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Hindi News ›   Chandigarh ›   Lok sabha 2019, High court gives relief to AAP Candidate Narinder Shergill From Anandpur Sahib

आप प्रत्याशी शेरगिल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, चुनाव आयोग का नामांकन रद्द करने का आदेश खारिज

Thu, 02 May 2019 10:28 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 02 May 2019 10:28 PM IST
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Lok sabha 2019, High court gives relief to AAP Candidate Narinder Shergill From Anandpur Sahib
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

पंजाब की आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी नरिंदर सिंह शेरगिल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने शेरगिल का नामांकन रद्द करने का चुनाव आयोग का फैसला ही खारिज कर दिया। चुनाव आयोग ने शेरगिल को पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशी के रूप में चुनाव खर्च का हिसाब नहीं देने के लिए तीन साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दे दिया था।

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इसी के तहत शेरगिल का लोकसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्र रद्द कर दिया गया था। गुरुवार दोपहर तीन बजे रिटर्निंग अफसर द्वारा शेरगिल का नामांकन पत्र रद किए जाने के एलान के बाद शेरगिल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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हाईकोर्ट के जस्टिस दया चौधरी और जस्टिस सुधीर मित्तल की खंडपीठ ने गुरुवार को चार घंटे तक सुनवाई के बाद शेरगिल का नामांकन रद्द करने के चुनाव आयोग के आदेश को खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा शेरगिल के तीन साल तक चुनाव लड़ने पर लगाई गई रोक के आदेश को भी रद्द कर दिया।

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चुनाव आयोग की दलील 

चुनाव आयोग ने शेरगिल का नामांकन इस आधार पर रद्द किया कि उन्होंने वर्ष 2017 में मोहाली से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव खर्च का ब्योरा आयोग को नहीं सौंपा। इस पर आयोग ने 7 जून, 2018 को उन पर तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। यह रोक 6 जून, 2021 तक प्रभावी रहनी थी। 

शेरगिल की दलीलें 
- शेरगिल ने हाईकोर्ट में दलील दी कि नामांकन पत्र में उन्होंने अपने आवश्यक खर्च का पूरा ब्योरा दिया था और रिटर्निंग अफसर ने भी इसकी पूरी जांच करने के बाद उस पर सहमति जताई थी। इसी आधार पर शेरगिल ने 29 अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल किया था। 

- शेरगिल ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाए जाने के बारे में चुनाव आयोग या राज्य चुनाव अधिकारी की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई और ना ही उन्हें इस मामले में अपना पक्ष रखने का कोई अवसर दिया गया।

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