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पंजाब की सियासत में बड़े दल ही रहे वर्चस्वधारी, इस बार छोटे कहीं बिगाड़ न दे 'खेल'

Sat, 30 Mar 2019 06:28 PM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 30 Mar 2019 06:28 PM IST
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Lok sabha election 2019, Impact of big Political Parties in Punjab's Politics
सांकेतिक तस्वीर

लोकसभा चुनाव 2019 में भी पंजाब की 13 संसदीय सीटों पर निर्दलीय, गैर क्षेत्रीय और छोटे दलों द्वारा मुकाबले की बिसात बिछाई जाने लगी है। प्रदेश में अब तक हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान आमतौर पर छोटे और गैर क्षेत्रीय दल अकेले चुनाव लड़ते रहे हैं लेकिन वोट प्रतिशत में आम आदमी पार्टी को छोड़कर इनकी भूमिका कभी भी निर्णायक साबित नहीं हुई। 

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इस बार गैर क्षेत्रीय दलों के साथ कई स्थानीय दलों के दो बड़े गठबंधन वजूद में आ गए हैं, जिनमें पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस के तहत बसपा, सीपीआई और लोक इंसाफ पार्टी एक बैनर तले हैं जबकि पंजाब सेकुलर अलायंस के तहत छह स्थानीय छोटे दल हैं। दूसरी ओर पंजाब के मतदाताओं के व्यवहार पर नजर डाली जाए तो लगभग सभी चुनावों में मतदाताओं ने बड़े राजनीतिक दलों को ही तरजीह दी है। 
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पंजाब में फिलहाल कांग्रेस और शिअद-भाजपा ने अपने प्रत्याशियों का एलान नहीं किया है लेकिन आम आदमी पार्टी के अलावा छोटे दलों के दोनों गठबंधन- पीडीए और पीएसए ने विभिन्न सीटों पर अपने प्रत्याशियों का एलान कर दिया है। वहीं, अकाली दल टकसाली, अकाली दल अमृतसर जैसे कई दल अकेले ही चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। 

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Lok sabha election 2019, Impact of big Political Parties in Punjab's Politics
सांकेतिक तस्वीर

हालांकि, किसी भी संसदीय सीट की पूरी स्थिति बड़े दलों के प्रत्याशियों की घोषणा के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी कि मुख्य प्रत्याशियों को छोटे दलों के प्रत्याशी नुकसान पहुंचा सकेंगे या नहीं। फिर भी ऐसी प्रमुख सीटें जहां से बड़े दलों के दिग्गज चुनाव लड़ने वाले हैं, पर पीडीए ने कुछ ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दिए हैं, जो बड़े दल के प्रत्याशियों की वोट काटने की स्थिति में रहेंगे। 

इनमें बठिंडा सीट पर अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल को पीडीए के तहत पंजाब एकता पार्टी के सुखपाल खैरा चुनौती दे रहे हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। अगर कांग्रेस प्रत्याशी कमजोर रहा तो हरसिमरत के लिए मुख्य चुनौती खैरा बन सकते हैं लेकिन मजबूत कांग्रेस प्रत्याशी रहने पर खैरा द्वारा हरसिमरत के वोट बैंक में ही सेंध लगेगी। 

उधर, फिरोजपुर सीट पर शेर सिंह घुबाया इस बार कांग्रेस के प्रत्याशी बन सकते हैं और अकाली दल से सुखबीर बादल के मैदान में उतरने की चर्चा है। पीडीए के अधीन यह सीट सीपीआई के खाते में गई है। ऐसे में मुकाबला अकाली दल और कांग्रेस के बीच ही रहेगा। लुधियाना में लोक इंसाफ पार्टी और पटियाला में आप से बागी सांसद धर्मवीर गांधी अपनी पंजाब मंच पार्टी से मैदान में हैं।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जब पंजाब में आम आदमी पार्टी ने वर्चस्व कायम किया था, तब लगभग सभी सीटों पर निर्दलीय और छोटे दलों का वोट प्रतिशत महज 1 से 5 फीसदी के बीच रहा था। हालांकि तब बसपा और सीपीआई ने कई सीटों पर 4-6 फीसदी वोट हासिल किए थे। 
 

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