टन के लिए मुश्किलें खड़ी करता रहेगा।
वैसे, विभाग बदले जाने से नाराज सिद्धू दिल्ली में राहुल गांधी से शिकायत करने जा चुके हैं। सिद्धू के इन तेवरों को देखकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी उन्हें नए विभाग के साथ रहने के लिए मना लेंगे और सिद्धू भी उनकी बात नहीं टालेंगे। दरअसल, सिद्धू को दिए नए विभाग का फैसला भी कैप्टन ने राहुल गांधी को जानकारी देकर ही किया है।
खास बात है कि लोकल बॉडीज मंत्री रहते हुए भी वे कोई फैसला मुख्यमंत्री की सलाह लेकर नहीं करते थे, बल्कि खुद फैसला लेकर प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेज देते थे। बिजली मंत्री के रूप में भी सिद्धू का यह वर्किंग स्टाइल कैप्टन के लिए मुश्किलें खड़ी करता रहेगा।
वैसे, विभाग बदले जाने से नाराज सिद्धू दिल्ली में राहुल गांधी से शिकायत करने जा चुके हैं। सिद्धू के इन तेवरों को देखकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी उन्हें नए विभाग के साथ रहने के लिए मना लेंगे और सिद्धू भी उनकी बात नहीं टालेंगे। दरअसल, सिद्धू को दिए नए विभाग का फैसला भी कैप्टन ने राहुल गांधी को जानकारी देकर ही किया है।
हटाए जाने वाले मंत्रियों की लगी लॉटरी
जैसा कि कैप्टन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे सिद्धू से लोकल बॉडीज विभाग वापस ले लेंगे, उन्होंने उस पर अमल भी किया। लेकिन सिद्धू के चक्कर में राज्य के कई अन्य मंत्रियों के विभाग भी बदले गए। बलबीर सिद्धू जो पशुपालन विभाग देख रहे थे, स्वास्थ्य मंत्री बन गए हैं। जबकि गुरप्रीत कांगड़ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री बन गए हैं।
खेल मंत्री राणा सोढी को एनआरआई मामले भी सौंप दिए गए हैं। खास बात यह रही कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिन मंत्रियों के हलकों में कांग्रेस हारी और जिन्हें मंत्री पद से हटाए जाने की चर्चा शुरू हो चुकी थी, विभागों के फेरबदल में ऐसे मंत्रियों के हाथ महत्वपूर्ण महकमे आ गए।
इससे यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि कैप्टन ने कैबिनेट से हटाए जाने वाले मंत्रियों को सजा दी है या शाबाशी। कैबिनेट मंत्री विजय इंदर सिंगला जिनके विधानसभा हलके में कांग्रेस को हार सामना करना पड़ा, उन्हें पीडब्ल्यूडी मंत्री के साथ-साथ शिक्षा मंत्री भी बना दिया गया है। हालांकि अरुणा चौधरी से ट्रांसपोर्ट विभाग लेकर रजिया सुल्ताना को सौंप दिया गया है।
खेल मंत्री राणा सोढी को एनआरआई मामले भी सौंप दिए गए हैं। खास बात यह रही कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिन मंत्रियों के हलकों में कांग्रेस हारी और जिन्हें मंत्री पद से हटाए जाने की चर्चा शुरू हो चुकी थी, विभागों के फेरबदल में ऐसे मंत्रियों के हाथ महत्वपूर्ण महकमे आ गए।
इससे यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि कैप्टन ने कैबिनेट से हटाए जाने वाले मंत्रियों को सजा दी है या शाबाशी। कैबिनेट मंत्री विजय इंदर सिंगला जिनके विधानसभा हलके में कांग्रेस को हार सामना करना पड़ा, उन्हें पीडब्ल्यूडी मंत्री के साथ-साथ शिक्षा मंत्री भी बना दिया गया है। हालांकि अरुणा चौधरी से ट्रांसपोर्ट विभाग लेकर रजिया सुल्ताना को सौंप दिया गया है।