बच्चे को चढ़ा दिया HIV संक्रमित खून, पिता बोला- ब्लड बैंक कर्मियों ने हमारी दुनिया खत्म कर दी
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सरकारी अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक कर्मियों ने तो हमारी दुनिया ही खत्म कर दी। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के पिता ने ब्लड बैंक के कर्मियों पर आरोप लगाते हुए यह बात कही। बच्चे के पिता ने बताया कि उसके लड़के को जन्म के एक वर्ष बाद थैलेसीमिया की बीमारी हो गई थी। जिसके बाद उसे हर माह रक्त चढ़ाना पड़ता था।
वह 10 वर्ष से सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक से बच्चे को रक्त चढ़वा रहा है। सात नवंबर को जब वह बच्चे को रक्त चढ़वाने सिविल अस्पताल ले गया तो ब्लड बैंक से रक्त जारी करवाया। जहां कर्मियों ने रक्त जारी कर दिया और आधे से ज्यादा रक्त चढ़ने के बाद कर्मी ब्लड सैंपल लेने लगे। जबकि उन्हें सैंपल पहले लेना चाहिए था।
पीड़ित बच्चे के पिता ने बताया कि जब वह सैंपल लेकर चले गए तो उसकी रिपोर्ट दो घंटे बाद आ चुकी थी लेकिन उन्हें उसी दिन रिपोर्ट नहीं दी और बहाना बनाकर उन्हें घर भेज दिया। जब उन्हें संदेह हुआ तो आठ नवंबर को फिर से ब्लड बैंक से बच्चे के सैंपल की रिपोर्ट मांगी लेकिन रिपोर्ट नहीं दी गई। इसके बाद वह नौ नवंबर को अपने बच्चे की रिपोर्ट लेने में कामयाब हुआ तो उसे सिविल अस्पताल से पता चला कि बच्चा एचआईवी संक्रमित है।
जो भी कमाई होती है बेटे पर लगा देता हूं
पीड़ित बच्चे के पिता ने कहा कि वह जो भी कमाई करता है, वह सब बच्चे के उपचार पर लगा देता है। लेकिन अब ब्लड बैंक कर्मियों ने लापरवाही कर उसकी पूरी दुनिया ही खत्म कर दी है। अब उम्मीद नहीं है कि उसका बच्चा कभी ठीक हो पाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री और सीएम करें कड़ी कार्रवाई
पीड़ित बच्चे के पिता ने स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने वाले ब्लड बैंक कर्मियों को तुरंत नौकरी से निकाला जाए और पुलिस केस दर्जकर गिरफ्तार किया जाए।
इलाज करवा रहे परिजनों में खौफ का माहौल
सूत्रों के अनुसार बठिंडा के सिविल अस्पताल से 80 से अधिक थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चे का इलाज परिजन करवा हैं। लेकिन पिछले पांच माह में तीन एचआईवी संक्रमित ब्लड चढ़ाने के मामले सामने आने के बाद अब बच्चों के परिजनों में खौफ का माहौल है। उन्हें डर है कि न जाने कब उनके बच्चे को एचआईवी संक्रमित ब्लड चढ़ा दिया जाए।