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अपाहिज था पर बन गया इंटरनेशनल कॉमेडियन
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Mon, 10 Nov 2014 04:11 PM IST
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छोटे से कस्बे में पैदा हुए इस शख्स ने कभी सपने में नहीं सोचा होगा कि अपाहिज होने के बावजूद वो इंटरनेशनल कॉमेडियन बनेगा। लेकिन ये सच है, ये शख्स हैं ग्रेट लाफ्टर के कलाकार ख्याली सहारण। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की पीलीबंगा तहसील के छोटे से गांव 18-सीपीडी में गरीब परिवार में जन्मे ने इंटरनेशनल हास्य कलाकार बनने के लिए बहुत संघर्ष किया।
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करीब छह साल राजस्थान के गंगानगर जिले में जेसीटी कपड़ा मिल में नौकरी की, वहां काम करते समय उसका एक हाथ मशीन में चला गया और बुरी तरह कुचला गया। एक हाथ से अपाहिज होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। उसने प्रण किया कि भीख मांगने से अच्छा तो वो कॉमेडी के क्षेत्र में ही मेहनत करें।
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इस हादसे के बाद ख्याली ने दो साल कॉमेडी का कोर्स किया और 24 जनवरी 2006 में अपना पहला ऑडिशन दिया। अपने पहले ही ऑडिशन में ख्याली सिलेक्ट हो गए और मुंबई चले गए। उसके बाद ख्याली ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ख्याली का मानना है कि हरियाणवी संस्कृति से उन्हें बेहद लगाव है।
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ख्याली के कॅरिअर पर एक नजर
एंकरिंग से अपने कॅरिअर की शुरुआत करने वाले ख्याली ने 20 से अधिक देशों में स्टेंडिंग कॉमेडी की है, वहीं उन्हें हिंदी फिल्मों में भी कई मौके मिले हैं। बॉम्बे टू गोवा, सिंह इज किंग, मुस्करा के देखे जरां और भावनाओं को समझो के अलावा हरियाणवी फिल्म रुक्के पड़ गए में भी ख्याली ने अभिनय किया है।
पंजाबी फिल्म मि. सिंह में उनके काम को काफी सराहा गया। ख्याली का कहना है कि शीघ्र ही उसकी तीन-चार फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इनमें जैकी श्रॉफ के साथ नील, द पार्टी, जीयो लाइफ बिंदास और सनी देओल व कंगना राणावत की एक अनाम फिल्म है।
कोई भी बन सकता है सचिन-धोनी
ख्याली ने कहा कि सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी जैसी प्रतिभाओं ने आज खेल जगत में तहलका मचा रखा है, लेकिन उनसे कोई ये नहीं पूछता कि वे कितने पढ़े-लिखे हैं। आदमी चाहे तो किसी भी फील्ड में अपना कॅरिअर बना सकता है। उन्होंने स्वयं का और दिल्ली के हबीब हज्जाम का उदाहरण देते हुए कहा कि जमीन से उठने में काफी संघर्ष करना पड़ता है।