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रूसी लाइटिंग उपकरणों को टक्कर देते हैं अंबाला के ये उद्यमी
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला कैंट
Updated Wed, 27 Jan 2016 12:14 PM IST
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सुपरवाइजर की नौकरी छोड़कर भाई के साथ मिलकर बिजनेस शुरू किया और आज इनोवेशन की दुनिया में दो अवार्ड जीत चुके हैं। रेलवे गार्ड एसके चौधरी के बेटे दिनेश चौधरी को देहरादून से फिजिक्स में एमएससी करने के बाद अंबाला कैंट की एक साइंस इंडस्ट्री की ऑप्टिकल डिविजन में सुरपरवाइजर की नौकरी मिली।
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कई साल तक दिनेश यहां काम करते रहे। इसी सोच के साथ दिनेश चौधरी ने किराए के एक छोटे से कमरे में बीकॉम पूरा कर चुके अपने छोटे भाई राजेश चौधरी के साथ ऑप्टिकल ग्लास से संबंधित बिजनैस शुरू किया। दिनेश नौकरी भी करते रहे और अपने भाई के साथ बिजनैस भी आगे बढ़ाते रहे। उनका बिजनैस दो बड़ी फैक्ट्रियों तक जा पहुंचा।
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दिनेश ने अपने इस लघु उद्योग को बुलंदी तक पहुंचाने के साथ ही कई नवप्रवर्तन भी किए। इसी की बदौलत इनोवेशन इन माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज’ कैटेगरी में उल्लेखनीय परफॉरमेंस के लिए दिनेश चौधरी को नेशनल अवार्ड भी मिला है।
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विदेशी लाइटिंग उपकरण
अंबाला मैसर्स रे इंटरप्राइजेज के मालिक दिनेश कुमार ने बताया कि 1986 से 1991 तक वे अपने भाई के साथ किराए के एक कमरे में काम करते रहे, उसके बाद 1994 में इंडस्ट्रियल एरिया में शिफ्ट हो गए। वे उन लाइटिंग उपकरणों को अंबाला में बनाते थे, जिन्हें विदेशों से मंगवाया जाता था।
बेटे ने दिया बिजनैस को नया आयाम
वर्ष 2004 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटैक करने के बाद दिनेश के बेटे प्रणय चौधरी भी पिता के साथ बिजनैस में हाथ बंटाने लग गए। बेटे में भी पिता की तरह कुछ नया करने की धुन सवार थी। दिनेश चौधरी ने भी प्रणय का हौसला बढ़ाया और उनकी काबिलियत का अपने बिजनैस के हित में पूरा उपयोग किया। वर्ष 2008 में ही प्रणय ने अपने पिता के बिजनैस में एक नया बदलाव पैदा किया।
उन्होंने अपने पिता के लाइटिंग उपकरणों को एलईडी सिस्टम में ढाल दिया। जापान से एलईडी मंगवाई जाने लगी और उन एलईडी को यहां अंबाला के विशेषज्ञों द्वारा शानदार लाइटिंग का रूप दिया जाने लगा। एलईडी के इन नए लाइटिंग उपकरणों को भी देश की मार्केट में बहुत ज्यादा सराहना मिली और कई अच्छे आर्डर दिनेश की कंपनी को मिलने लगे। लघु उद्योग में प्रणय द्वारा किए गए इसी इनोवेशन को भारत सरकार ने भी सराहा है।
मुश्किलें भी आईं
वर्ष 1995-96 में उन्हें करीब 60 से 70 लाख का एक बड़ा सरकारी आर्डर मिला। उन्हें कई लाइटिंग आइटम तैयार कर सरकार को देने थे। वर्क आर्डर मिलने के बाद काम भी शुरू हो चुका था, लाखों रुपये लोन लेकर और इधर-उधर से ब्याज पर रुपये लेकर आर्डर पूरा करने में लगाए जा चुके थे।
इधर, लाइटिंग उपकरणों को पास करने में सरकार बहुत वक्त लगा रही थी। कई चक्कर लगाने पर करीबन दो साल बाद उनके लाइटिंग उपकरण पास किए गए और उन्होंने ये आर्डर पूरा किया। दिनेश के अनुसार इस दौरान कंपनी और घर की आर्थिक हालत खराब हो गई और कंपनी बहुत मुश्किल दौर से गुजरी। कंपनी ने 1994 में 3000 हेड लाइट्स का आर्डर केवल आठ महीने में ही पूरा कर सरकार को देने का रिकार्ड भी बनाया।