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तनाव के बीच किसान भवन का हाल और कमरे खाली
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत
Updated Sat, 13 Sep 2014 12:07 AM IST
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पानीपत। किसान भवन का एक हाल और चार कमरों को दिनभर की तनातनी के बाद आखिरकार खाली करा लिया। भाकियू और जिले की महापंचायत की ओर से अल्टीमेटम देने और दुकानों को खाली कराने का दौर दिनभर चलता रहा।
इस दौरान दो डीएसपी भारी पुलिस बल समेत तैनात रहे। महापंचायत में पहुंचे किसानों ने कई बार जबरदस्ती दुकान खाली कराने की भी धमकी दी। इसी बीच हाल और कमरों में कार्यालय चलाने वाले लोगों ने भी खुद को निर्दोष बताया और किसी से कोई बदसलूकी न देने की सफाई दी। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद दुकानों और हाल को खाली कराने के बाद राहत मिली।
किसान भवन में शुक्रवार को भवन के एक हाल और चार कमरों को खाली कराने के मामले में महापंचायत हुई। इसकी अध्यक्षता पूर्व जिलाध्यक्ष धन्नाराम जागलान और कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष सुरेश दहिया ने की। महापंचायत का संचालन जिलाध्यक्ष चूहड़ सिंह रावल ने किया। इसकी सूचना मिलने पर डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन और डीएसपी लॉ एंड आर्डर जोगेंद्र राठी कई थानों के प्रभारियों और भारी पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने यहां पर व्यवस्था बनाने की कोशिश की।
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भाकियू ने पुलिस को देखते ही नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने किसानों को समझाकर शांत किया। महापंचायत में सभी लोगों ने भवन के हाल और चारों दुकानों को खाली कराने का प्रस्ताव पास किया और पुलिस को इसके लिए एक घंटे तक का समय दिया। इसके बाद संबंधित लोगों ने हाल और दुकान को खुद खाली कर दिया। हाल और कमरों के खाली होने पर महापंचायत में पहुंचने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया।
चूहड़ सिंह रावल ने कहा कि कई लोग किसान भवन के एक हाल और चार कमरों में कई सालों से अपने कार्यालय चला रहे हैं। इनको भवन के मुख्य गेट के ऊपर का हाल, कमरा नंबर 21, 35, 36 और 45 दिया है। ये लोग भवन के नियमों को लगातार तोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनमें से एक ने किराया और बिल का करीब सवा लाख रुपये जमा नहीं कराया है। वह तीन एयर कंडीशन चला रहा है और उसका 80 हजार रुपये बिजली का बिल बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग यहां के बुजुर्गों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं।
किसानों ने महापंचायत में करीब एक बजे पुलिस को हाल और कमरे खाली कराने को एक घंटे का अल्टीमेटम दे दिया। पंचायतियों ने कहा कि ऐसा न होने पर वे खुद हाल और कमरों को खाली करेंगे और किसी तरह का नुकसान होने की जिम्मेदार पुलिस होगी। इसके बाद भवन में हलवा और चाय बना दी गई। पुलिसकर्मियों ने हलवा खाया और चाय पी और फिर डीएसपी उनको लेकर दुकानों को खाली कराने को उठ गए। डीएसपी कुछ ही कदमों पर चलकर ठहर गए और मामले को शांतिपूर्वक ढंग से निपटने का इंतजार करने लग गए।
भाकियू नेताओं और पंचायत में पहुंचे लोगों ने पुलिस के ढीला पड़ते ही हाल और कमरों को खुद खाली कराने की चेतावनी दी। पुलिस ने एक बार तो चेतावनी को अनदेखा कर दिया, लेकिन किसान कुछ दूर फिर एकजुट होने लगे। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने संबंधित लोगों को शांति व्यवस्था बनाने में हॉल व दुकान खाली करने की बात कही। इसके बाद उक्त लोगों ने खुद ही हॉल और दुकानों को खाली कर लिया।
प्रवीण अत्री और दूसरे लोगों ने भाकियू के जिला प्रधान चूहड़ सिंह रावल पर निजी हित पूरे न होने पर हाल और कमरों को जबरदस्ती खाली कराने के आरोप जड़े। प्रवीण अत्री ने कहा कि वे पंचायत का सम्मान करते हैं, लेकिन पंचायत में उसका पक्ष नहीं सुना। उसने इसका एडवांस किराया दिया है और भाकियू को उसकी गाड़ी से एतराज है तो वे गाड़ी खड़ी करने की जगह बता दें। वह वहीं पर गाड़ी को खड़ी कर लेगा। वह किसी के साथ बदतमीजी नहीं करता और हर बुजुर्ग का सम्मान करता है। प्रधान ने गत दिनों अपने किसी रिश्तेदार को नौकरी लगवाने की बात कही थी। उसने उनका सम्मान करते हुए उसके रिश्तेदार को बुला लिया था, लेकिन उसकी योग्यता पूरी नहीं मिली। जिसके बाद प्रधान उनसे कथित तौर पर द्वेष रखने लगा।
किसान भवन में एक हाल और चार कमरों में कुछ लोग रहते हैं। भाकियू के बैनर तले किसान वीरवार को पुलिस अधीक्षक से मिले थे और इनको खाली कराने की मांग की थी। यहां पर एसपी की बातों को सुनकर किसानों ने नारेबाजी भी शुरू कर दी थी। डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन ने किसानों को आश्वस्त किया था और उनके पहुंचने से पहले हाल और कमरों को खाली कराने की कही थी। भाकियू ने शाम तक पुलिस के आश्वासन का इंतजार किया, लेकिन पुलिस द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद भाकियू ने जिले की महापंचायत बुला ली।
किसान भवन का एक हॉल व चार कमरे किराए पर दिए गए थे। ये लोग किराया व बिजली का बिल नहीं दे रहे थे। उनको कई बार बकाया जमा कराने की कही थी, लेकिन उन्होंने बुजुर्गों के साथ ही बदतमीजी करनी शुरू कर दी। भाकियू इसको लेकर एसपी से भी मिली थी और शुक्रवार को भवन में महापंचायत कर हाल और कमरों को खाली करा लिया गया।
चूहड़ सिंह रावल, जिलाध्यक्ष, भाकियू पानीपत
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इस दौरान दो डीएसपी भारी पुलिस बल समेत तैनात रहे। महापंचायत में पहुंचे किसानों ने कई बार जबरदस्ती दुकान खाली कराने की भी धमकी दी। इसी बीच हाल और कमरों में कार्यालय चलाने वाले लोगों ने भी खुद को निर्दोष बताया और किसी से कोई बदसलूकी न देने की सफाई दी। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद दुकानों और हाल को खाली कराने के बाद राहत मिली।
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किसान भवन में शुक्रवार को भवन के एक हाल और चार कमरों को खाली कराने के मामले में महापंचायत हुई। इसकी अध्यक्षता पूर्व जिलाध्यक्ष धन्नाराम जागलान और कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष सुरेश दहिया ने की। महापंचायत का संचालन जिलाध्यक्ष चूहड़ सिंह रावल ने किया। इसकी सूचना मिलने पर डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन और डीएसपी लॉ एंड आर्डर जोगेंद्र राठी कई थानों के प्रभारियों और भारी पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने यहां पर व्यवस्था बनाने की कोशिश की।
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भाकियू ने पुलिस को देखते ही नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने किसानों को समझाकर शांत किया। महापंचायत में सभी लोगों ने भवन के हाल और चारों दुकानों को खाली कराने का प्रस्ताव पास किया और पुलिस को इसके लिए एक घंटे तक का समय दिया। इसके बाद संबंधित लोगों ने हाल और दुकान को खुद खाली कर दिया। हाल और कमरों के खाली होने पर महापंचायत में पहुंचने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया।
चूहड़ सिंह रावल ने कहा कि कई लोग किसान भवन के एक हाल और चार कमरों में कई सालों से अपने कार्यालय चला रहे हैं। इनको भवन के मुख्य गेट के ऊपर का हाल, कमरा नंबर 21, 35, 36 और 45 दिया है। ये लोग भवन के नियमों को लगातार तोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनमें से एक ने किराया और बिल का करीब सवा लाख रुपये जमा नहीं कराया है। वह तीन एयर कंडीशन चला रहा है और उसका 80 हजार रुपये बिजली का बिल बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग यहां के बुजुर्गों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं।
किसानों ने महापंचायत में करीब एक बजे पुलिस को हाल और कमरे खाली कराने को एक घंटे का अल्टीमेटम दे दिया। पंचायतियों ने कहा कि ऐसा न होने पर वे खुद हाल और कमरों को खाली करेंगे और किसी तरह का नुकसान होने की जिम्मेदार पुलिस होगी। इसके बाद भवन में हलवा और चाय बना दी गई। पुलिसकर्मियों ने हलवा खाया और चाय पी और फिर डीएसपी उनको लेकर दुकानों को खाली कराने को उठ गए। डीएसपी कुछ ही कदमों पर चलकर ठहर गए और मामले को शांतिपूर्वक ढंग से निपटने का इंतजार करने लग गए।
भाकियू नेताओं और पंचायत में पहुंचे लोगों ने पुलिस के ढीला पड़ते ही हाल और कमरों को खुद खाली कराने की चेतावनी दी। पुलिस ने एक बार तो चेतावनी को अनदेखा कर दिया, लेकिन किसान कुछ दूर फिर एकजुट होने लगे। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने संबंधित लोगों को शांति व्यवस्था बनाने में हॉल व दुकान खाली करने की बात कही। इसके बाद उक्त लोगों ने खुद ही हॉल और दुकानों को खाली कर लिया।
प्रवीण अत्री और दूसरे लोगों ने भाकियू के जिला प्रधान चूहड़ सिंह रावल पर निजी हित पूरे न होने पर हाल और कमरों को जबरदस्ती खाली कराने के आरोप जड़े। प्रवीण अत्री ने कहा कि वे पंचायत का सम्मान करते हैं, लेकिन पंचायत में उसका पक्ष नहीं सुना। उसने इसका एडवांस किराया दिया है और भाकियू को उसकी गाड़ी से एतराज है तो वे गाड़ी खड़ी करने की जगह बता दें। वह वहीं पर गाड़ी को खड़ी कर लेगा। वह किसी के साथ बदतमीजी नहीं करता और हर बुजुर्ग का सम्मान करता है। प्रधान ने गत दिनों अपने किसी रिश्तेदार को नौकरी लगवाने की बात कही थी। उसने उनका सम्मान करते हुए उसके रिश्तेदार को बुला लिया था, लेकिन उसकी योग्यता पूरी नहीं मिली। जिसके बाद प्रधान उनसे कथित तौर पर द्वेष रखने लगा।
किसान भवन में एक हाल और चार कमरों में कुछ लोग रहते हैं। भाकियू के बैनर तले किसान वीरवार को पुलिस अधीक्षक से मिले थे और इनको खाली कराने की मांग की थी। यहां पर एसपी की बातों को सुनकर किसानों ने नारेबाजी भी शुरू कर दी थी। डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन ने किसानों को आश्वस्त किया था और उनके पहुंचने से पहले हाल और कमरों को खाली कराने की कही थी। भाकियू ने शाम तक पुलिस के आश्वासन का इंतजार किया, लेकिन पुलिस द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद भाकियू ने जिले की महापंचायत बुला ली।
किसान भवन का एक हॉल व चार कमरे किराए पर दिए गए थे। ये लोग किराया व बिजली का बिल नहीं दे रहे थे। उनको कई बार बकाया जमा कराने की कही थी, लेकिन उन्होंने बुजुर्गों के साथ ही बदतमीजी करनी शुरू कर दी। भाकियू इसको लेकर एसपी से भी मिली थी और शुक्रवार को भवन में महापंचायत कर हाल और कमरों को खाली करा लिया गया।
चूहड़ सिंह रावल, जिलाध्यक्ष, भाकियू पानीपत