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डाॅ. धवन किडनैपिंग: सिपाही के कजन की कार में किया था अपहरण, सीबीआई ने दाखिल की 8400 पन्नों की चार्जशीट
Sat, 21 Feb 2026 04:16 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 21 Feb 2026 04:16 PM IST
सार
पुलिसकर्मियों ने डेंटिस्ट डॉ. मोहित धवन को सात जनवरी 2022 को अदालत के गेट के बाहर से अपहरण करने के बाद सिपाही के कजन की कार में तीन से चार घंटे तक घुमाया।
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चंडीगढ़ पुलिस
- फोटो : संवाद/फाइल
विस्तार
चंडीगढ़ सेक्टर 43 जिला अदालत के गेट से डॉ. मोहित धवन का अपहरण करने के मामले में एक ओर बड़ा खुलासा हुआ है।
करीब एक साल तक चली जांच के बाद सीबीआई की ओर से अदालत में दाखिल की गई 8400 पन्नों की चार्जशीट के अनुसार मोहित धवन का अपहरण करने के लिए दो कारों का इस्तेमाल किया गया था। एक कार सिपाही विकास हुड्डा के कजन की थी। जबकि दूसरी सरकारी बोलेरो गाड़ी थी।
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि पुलिसकर्मियों ने डेंटिस्ट डॉ. मोहित धवन को सात जनवरी 2022 को अदालत के गेट के बाहर से अपहरण करने के बाद सिपाही के कजन की कार में तीन से चार घंटे तक घुमाया। सेक्टर 43 से सेक्टर 44 और फिर वापस सेक्टर 43 में लेकर आए। तीन से चार घंटे इन सेक्टरों में आई 20 कार में घुमाते रहे।
सेक्टर 43 में आने के बाद डॉ. धवन को आई 20 कार से बोलेरो में शिफ्ट किया और फिर उनकी गिरफ्तारी डाली गई। यहीं नहीं 9 पुलिसकर्मियों ने अपहरण से पहले एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया था, जिसका नाम धवन रखा गया। इस ग्रुप में हरिंदर सेखों भी जुडे़ थे। एसआई सुरेश कुमार ने कुछ ही घंटे पहले यह बनाया गया था। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिसकर्मियों ने डॉ. धवन को कोर्ट में पेश होने से रोकने के लिए अवैध रूप से हिरासत में रखा।
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करीब एक साल तक चली जांच के बाद सीबीआई की ओर से अदालत में दाखिल की गई 8400 पन्नों की चार्जशीट के अनुसार मोहित धवन का अपहरण करने के लिए दो कारों का इस्तेमाल किया गया था। एक कार सिपाही विकास हुड्डा के कजन की थी। जबकि दूसरी सरकारी बोलेरो गाड़ी थी।
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि पुलिसकर्मियों ने डेंटिस्ट डॉ. मोहित धवन को सात जनवरी 2022 को अदालत के गेट के बाहर से अपहरण करने के बाद सिपाही के कजन की कार में तीन से चार घंटे तक घुमाया। सेक्टर 43 से सेक्टर 44 और फिर वापस सेक्टर 43 में लेकर आए। तीन से चार घंटे इन सेक्टरों में आई 20 कार में घुमाते रहे।
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सेक्टर 43 में आने के बाद डॉ. धवन को आई 20 कार से बोलेरो में शिफ्ट किया और फिर उनकी गिरफ्तारी डाली गई। यहीं नहीं 9 पुलिसकर्मियों ने अपहरण से पहले एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया था, जिसका नाम धवन रखा गया। इस ग्रुप में हरिंदर सेखों भी जुडे़ थे। एसआई सुरेश कुमार ने कुछ ही घंटे पहले यह बनाया गया था। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिसकर्मियों ने डॉ. धवन को कोर्ट में पेश होने से रोकने के लिए अवैध रूप से हिरासत में रखा।
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