चंडीगढ़ और आम का रिश्ता: सिटी ब्यूटीफुल में हैं आम के 14 हजार से ज्यादा पेड़, कई तो 100 साल से भी पुराने
चंडीगढ़ में इंडस्ट्रियल एरिया फेस-1, राजिन्द्रा पार्क व सेक्टर-36, 44, 28, 27 में सबसे अधिक व पुराने आम के पेड़ है। आम के पेड़ में चार साल में सबसे पहला फल आता है और इसकी अधिकतम लंबाई 35 फीट और आयु 200 साल तक होती है।
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आम सिर्फ फलों का ही राजा नहीं, बल्कि दिलों का भी राजा है। ये इतना खास है कि 22 जुलाई को पूरे देश में राष्ट्रीय मैंगो दिवस मनाया जाता है। चंडीगढ़ का आमों के साथ गहरा रिश्ता है। शहर को बसाने से पहले ही यहां कई प्रकार के आम के पेड़ लगाए गए थे।
पर्यावरण प्रेमी राहुल महाजन ने बताया कि पूरे शहर में आम के 14 हजार से भी अधिक पेड़ हैं। शहर के प्रवेश द्वार पर हर जगह आम के पेड़ देखे जाते हैं।
राहुल ने बताया कि शहर के प्रवेश द्वार पर आम के पेड़ पाए जाना अपने आप में अलग पहचान है। शहर को बनाते वक्त पंजाब का आधा हिस्सा चंडीगढ़ में मिलाया गया तो कई सारे आम के पेड़ भी शहर में आ गए। करीब साढ़े 12 लाख की आबादी वाला शहर आज रसीले आमों का भी गढ़ है।
धार्मिक तौर पर भी अहम है आम का पेड़
चंडीगढ़ में कई प्रकार के आम जैसे, लंगड़ा, चौसा, रामकेला और आम्रपाली पाए जाते है। सेक्टर-36 के पार्क में आज भी आम के 100 साल से अधिक पुराने पेड़ पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आम सिर्फ फलदायी पेड़ ही नहीं है। धार्मिक तौर पर भी आम का पेड़ सबसे शुद्ध माना जाना जाता है। आम के पत्ते व लकड़ियों को प्रयोग पूजा व हवन में किया जाता है, जिससे वातावरण में शुद्धता आती है और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।
आम सिर्फ पेड़ ही नहीं बल्कि एक भाव
एनवायरमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया के एनके झिंगन बताते हैं कि आम सिर्फ पेड़ ही नहीं बल्कि एक भाव भी है। आज लोगों ने पेड़ों से लगाव कम और दिखावा ज्यादा कर दिया है। आम का पेड़ शहर के लिए काफी महत्व रखता है। 1970 के समय में शहर में चारों तरफ आम के पेड़ देखे जाते थे, लेकिन आज सिर्फ कुछ सेक्टरों में ही आम के पेड़ देखे जा रहे है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पेड़ों के साथ जोडे़ं। उन्हें सिखाए कि पेड़ सिर्फ पर्यावरण का ही नहीं, बल्कि उनके जीवन का भी हिस्सा है।