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सेक्टर 56 के पार्कों में बने गड्ढों में कीचड़ भरा, कोई सुविधा नहीं, पार्कों में सैर करने के लिए न तो ट्रैक और न ही बच्चों के लिए झूले
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चंडीगढ़। बजट की कमी के चलते शहर के सभी पार्कों की स्थिति खराब होती जा रही है। सेक्टर-56 के 16 पार्कों की हालत काफी खराब हो चुकी है। यह पार्क देखने पर बंजर मैदान लगते हैं। इनमें न तो घास है और न ही सैर करने के लिए ट्रैक। कुछ पार्कों में कीचड़ तो कुछ में बड़ी घास के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता।
लोगों का कहना है चार साल से पार्कों की यही स्थिति है। लोगों ने आरोप लगाया कि जब से सतीश कैंथ को वहां का पार्षद नियुक्त किया गया है तब से वहां की सड़कों और पार्कों की हालत खस्ता हो गई है। वह चार साल से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। शहर के सुंदर पार्क ही चंडीगढ़ की पहचान हैं, लेकिन यह पार्क सिटी ब्यूटीफुल पर धब्बा हैं।
पार्क की हालत देखकर बढ़ जाता है तनाव
पार्कों में बैठकर इंसान अपने तनाव को भूलने की कोशिश करता है। यहां पार्कों की स्थिति देखकर तनाव ओर बढ़ जाता है। यहां के सभी निवासियों को अपने घर के पास वाले पार्क छोड़कर थोड़ी दूरी पर बने पार्क में सैर करने जाना पड़ता है। उसमें बैठने के लिए बेंच नहीं हैं। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं सबको परेशानी झेलनी पड़ती है।
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- विशाल भूषण, निवासी सेक्टर-56
पार्कों में बच्चों के लिए झूले तक नहीं
चंडीगढ़ जैसे शहर में लोगों को सुविधाएं न मिलना काफी निदंनीय है। बच्चों के लिए पार्कों में झूले तक टूट गए हैं। ऐसे में बच्चे खेल भी नहीं पा रहे हैं। बारिश के कारण सभी पार्कों में गड्ढे बने हुए हैं। उनमें कीचड़ भरा हुआ है। कुछ पार्कों में इतनी बड़ी घास उगी हुई है कि किसी भी हादसे को अंजाम दिया जा सकता है।
- धीरज राणा, निवासी सेक्टर-56
पार्कों में अंधेरा होने से फैल रही गंदगी
सेक्टर की सभी ग्रीन बेल्ट में घास बहुत बड़ी हो गई है, उसे कोई काटने नहीं आ रहा। सभी पार्कों में एक से दो फुट के गड्ढे बने हुए हैं। कुछ पार्कों की बाउंडरी रेलिंग भी टूटी हुई है। चार साल से लाइट न होने के कारण पार्कों में अंधेरा छाया रहता है। अंधेरे में लावारिस जानवर वहां पर गंदगी फैलाते रहते हैं। इससे निवासी परेशान हैं।
- जोगिंदर सिंह, निवासी सेक्टर 56
भीड़ के कारण कोरोना का खतरा
पार्कों की हालत खराब होने से सभी लोग एक ही पार्क में सैर करते हैं। इससे भीड़ जमा हो जाती है। इससे कोरोना का खतरा भी बना हुआ है। कई बार एक्सईएन और पार्षद को समस्या के बारे में लिखकर दे चुके हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। पार्कों में सफाई नहीं है। सड़कों में बने गड्ढे बड़े हादसे को बुलावा दे रहे हैं।
- होशियार सिंह, निवासी सेक्टर 56
नगर निगम के पास बजट न होने से हो रही देरी
पार्कों में रेलिंग, झूले, बेंच और अन्य चीजों की व्यवस्था के लिए एस्टिमेट बनाकर दे दिया गया है, लेकिन नगर निगम के पास अभी बजट नहीं है इसलिए इस कार्य में देरी हो रही है। मेरी जिम्मेदारी नगर निगम को समस्याओं से अवगत कराना है इसलिए अभी नगर निगम की तरफ से जब भी बजट पास होकर आता है सभी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा।
- सतीश कैंथ, एरिया पार्षद
पार्कों की ये हैं प्रमुख समस्याएं
1. पार्कों की रेलिंग टूटी हुई हैं।
2. पार्कों में लाइट नहीं है।
3. गड्ढे होने के कारण कीचड़ हो रहा है।
4. ग्रीन बेल्ट में बढ़ी हुई है घास
5. पार्कों में कोई फूल नहीं
6. सैर करने के लिए ट्रैक की कोई व्यवस्था नहीं।
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लोगों का कहना है चार साल से पार्कों की यही स्थिति है। लोगों ने आरोप लगाया कि जब से सतीश कैंथ को वहां का पार्षद नियुक्त किया गया है तब से वहां की सड़कों और पार्कों की हालत खस्ता हो गई है। वह चार साल से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा। शहर के सुंदर पार्क ही चंडीगढ़ की पहचान हैं, लेकिन यह पार्क सिटी ब्यूटीफुल पर धब्बा हैं।
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पार्क की हालत देखकर बढ़ जाता है तनाव
पार्कों में बैठकर इंसान अपने तनाव को भूलने की कोशिश करता है। यहां पार्कों की स्थिति देखकर तनाव ओर बढ़ जाता है। यहां के सभी निवासियों को अपने घर के पास वाले पार्क छोड़कर थोड़ी दूरी पर बने पार्क में सैर करने जाना पड़ता है। उसमें बैठने के लिए बेंच नहीं हैं। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं सबको परेशानी झेलनी पड़ती है।
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- विशाल भूषण, निवासी सेक्टर-56
पार्कों में बच्चों के लिए झूले तक नहीं
चंडीगढ़ जैसे शहर में लोगों को सुविधाएं न मिलना काफी निदंनीय है। बच्चों के लिए पार्कों में झूले तक टूट गए हैं। ऐसे में बच्चे खेल भी नहीं पा रहे हैं। बारिश के कारण सभी पार्कों में गड्ढे बने हुए हैं। उनमें कीचड़ भरा हुआ है। कुछ पार्कों में इतनी बड़ी घास उगी हुई है कि किसी भी हादसे को अंजाम दिया जा सकता है।
- धीरज राणा, निवासी सेक्टर-56
पार्कों में अंधेरा होने से फैल रही गंदगी
सेक्टर की सभी ग्रीन बेल्ट में घास बहुत बड़ी हो गई है, उसे कोई काटने नहीं आ रहा। सभी पार्कों में एक से दो फुट के गड्ढे बने हुए हैं। कुछ पार्कों की बाउंडरी रेलिंग भी टूटी हुई है। चार साल से लाइट न होने के कारण पार्कों में अंधेरा छाया रहता है। अंधेरे में लावारिस जानवर वहां पर गंदगी फैलाते रहते हैं। इससे निवासी परेशान हैं।
- जोगिंदर सिंह, निवासी सेक्टर 56
भीड़ के कारण कोरोना का खतरा
पार्कों की हालत खराब होने से सभी लोग एक ही पार्क में सैर करते हैं। इससे भीड़ जमा हो जाती है। इससे कोरोना का खतरा भी बना हुआ है। कई बार एक्सईएन और पार्षद को समस्या के बारे में लिखकर दे चुके हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। पार्कों में सफाई नहीं है। सड़कों में बने गड्ढे बड़े हादसे को बुलावा दे रहे हैं।
- होशियार सिंह, निवासी सेक्टर 56
नगर निगम के पास बजट न होने से हो रही देरी
पार्कों में रेलिंग, झूले, बेंच और अन्य चीजों की व्यवस्था के लिए एस्टिमेट बनाकर दे दिया गया है, लेकिन नगर निगम के पास अभी बजट नहीं है इसलिए इस कार्य में देरी हो रही है। मेरी जिम्मेदारी नगर निगम को समस्याओं से अवगत कराना है इसलिए अभी नगर निगम की तरफ से जब भी बजट पास होकर आता है सभी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा।
- सतीश कैंथ, एरिया पार्षद
पार्कों की ये हैं प्रमुख समस्याएं
1. पार्कों की रेलिंग टूटी हुई हैं।
2. पार्कों में लाइट नहीं है।
3. गड्ढे होने के कारण कीचड़ हो रहा है।
4. ग्रीन बेल्ट में बढ़ी हुई है घास
5. पार्कों में कोई फूल नहीं
6. सैर करने के लिए ट्रैक की कोई व्यवस्था नहीं।