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पंजाब: भीड़ जुटाने पर पहले होती थी कार्रवाई, अब सत्तापक्ष का प्रदर्शन जारी, सरकार 'खामोश'
Wed, 23 Sep 2020 04:19 AM IST
ajay kumar
सुशील कुमार, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
सुशील कुमार, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 23 Sep 2020 04:19 AM IST
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संगरूर में इकट्ठा किसान। (फाइल फोटो)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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कृषि विधेयकों का तीखा विरोध कोरोना से बचाव के नियमों पर भारी पड़ रहा है। चारों तरफ आंदोलनकारियों की भीड़ देखकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या लोगों के तीखे विरोध के आगे कोरोना वायरस ने घुटने टेक दिए हैं? गांवों से लेकर शहरों में हजारों किसान, आढ़ती, मजदूर समेत कई सियासी दलों के सदस्य कृषि विधेयकों के खिलाफ इकट्ठे होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं सूबे में पचास से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है। इस विधेयक के पहले भीड़ जमा करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।
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भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी शर्मा के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था। अब सत्तापक्ष भी इन विधेयकों के विरोध में उतर आया है और भीड़ जुटाकर रोष जताने में जुट गया है। ऐसे में सवाल उठने लाजिमी हैं कि अब सरकार ‘खामोश’ क्यों हो गई है। क्या अब कोरोना का खतरा टल गया है या कोरोना वायरस गायब हो गया है। हालांकि किसान संगठनों के प्रतिनिधि कह रहे हैं कि कोरोना से इतना गंभीर खतरा नहीं है जितना गंभीर खतरा इन खेती विधेयकों से है। भाकियू एकता सिद्धूपुरा के प्रतिनिधि रण चठ्ठा का कहना है कि यह विधेयक पंजाब के हर एक घर को बर्बाद कर देंगे, जिससे पंजाब कभी उभर नहीं सकेगा।
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आप विधायक अमन अरोड़ा का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि कोरोना महामारी की वजह से जिस प्रकार के खतरे के हालात बने हुए हैं, उसमें सभी को अपना ध्यान रखने की जरूरत है। साथ ही कहा कृषि विधेयकों से पंजाब में केवल किसानों के लिए ही नहीं बल्कि तमाम वर्गों के लिए भुखमरी जैसे भयानक हालत बन जाएंगे और उसी के भय को देखते हुए मजबूरी के चलते सभी विरोध कर रहे हैं। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि केंद्र सरकार ने कोरोना की आड़ में खेती विधेयक पास कराए हैं। देश में इस प्रकार के विरोध के लिए सीधे तौर पर केंद्र ही जिम्मेदार है और ऐसे नाजुक हालात में यदि किसी तरह के जान माल का नुकसान होगा तो उसके लिए केंद्र सरकार ही जिम्मेदार होगी।
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