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तस्वीरें: चंडीगढ़ लिट फेस्ट शुरू, प्रशासक बदनौर ने किया उद्घाटन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 27 Nov 2016 02:08 AM IST
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चंडीगढ़ लिट फेस्ट लिटराटी शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ लेक क्लब में शनिवार को दो दिवसीय लिटराटी, चंडीगढ़ लिट फेस्ट का उद्घाटन पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने किया। इस मौके पर उन्होंने ‘मीरा की अध्यात्मिकता, जैमल की वीरता, मेवाड़ की विरासत, साहित्य हम सबकी विरासत’ कहकर लिटराटी 2016 का आगाज किया। उन्होंने लेक क्लब को लिटरेचर फेस्टिवल के लिए चंडीगढ़ में बेस्ट लोकेशन बताया और कहा कि वह मेवाड़ और बदनौर के इतिहास पर एक किताब लिख रहे हैं।
आज का शेड्यूल
दोपहर 12 बजे पाकिस्तान पत्रकार तारिक फतेह के साथ आईएएस सुमिता मिश्रा करेंगी बात।
दोपहर बाद 2:45 बजे सइद नकवी के साथ नील कमल पुरी करेंगे बात
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पंजाब में साहित्य को सही प्रमोशन नहीं मिली: घुग्गी
पंजाब में साहित्य को सही प्रमोशन नहीं मिली: घुग्गी
- फोटो : अमर उजाला
सरकारी पधर ते साहित नूं प्यार ही नहीं कीता जांदा
लिट फेस्ट में कॉमेडियन गुरप्रीत घुग्गी ने कहा कि सरकारें साहित्य की तरफ ध्यान ही नहीं देतीं। सरकारी पधर ते साहित नूं प्यार ही नहीं कीता जांदा। अगर सरकार रीजनल लेवल पर चार पांच फिल्मों की फंडिंग कर दे तो इससे बड़ी कोई और बात नहीं हो सकती।
लेकिन हमारी सरकारों के दृष्टिकोण में साहित्य कही नजर ही नहीं आता। दूसरा पंजाब की तुलना में बंगाल और मेरठ का साह्त्यि बहुत ज्यादा है। दरअसल पंजाबी साहित्य को प्रमोट ही नहीं किया गया है। लेकिन अब इसमें फिल्म डायरेक्शन की लाइन में नए आर्टिस्ट आ रहे हैं जो साहित्य से संबंधित फिल्में बना रहे हैं। जो काबिले तारीफ है।
वहीं इस मौके पर लेखक जस्स गरेवाल ने बताया कि पहले फिल्मों मुझे भी लिखते समय कुछ सीमाओं को ध्यान में रखना पड़ता है। उसमें से दो पेज ऐेसे मिल जाते है जिनमें अपने दिल्ल की बात रख पाता हूं।
लिट फेस्ट में कॉमेडियन गुरप्रीत घुग्गी ने कहा कि सरकारें साहित्य की तरफ ध्यान ही नहीं देतीं। सरकारी पधर ते साहित नूं प्यार ही नहीं कीता जांदा। अगर सरकार रीजनल लेवल पर चार पांच फिल्मों की फंडिंग कर दे तो इससे बड़ी कोई और बात नहीं हो सकती।
लेकिन हमारी सरकारों के दृष्टिकोण में साहित्य कही नजर ही नहीं आता। दूसरा पंजाब की तुलना में बंगाल और मेरठ का साह्त्यि बहुत ज्यादा है। दरअसल पंजाबी साहित्य को प्रमोट ही नहीं किया गया है। लेकिन अब इसमें फिल्म डायरेक्शन की लाइन में नए आर्टिस्ट आ रहे हैं जो साहित्य से संबंधित फिल्में बना रहे हैं। जो काबिले तारीफ है।
वहीं इस मौके पर लेखक जस्स गरेवाल ने बताया कि पहले फिल्मों मुझे भी लिखते समय कुछ सीमाओं को ध्यान में रखना पड़ता है। उसमें से दो पेज ऐेसे मिल जाते है जिनमें अपने दिल्ल की बात रख पाता हूं।