इश्क कमीना नहीं होता: किसी ने तोड़ी धर्म की दीवार, किसी ने सीखी इशारों की भाषा... पढ़ें ऐसे प्रेमियों की कहानी
आज प्यार का त्योहार है। लोग अपने क्रश, पसंदीदा शख्स या प्रेमी/जीवनसाथी के साथ वक्त बिता रहे हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे प्रेमियों की कहानी, जिन्होंने अपने प्यार के लिए कुछ अलग किया।
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आज प्यार का दिन है। पूरे देश और दुनिया में वैलेंटाइन डे प्रेमी उत्साह से मना रहे हैं। प्रेम और प्रेमियों को समर्पित इस दिन पर हम आपको बता रहे हैं ऐसे कुछ जोड़ों की कहानी, जिन्होंने साबित कर दिया कि इश्क कमीना नहीं होता। इश्क तो साधना है।
ससुराल वालों के लिए सीखी साइन लैंग्वेज
प्यार में जाति, धर्म की दीवार तो टूटती रहती है। आम भाषा इसमें रुकावट नहीं पैदा करती है। लेकिन चंडीगढ़ सेक्टर 46 निवासी नितेश शर्मा और शीतल नेगी का प्यार थोड़ा अलग है। दोनों 8 साल से एक दूसरे को जानते थे। सोशल वर्क की दुनिया से जुड़े रहने की वजह से एक दूसरे के काम का सम्मान भी करते थे0। फिर एक प्रोग्राम के दाैरान काफी समय साथ रहना हुआ। तो लगा कि दोनों ही एक दूसरे के लिए बने हैं। लेकिन एक समस्या सामने आ रही थी। नितेश के परिवार के लोग मूक-बधिर हैं। ऐसे में उनको एक ऐसी जीवन संगिनी चाहिए थी जो उनके मां- पिता और परिवार के बाकी लोगों को भी अपना समझे। उनके साथ वैसे ही व्यवहार करे जैसे किसी आम आदमी के साथ किया जाता है। इस पर शीतल ने तय किया कि वह साइन लैग्वेज सीखेंगी। जिससे अपने ससुराल वालों के लिए बहू नहीं बेटी की भूमिका निभा सके। फिर क्या था नितेश ने शीतल को प्रपोज किया और महज 30 दिन के अंदर दोनों ने शादी कर ली। दोनों ही लोग सोशल वर्क क्षेत्र में काफी ज्यादा मेहनत भी करते है। नितेश जहां मूक- बधिर लोगों के लिए विशेष भाषा की ट्रेनिंग आम लोगों को भी देते हैं वहीं शीतल मानसिक ताैर पर कम विकसित बच्चों को क्षेत्र में काम करती है। दोनों का प्यार इस सोशल वर्क के साथ - साथ परवान चढ़ रहा है।

मजहब की बाधा तोड़ सरवर अली और पूनम ने किया प्यार
प्यार मजहब की दीवार को नहीं मानता है। दिल से दिल के तार जुड़ जाएं तो हर बाधा पार हो जाती है। शहर के रहने वाले सरवर अली और उनकी पत्नी पूनम शर्मा चंडीगढ़ के गवर्नमेंट कॉलेज सेक्टर- 11 में पढ़ाई करते थे। कॉलेज के दिनों में एनीजीओ संकल्प नाम की संस्था से जुड़े हुए थे, यह संस्था गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे इकट्ठा करती थी। इसके साथ ही सर्दियों के दिनों में गरीबों को स्वेटर और कंबल बांटते थे।
सरवर अली कॉलेज में म्यूजिक डिपार्टमेंट से जुड़े थे और पूनम पोस्टर मेकिंग और फेस मेकिंग के कंपटीशन में हिस्सा लेती थीं। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई। कई कार्यक्रम में साथ होने से दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। तीन वर्ष में प्यार परवान चढ़ गया। इस बीच सरवर अली आगे की पढ़ाई के लिए मध्य प्रदेश चले गए। वहीं पूनम शर्मा ने पंजाब यूनिवर्सिटी में मास्टर डिग्री में एडमिशन ले लिया।
इसके बाद जब सरवर अली वापस आए तो दोनों ने शादी करने का तय किया। चूंकि दोनों का धर्म अलग-अलग था तो परिवार वाले भी शादी की बात सुनकर झिझक में पड़ गए। सरवर अली ने तो कुछ समय के बाद अपने परिवार को मना लिया, लेकिन पूनम के परिवार वाले राजी नहीं हुए। आखिर में कुछ और समय के बाद काफी प्रयास के बाद शादी के लिए मान गए। इसके बाद दोनों की शादी हो गई। आज इनका 5 वर्ष का बेटा है। सरवर अली का खुद का थिएटर ग्रुप है और पूनम स्कूल में टीचर के पद पर है। दोनों हंसी खुशी से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
बहन की शादी में चार हुई थीं आंखें
सेक्टर-43 निवासी कृष्ण कुमार शारदा ने 1977 में प्रज्ञा से लव मैरिज की थी। कृष्ण कुमार शारदा पंजाब खादी बोर्ड के तकनीकी अधिकारी पद से सेवानिवृत हैं। वे पंजाब खादी सेवा संघ और आचार्यकुल चंडीगढ़ के भी अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि 1974 में मेरी बहन की चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में शादी थी। उस शादी में मेरी होने वाली पत्नी प्रज्ञा भी आई थीं। हम दोनों एक-दूसरे से अनजान थे। शादी के दिन ही हमने एक-दूसरे को देखा। उनका घर सेक्टर-22 में था और मेरा 15 में। मेरे बहनोई और प्रज्ञा के पिता गहरे दोस्त थे। जब भी मेरे जीजा कहते सेक्टर-22 में प्रज्ञा के घर चलना है, तो वे तुरंत ही सब काम छोड़कर तैयार हो जाते और उनके साथ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर प्रज्ञा के घर पहुंच जाते। धीरे-धीरे आना-जाना होने लगा, लेकिन यह बहुत संवेदनशील था। किसी को पता भी न चले, इसका पूरा ख्याल रखा जाता। प्रज्ञा भी अपनी मां के साथ सेक्टर-15 में कृष्ण कुमार शारदा के घर उनकी मां को देखने आया करती थीं। दोनों की शादी 1977 में हुई।प्रज्ञा शारदा कहती हैं कि मेरे पति बहुत संवेदनशील हैं। मेरी हर छोटी बातों का ख्याल रखते हैं। उन्होंने मुझे एमए एमएड करवाया। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में नौकरी की। हम एक-दूसरे के सहयोगी हैं। वर्ष 1974 से 2024 कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। हमारा कभी विवाद भी नहीं हुआ। कृष्ण कुमार शारदा का कहना है कि प्रज्ञा अपनी मां के साथ मेरे घर बीमार मां को कभी-कभी देखने आतीं। हम सभी अकेले रहते थे। मां बीमार थी तो किचन भी अस्त-व्यस्त था। प्रज्ञा चाय भी बनातीं और किचन संभालकर अपनी मां के साथ चली जाती थीं।
बस में सफर करते हुआ प्यार, शादी के बंधन में बंधे
अगर दिल से दिल मिल जाएं तो जिंदगी का सफर आसान हो जाता है। सेक्टर-37 निवासी हैरी कुमार और पटियाला की कुलविंदर कौर का रिश्ता भी कुछ इसी तरह का हैं। कभी सीटीयू की बस में सफर के दौरान मिले थे। पहली मुलाकात में ही उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया। उनकी 21 नवंबर 2020 को परिजनों की मर्जी से बड़ी धूमधाम से शादी हुई।
हैरी सेक्टर 26 में जॉब करते थे। सेक्टर 17 बस स्टैंड से सीटीयू की बस में वह सुबह ड्यूटी के लिए सेक्टर- 26 जा रहे थे। बस में एक खूबसूरत युवती बैठी हुई थी। वो अपने धुन में खोई हुई थी। हैरी उनके सामने वाली सीट पर बैठ गए। दोनों एक दूसरे को देखने लगे और फिर धीरे धीरे बातें हुई। हैरी ने किसी बहाने उन्हें अपना मोबाइल नंबर एक्सचेंज किया। जहां से उनके जीवन की शुरुआत हुई। कुलविंदर ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि सीटीयू में मिले एक युवक के साथ उनकी शादी होगी।
सेक्टर-17 के लव प्वाइंट पर मिले थे, अब हर बार वहीं मनाते हैं वैलेंटाइन डे
चंडीगढ़ में बहुत से लव प्वाइंट ऐसे हैं, जहां प्रेमी जोड़े वेलेंटाइन डे बनाते हैं। हजारों लोगों ने इन प्वाइंट से अपने लव लाइफ की शुरुआत की है। इन लव प्वाइंट में एमसीएम, गेड़ी रूट, सेक्टर-17 अंडरपास, सेक्टर-17 प्लाजा, लेजर वेली, रोज गार्डन, सुखना लेक, बॉटेनिकल गार्डन, पीयू कैंपस का रोज गार्डन, सेक्टर-42 का न्यू लेक, मोहाली का थ्री बी टू शामिल हैं। प्रिया बताती हैं कि छह साल पहले वह पति से चंडीगढ़ के सेक्टर-17 प्लाजा में मिली थी। उसके बाद उन्होंने एक साल चंडीगढ़ के लव पॉइंट पर जाकर घंटों समय बिताया। वह हर साल उन्हीं पॉइंट पर जाकर अपनी यादों का ताजा करते हैं। जब वह इन पॉइंट पर जाते हैं तो उन्हें लगता हैं कि आज ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि इन पॉइंट ने बहुत से प्रेमी जोड़ों को शादी के बंधन में बांधा है। चंडीगढ़ की उनके जीवन में जीवन की अहम यादें जुड़ी हैं। इस बार भी वह सभी पॉइंट पर जाएंगी। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ एक खूबसूरत जगह है, यहां प्यार पर कोई रोक नहीं है।पत्नी के देहांत के बाद उनकी दिली इच्छा को पूरा कर रहे अमर
वेलेंटाइन डे पर हर कोई अपने प्यार का इजहार तो करता है, लेकिन इस प्यार को मकबूल चढ़ा रहे मुबारक इवेंट्स एंड एंटरटेनमेंट के प्रबंधक अमर वर्मा। अमर वर्मा की पत्नी शिखा (26) की सड़क हादसे में देहांत हो चुका है। उनकी पत्नी मुबारक इवेंट्स एंड एंटरटेनमेंट के जरिए लड़कियों और महिलाओं के टैलेंट को दिखाने के लिए हर साल इवेंट किया करती थी। पत्नी के जाने के बाद अमर वर्मा ने इस सिलसिले को नहीं तोड़ा और उनकी याद में अब भी इवेंट करा रहे हैं।
अमर ने बताया कि शिखा वर्मा बहुत ही प्रेरणादायक और आत्म विश्वास से भरी हुई थीं। वह दीन-दुखियों की मदद करने में हमेशा आगे रहती थी। उन्होंने बताया कि शिखा खासतौर पर विवाहिता महिलाओं को प्रेरित करती थीं कि वो मुश्किल भरे परिस्थितियों में अपने हुनर को छुपाएं नहीं बल्कि सामने लाएं। शिखा गरीब हो या अमीर, हर वर्ग की महिलाओं को एक मंच पर लाती थीं। शिखा ने उन सबके सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया था। वह महिलाओं में आत्मविश्वास जगाती थीं, ताकि प्रगतिशील समाज में अपनी पहचान बना सकें और अपनी प्रतिभा को जगाए रखें।
घुटनों पर बैठकर पहले मांगी माफी... फिर किया इजहार
सिविल व कंप्यूटर साइंस विभाग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते-करते एक कार्यक्रम में पहली मुलाकात हुई और बाद में दोनों के बीच दोस्ती हो गई। कुछ दिनों बाद दोस्ती प्यार में बदल गई और फिर बात शादी तक पहुंच गई। दोनों के परिजनों ने आपस में मिल जुलकर वर्ष 2018 में शादी कर दी। यह प्रेम कहानी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग विभाग में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर पढ़ाने वाले डाॅ. नीतिश शर्मा और कंप्यूटर साइंस से इंजीनियर उनकी पत्नी प्रो. स्वेदिका शर्मा की है। उन्होंने बताया कि प्यार के बीच में उनके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर नोंक-झोंक होती रहती थी। लेकिन एक बार आपसी झगड़ा इतना बड़ गया कि उन्हें स्वेदिका के सामने घुटनों के बल बैठकर पहले माफी मांगनी पड़ी और फिर उन्हें अपने प्यार का इजहार करना पड़ा।
डाॅ. नीतिश शर्मा ने जिंदगी के सुनहरे पलों का याद करते हुए बताया कि वह मूलरूप से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के रहने वाली हैं, लेकिन कई साल से मोहाली में रह रहे हैं। बताया कि वर्ष 2011 में वह चितकारा यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। इसी यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस विभाग में स्वेदिका पढ़ाई कर रही थी। दोनों उस समय सेकेंड ईयर में थे और एक कार्यक्रम के दौरान दोनों की मुलाकात हुई। वहां से शुरू हुई बातचीत के बाद दोनों के बीच दोस्ती हो गई और यही दोस्ती कब प्यार में बदल गई, उन्हें पता ही नहीं चला।
वेलेंटाइन डे पर दिया था इतना बड़ा टेडी, दो दोस्त प्रेमिका के कमरे पर छोड़ने गए
डाॅ. नीतिश ने बताया कि वर्ष 2013 में वेलेंटाइन डे के मौके पर स्वेदिका को गिफ्ट में देने के लिए टेडी बियर लेकर गया। लेकिन वह टेडी बियर इतना बड़ा था कि उसे उठाने के लिए भी वह दोस्त की मदद ले रहे थे। जब वह स्वेदिका को देने के लिए पहुंचे तो वह भी हैरान हो गईं और इस सोच में पड़ गईं कि इस गिफ्ट को कहां और कैसे लेकर जाएंगी। इसके बाद खुद नीतिश अपने एक दोस्त के साथ उस टेडी बियर को स्वेदिका के हॉस्टल में कमरे तक छोड़कर आए। लेकिन इसे देखने के बाद वह बहुत खुश हुई थीं। स्वेदिका उस दिन को याद कर आज भी बेहद खुश होती हैं। आज उन दोनों की शादी को करीब छह साल हो गए हैं और उनका साढ़े 10 महीने का एक बेटा भी है।
डॉ. नीतिश ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें मॉडलिंग का भी काफी शौक रहा है। इसलिए वह चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाली मॉडलिंग प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेते थे। इसी के चलते वह एक बार मिस्टर हिमाचल प्रदेश और एक बार मिस्टर नाॅर्थ इंडिया भी बने। अब वह चंडीगढ़ और अन्य कई शहरों में होने वाले रैंप शो इत्यादि में बतौर जज की भूमिका भी अदा करते हैं। इसके अलावा पिछले कई सालों से वह पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के साथ मिलकर योग टीचर का भी काम कर रहे हैं।
