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दुनिया भर में चलता है हिसार की स्टील इंडस्ट्री का ‘सिक्का’
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Wed, 27 Jan 2016 11:51 AM IST
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स्टील नगरी के रूप में पहचान बनाने वाले हरियाणा के राज्य हिसार की स्टील इंडस्ट्री का ‘सिक्का’ देश ही नहीं विदेशों में भी चलता है। देश की एक से पांच रुपये तक की मुद्रा हिसार की ही विभिन्न इकाइयों में ही बनती है और उसके बाद यह मुहर लगने के लिए टकसाल के लिए भेजी जाती है।
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भारत ही नहीं मलेशिया, ताइवान, दुबई आदि देशों में भी हिसार की स्टील की खपत है। विगत एक दशक में स्टेनलेस स्टील का बाजार भारत में तेजी से बढ़ा है। इसमें भी हिसार ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। सात-आठ वर्ष पहले स्टेनलेस स्टील जापान सहित अन्य देशों से मंगाया जाता था, लेकिन अब देश में ही बड़े स्तर पर इसका उत्पादन हो रहा है।
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हिसार जिले में छोटी-बड़ी मिलाकर एक हजार के करीब पंजीकृत और अपंजीकृत औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें से 400 के करीब स्टील से संबंधित इकाइयां हैं। श्रम विभाग से 681 उत्पादन इकाई पंजीकृत हैं। जिले भर की सभी तरह की औद्योगिक इकाइयों में 15 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
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दिक्कतें- महंगी बिजली
स्टील इकाइयां महंगी बिजली की समस्या से जूझ रही हैं। प्रदेश में उद्योगों को नौ से दस रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मुहैया हो रही है। इसमें स्थायी चार्ज भी शामिल है। जबकि अन्य प्रदेशों में सात से आठ रुपये की दर से बिजली दी जा रही है। इस तरह हमारे द्वारा उत्पादित माल सीधे तौर पर ही दो रुपये महंगा हो गया।
वैट इनपुट
औद्योगिक इकाइयों को वैट इनपुट का बोझ अब खुद उठाना पड़ रहा है। पहले माल बेचने पर तीन फीसदी वैट रिफंड हो जाता था। राज्य सरकरा ने सात सितंबर को नोटिफिकेशन जारी कर इसे खत्म कर दिया। इससे उद्योग पर सबसे बुरा असर पड़ रहा है।