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Chandigarh News: ड्रग्स से डार्क वेब तक... चंडीगढ़ पुलिस के हैकाथॉन में युवाओं ने खोजे अपराध रोकने के हाईटेक हथियार
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चंडीगढ़। बदलते अपराधों के तौर-तरीकों से निपटने के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने तकनीक और युवा प्रतिभाओं को साथ लाने की पहल की है। पुलिस ने यूआईईटी, पंजाब यूनिवर्सिटी और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पैक) के सहयोग से आठ और नौ सितंबर को राष्ट्रीय हैकाथॉन आयोजित किया। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से 580 से अधिक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हुए। स्क्रीनिंग के बाद 90 टीमों को ऑफलाइन राउंड के लिए चुना गया।
आठ सितंबर को यूआईईटी, पंजाब यूनिवर्सिटी और पैक परिसरों में प्रतिभागियों ने पुलिसिंग से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों पर तकनीकी समाधान पेश किए। विशेषज्ञ ज्यूरी के मूल्यांकन के बाद 15 टीमों को फाइनल के लिए चुना गया।
ड्रग्स से डार्क वेब तक समाधान
हैकाथॉन में युवाओं ने सिंथेटिक ड्रग्स की मौके पर पहचान के लिए स्पॉट टेस्टिंग किट से लेकर डार्क वेब पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री की निगरानी तक के समाधान पेश किए। एआई से तैयार तस्वीरों और वीडियो की पहचान, उनके स्रोत और सोशल मीडिया पर प्रसार का पता लगाने की तकनीक भी प्रस्तुत की गई।
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टीमों ने अवैध क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन ट्रैक करने, फर्जी बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पहचान करने तथा सीडीआर, आईपीडीआर, बैंक स्टेटमेंट और अन्य डिजिटल इंटेलिजेंस के एकीकृत विश्लेषण वाले प्लेटफॉर्म भी तैयार किए।
यूआईईटी की सतर्क टीम रही अव्वल
फाइनल में यूआईईटी की सतर्क टीम ने पहला स्थान हासिल कर एक लाख रुपये का पुरस्कार जीता। पंजाब यूनिवर्सिटी की दबंग कोडर्स टीम दूसरे स्थान पर रही और उसे 75 हजार रुपये मिले। तमिलनाडु के राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज की इंपटी रोड टीम तीसरे स्थान पर रही और उसे 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिला। तीन टीमों को 25-25 हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
समापन समारोह में डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, डब्ल्यू/डीजीपी चंडीगढ़ पुलिस, पुष्पेंद्र कुमार, डब्ल्यू/आईजीपी, राजीव रंजन सिंह, डीआईजी और अनुराग दारू, एसपी/क्राइम समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सीएफएसएल सेक्टर-36 की निदेशक डॉ. सुखमनी कौर और सीएसआईआर-सीएसआईओ के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह भी शामिल हुए।
हर शॉर्टलिस्टेड सदस्य को पांच हजार
डब्ल्यू/डीजीपी ने सभी शॉर्टलिस्टेड टीमों के प्रत्येक सदस्य को पांच हजार रुपये की भागीदारी प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। पुलिस अब तैयार समाधानों की व्यवहारिकता जांचकर उन्हें अपनी पुलिसिंग व्यवस्था में शामिल करने की संभावनाएं तलाशेगी।
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आठ सितंबर को यूआईईटी, पंजाब यूनिवर्सिटी और पैक परिसरों में प्रतिभागियों ने पुलिसिंग से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों पर तकनीकी समाधान पेश किए। विशेषज्ञ ज्यूरी के मूल्यांकन के बाद 15 टीमों को फाइनल के लिए चुना गया।
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ड्रग्स से डार्क वेब तक समाधान
हैकाथॉन में युवाओं ने सिंथेटिक ड्रग्स की मौके पर पहचान के लिए स्पॉट टेस्टिंग किट से लेकर डार्क वेब पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री की निगरानी तक के समाधान पेश किए। एआई से तैयार तस्वीरों और वीडियो की पहचान, उनके स्रोत और सोशल मीडिया पर प्रसार का पता लगाने की तकनीक भी प्रस्तुत की गई।
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टीमों ने अवैध क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन ट्रैक करने, फर्जी बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पहचान करने तथा सीडीआर, आईपीडीआर, बैंक स्टेटमेंट और अन्य डिजिटल इंटेलिजेंस के एकीकृत विश्लेषण वाले प्लेटफॉर्म भी तैयार किए।
यूआईईटी की सतर्क टीम रही अव्वल
फाइनल में यूआईईटी की सतर्क टीम ने पहला स्थान हासिल कर एक लाख रुपये का पुरस्कार जीता। पंजाब यूनिवर्सिटी की दबंग कोडर्स टीम दूसरे स्थान पर रही और उसे 75 हजार रुपये मिले। तमिलनाडु के राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज की इंपटी रोड टीम तीसरे स्थान पर रही और उसे 50 हजार रुपये का पुरस्कार मिला। तीन टीमों को 25-25 हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
समापन समारोह में डॉ. सागर प्रीत हुड्डा, डब्ल्यू/डीजीपी चंडीगढ़ पुलिस, पुष्पेंद्र कुमार, डब्ल्यू/आईजीपी, राजीव रंजन सिंह, डीआईजी और अनुराग दारू, एसपी/क्राइम समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सीएफएसएल सेक्टर-36 की निदेशक डॉ. सुखमनी कौर और सीएसआईआर-सीएसआईओ के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह भी शामिल हुए।
हर शॉर्टलिस्टेड सदस्य को पांच हजार
डब्ल्यू/डीजीपी ने सभी शॉर्टलिस्टेड टीमों के प्रत्येक सदस्य को पांच हजार रुपये की भागीदारी प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। पुलिस अब तैयार समाधानों की व्यवहारिकता जांचकर उन्हें अपनी पुलिसिंग व्यवस्था में शामिल करने की संभावनाएं तलाशेगी।