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चंडीगढ़ में नहीं होगी पानी की किल्लत, नगर निगम ने लिया बड़ा फैसला, सदन में आएगा एजेंडा
Fri, 21 Feb 2020 12:54 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 21 Feb 2020 12:54 PM IST
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पानी की समस्या
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चंडीगढ़ नगर निगम अब पानी स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशासन पर आश्रित नहीं रहेगा। अब अपने ही फंड से निगम आधे दिन की पानी की क्षमता को बढ़ाकर पूरे दिन की करने जा रहा है। 25 फरवरी को सदन की बैठक में निगम एजेंडा लेकर आ रहा है, जिसमें लगभग 38 करोड़ से वाटर स्टोरेज क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
सेक्टर 39 में स्थित वाटर वर्क्स में कजौली से आने वाले पानी को स्टोर किया जाता है। उसके बाद अलग-अलग वाटर वर्क्स को सप्लाई किया जाता है। यहां पानी की टेस्टिंग के साथ ही पानी का स्टोरेज भी किया जाता है, लेकिन निगम केपास केवल आधे दिन की पानी स्टोरेज की क्षमता है। कजौली स्थित पंप के सभी फेज से पानी सप्लाई ठप होती है तो फिर शहर में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है।
ऐसे में निगम को टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है। निगम ने वाटर स्टोरेज का एजेंडा तो काफी समय पहले पास कर दिया था, लेकिन प्रशासन से फंड न मिलने से स्टोरेज क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकी। अब निगम अपने ही फंड से क्षमता बढ़ाने का एजेंडा लेकर आ रहा है।
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सेक्टर 39 में स्थित वाटर वर्क्स में कजौली से आने वाले पानी को स्टोर किया जाता है। उसके बाद अलग-अलग वाटर वर्क्स को सप्लाई किया जाता है। यहां पानी की टेस्टिंग के साथ ही पानी का स्टोरेज भी किया जाता है, लेकिन निगम केपास केवल आधे दिन की पानी स्टोरेज की क्षमता है। कजौली स्थित पंप के सभी फेज से पानी सप्लाई ठप होती है तो फिर शहर में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है।
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ऐसे में निगम को टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है। निगम ने वाटर स्टोरेज का एजेंडा तो काफी समय पहले पास कर दिया था, लेकिन प्रशासन से फंड न मिलने से स्टोरेज क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकी। अब निगम अपने ही फंड से क्षमता बढ़ाने का एजेंडा लेकर आ रहा है।
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गर्मियों में हर साल बढ़ जाती है समस्या
सेक्टर-39 वॉटर वर्क्स से शहर के सेक्टर-12, 26, 32, 37, 52 और मनीमाजरा के दो वॉटर वर्क्स को पानी सप्लाई होता है। वर्तमान में कजौली वाटर वर्क्स से शहर में छह फेज से 87 एमजीडी पानी सप्लाई हो रहा है। शहर में फिलहाल पानी की खपत 90 एमजीडी है, जबकि गर्मियों में डिमांड 125 एमजीडी तक पहुंच जाती है।
ऐसी स्थिति में टैंकर से ही पानी की सप्लाई होती है। अगस्त माह में पंप खराब होने से कजौली वाटर वर्क्स के चारों फेज की सप्लाई ठप हो गई थी। इससे शहर में लगभग तीन से चार दिन तक हाय तौबा मच गई। निगम ने अपने 17 टैंकर व 50 किराये पर लेकर सप्लाई करवाई। इसके बावजूद लोगों तक पानी नहीं पहुंच सका था।
सांसद व मेयर ने पानी स्टोरेज के लिए मांगा था 38 करोड़
28 सितंबर को उद्घाटन के समय तत्कालीन मेयर राजेश कालिया ने प्रशासक से अपील की थी कि अतिरिक्त पानी तो आ गया है, लेकिन उसे स्टोरेज करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जब कजौली वाटर वर्क्स पर कोई खराबी होती है या पाइप लाइन टूटती है तो पेयजल सप्लाई ठप हो जाती है।
यदि प्रशासन की ओर से 38 करोड़ का फंड मिल जाए तो यह समस्या भी हल हो जाएगी। उसके बाद सांसद ने गवर्नर से अपील की कि यह फंड उपलब्ध कराया जाए। प्रशासक ने कहा कि विकास कार्य कोई भी अवरुद्ध नहीं होना चाहिए, लेकिन फंड के लिए हां नहीं किया।
ऐसी स्थिति में टैंकर से ही पानी की सप्लाई होती है। अगस्त माह में पंप खराब होने से कजौली वाटर वर्क्स के चारों फेज की सप्लाई ठप हो गई थी। इससे शहर में लगभग तीन से चार दिन तक हाय तौबा मच गई। निगम ने अपने 17 टैंकर व 50 किराये पर लेकर सप्लाई करवाई। इसके बावजूद लोगों तक पानी नहीं पहुंच सका था।
सांसद व मेयर ने पानी स्टोरेज के लिए मांगा था 38 करोड़
28 सितंबर को उद्घाटन के समय तत्कालीन मेयर राजेश कालिया ने प्रशासक से अपील की थी कि अतिरिक्त पानी तो आ गया है, लेकिन उसे स्टोरेज करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जब कजौली वाटर वर्क्स पर कोई खराबी होती है या पाइप लाइन टूटती है तो पेयजल सप्लाई ठप हो जाती है।
यदि प्रशासन की ओर से 38 करोड़ का फंड मिल जाए तो यह समस्या भी हल हो जाएगी। उसके बाद सांसद ने गवर्नर से अपील की कि यह फंड उपलब्ध कराया जाए। प्रशासक ने कहा कि विकास कार्य कोई भी अवरुद्ध नहीं होना चाहिए, लेकिन फंड के लिए हां नहीं किया।
टेंडर फीस व टॉवर यूजर्स चार्ज देना होगा
इस बार नगर निगम अपना रेवेन्यू बढ़ाने वाला बजट ला रहा है। इसमें टेंडर के लिए भी फीस देनी होगी, जिसमें 20 लाख से कम के टेंडर पर एक हजार, 20 लाख से दो करोड़ तक के टेंडर पर तीन हजार और उससे ऊपर 5 हजार रुपये फीस देनी होगी। साल में लगभग एक हजार टेंडर होते हैं। इससे अच्छा रेवेन्यू आने की उम्मीद है।
वहीं, टावर से भी यूजर्स चार्जेज लेने की तैयारी है। कमिश्नर केके यादव के अनुसार लगभग 500 टावर शहर में लगे हैं। कंपनी से इनके चार्ज लेंगे। रेजिडेंशियल एरिया के टावर के 3 हजार और कॉमर्शियल एरिया के टावरों से पांच हजार रुपये मासिक किराया लिया जाएगा। इससे निगम को सालाना 2 करोड़ 16 लाख का रेवेन्यू मिलेगा। इसके अलावा रोड कट चार्जेज में 10 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
फायरकर्मियों के लिए फायर रिस्क अलाउंस
निगम इस बार दिल्ली की तर्ज पर फायरब्रिगेड के कर्मचारियों केलिए फायर रिस्क अलाउंस देने का एजेंडा ला रहा है, जिसमें कैटेगरी के हिसाब से 2800 और 3400 रुपये फायर अलाउंस देने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा हॉर्टिकल्चर वेस्ट से खाद बनाने के लिए निगम एरोबिक कंपोस्ट प्रोजेक्ट भी शुरू करने जा रहा है। इसके तहत 2 करोड़ से 66 पार्क में एरोबिक कंपोस्ट एरिया बनाया जाएगा, जिसमें हार्टिीकल्चर वेस्ट से ही खाद बनाई जाएगी।
वहीं, टावर से भी यूजर्स चार्जेज लेने की तैयारी है। कमिश्नर केके यादव के अनुसार लगभग 500 टावर शहर में लगे हैं। कंपनी से इनके चार्ज लेंगे। रेजिडेंशियल एरिया के टावर के 3 हजार और कॉमर्शियल एरिया के टावरों से पांच हजार रुपये मासिक किराया लिया जाएगा। इससे निगम को सालाना 2 करोड़ 16 लाख का रेवेन्यू मिलेगा। इसके अलावा रोड कट चार्जेज में 10 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
फायरकर्मियों के लिए फायर रिस्क अलाउंस
निगम इस बार दिल्ली की तर्ज पर फायरब्रिगेड के कर्मचारियों केलिए फायर रिस्क अलाउंस देने का एजेंडा ला रहा है, जिसमें कैटेगरी के हिसाब से 2800 और 3400 रुपये फायर अलाउंस देने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा हॉर्टिकल्चर वेस्ट से खाद बनाने के लिए निगम एरोबिक कंपोस्ट प्रोजेक्ट भी शुरू करने जा रहा है। इसके तहत 2 करोड़ से 66 पार्क में एरोबिक कंपोस्ट एरिया बनाया जाएगा, जिसमें हार्टिीकल्चर वेस्ट से ही खाद बनाई जाएगी।