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पंजाब में शराब के लिए लाइसेंस बनाने के प्रावधान को चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Tue, 22 Mar 2016 07:57 PM IST
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पंजाब सरकार की ओर से साल 2016-17 के लिए जारी एक्साइज पॉलिसी में आईएमएफएल (भारत में निर्मित अंग्रेजी शराब) के लिए तीन और बीयर केलिए दो एल-वन-ए के नाम से लाइसेंस का प्रावधान बनाने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याची विधायक बलबीर सिंह सिद्धू के छोटे भाई अमरजीत सिंह सिद्धू हैं।
अमरजीत सिंह सिद्धू ने अपनी याचिका में राज्य में शराब के कारोबार पर पांच बड़ी कंपनियों के एकाधिकार की आशंका जताते हुए यह लाइसेंस ड्रा ऑफ लाट के माध्यम से या हाईकोर्ट की ओर से जारी किए जाने की मांग की है। मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर एक्साइज पॉलिसी के नये प्रावधान पर रोक क्यों न लगा दी जाए।
याचिका में कहा गया है कि सरकार शराब का पहले से बड़ा कारोबार कर रहे डोडा ग्रुप, चड्डा ग्रुप, मल्होत्रा ग्रुप और एडी ग्रुप जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। वैसे एक्साइज विभाग के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह लाइसेंस का कोई प्रावधान हटा सके या कोई नया लाइसेंस बना सके।
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इस दलील के साथ मांग की गई है कि एल-वन-ए के प्रावधान पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ यह प्रावधान खत्म किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस लाइसेंस का ड्रा निकाला जाए या फिर यह लाइसेंस हाईकोर्ट स्वयं जारी करे।
सरकार का नया प्रावधान
सरकार ने इस लाइसेंस के लिए नया प्रावधान तय किया है। इसके तहत शराब के लिए तीन और बीयर के लिए दो लाइसेंस दिए जाने हैं। लाइसेंस धारक कंपनियां या तो सरकार से सीधे शराब खरीद सकेंगी और या फिर राज्य के बाहर शराब उत्पादक कंपनियों सेे शराब खरीद सकेंगी। इसके बाद लाइसेंस धारक शराब ठेकेदारों को शराब बेंचेंगे। इससे शराब के एल-वन कारोबारियों का शराब कंपनियों से सीधा संपर्क नहीं रहेगा। एल-वन-ए लाइसेंस धारकों को बड़ा मुनाफा होगा।
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अमरजीत सिंह सिद्धू ने अपनी याचिका में राज्य में शराब के कारोबार पर पांच बड़ी कंपनियों के एकाधिकार की आशंका जताते हुए यह लाइसेंस ड्रा ऑफ लाट के माध्यम से या हाईकोर्ट की ओर से जारी किए जाने की मांग की है। मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर एक्साइज पॉलिसी के नये प्रावधान पर रोक क्यों न लगा दी जाए।
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याचिका में कहा गया है कि सरकार शराब का पहले से बड़ा कारोबार कर रहे डोडा ग्रुप, चड्डा ग्रुप, मल्होत्रा ग्रुप और एडी ग्रुप जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। वैसे एक्साइज विभाग के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह लाइसेंस का कोई प्रावधान हटा सके या कोई नया लाइसेंस बना सके।
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इस दलील के साथ मांग की गई है कि एल-वन-ए के प्रावधान पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ यह प्रावधान खत्म किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस लाइसेंस का ड्रा निकाला जाए या फिर यह लाइसेंस हाईकोर्ट स्वयं जारी करे।
सरकार का नया प्रावधान
सरकार ने इस लाइसेंस के लिए नया प्रावधान तय किया है। इसके तहत शराब के लिए तीन और बीयर के लिए दो लाइसेंस दिए जाने हैं। लाइसेंस धारक कंपनियां या तो सरकार से सीधे शराब खरीद सकेंगी और या फिर राज्य के बाहर शराब उत्पादक कंपनियों सेे शराब खरीद सकेंगी। इसके बाद लाइसेंस धारक शराब ठेकेदारों को शराब बेंचेंगे। इससे शराब के एल-वन कारोबारियों का शराब कंपनियों से सीधा संपर्क नहीं रहेगा। एल-वन-ए लाइसेंस धारकों को बड़ा मुनाफा होगा।