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बर्फीले तूफान ने रोका अनीता कुंडू का सफर, अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचने से चूकी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
Updated Mon, 09 Jul 2018 01:40 PM IST
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anita kundu
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पर्वतारोही अनीता कुंडू संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी देनाली फतेह करने के अपने लक्ष्य से चूक गई है। चोटी पर पहुंचने के लिए मात्र एक घंटे का सफर बाकी था। तभी बर्फीला तूफान शुरू हो गया। अनीता बड़ी मुश्किल से जान बचाकर नीचे आई। लगातार 20 दिन की कड़ी मेहनत और बर्फ पर रहने के कारण अनीता का चेहरा कुछ हद तक झुलस चुका है। शरीर में भी बेहद थकान महसूस कर रही है। माउंट एवरेस्ट दो बार फतेह करने वाली अनीता कुंडू ने 20 दिन पहले ही अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी देनाली का पांच सदस्यीय दल के साथ सफर शुरू किया था। अनीता कुंडू ने अपने फेसबुक अकाउंट पर यह जानकारी साझा की है।
बोलीं, जान है तो जहान है, मैंने सौ फीसदी मेहनत की
अनीता कुंडू ने अपने फेसबुक अकाउंट पर सफर पूरा नहीं कर पाने की जानकारी साझा की। अनीता ने कहा कि जान है तो जहान है। उसने अपना सौ फीसदी प्रयास किया। वह जो भी कर सकती थी, उसने किया। मगर कुदरत क्या गुल खिला दे, उसके बस की बात नहीं। अनीता ने लिखा कि वह कुछ पल के लिए मायूस भी हुई। मगर उसका हौसला बरकरार है। वह न बैठेगी और न ही रुकेगी। जब तक उसके शरीर में प्राण है, तब तक विश्व की चोटियों पर अपने देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराती रहेगी।
2015 में भी भूकंप का किया था सामना
अनीता कुंडू ने 2013 में नेपाल के रास्ते और 2017 में चीन की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। अप्रैल 2015 में भी उसने प्रयास किया था। मगर 26 अप्रैल 2015 को एवरेस्ट पर भूकंप आ गया। उस समय अनीता 22 हजार फीट की ऊंचाई पर थीं। भूकंप में वह बाल-बाल बची थीं।
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बोलीं, जान है तो जहान है, मैंने सौ फीसदी मेहनत की
अनीता कुंडू ने अपने फेसबुक अकाउंट पर सफर पूरा नहीं कर पाने की जानकारी साझा की। अनीता ने कहा कि जान है तो जहान है। उसने अपना सौ फीसदी प्रयास किया। वह जो भी कर सकती थी, उसने किया। मगर कुदरत क्या गुल खिला दे, उसके बस की बात नहीं। अनीता ने लिखा कि वह कुछ पल के लिए मायूस भी हुई। मगर उसका हौसला बरकरार है। वह न बैठेगी और न ही रुकेगी। जब तक उसके शरीर में प्राण है, तब तक विश्व की चोटियों पर अपने देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराती रहेगी।
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2015 में भी भूकंप का किया था सामना
अनीता कुंडू ने 2013 में नेपाल के रास्ते और 2017 में चीन की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। अप्रैल 2015 में भी उसने प्रयास किया था। मगर 26 अप्रैल 2015 को एवरेस्ट पर भूकंप आ गया। उस समय अनीता 22 हजार फीट की ऊंचाई पर थीं। भूकंप में वह बाल-बाल बची थीं।
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