जमीन अधिग्रहण: सुप्रीम कोर्ट में किसानों को बड़ी राहत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेक्टर-76 से 80 की 102 एकड़ जमीन के मामले में राज्य सरकार व गमाडा को सुप्रीम कोर्ट ने झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा चौदह साल पहले जमीन एक्वायर करने के लिए जारी की गई नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया है।
कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के अध्यादेश 2013 की धारा 24(2) को ध्यान में रखकर फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला वीरवार को सुनाया है। इलाके के लोगो ने इस संबंधी सिविल पटिशन कोर्ट में दायर की थी। अब सरकार को उक्त जमीन को एक्वायर करने के लिए नए सिरे से प्लानिंग करनी होगी।
जानकारी के मुताबिक 2000 में राज्य सरकार ने सेक्टर-76 से 80 में जमीन एक्वायर करने के लिए जमीन एक्वॉयर की थी। 17 मई 2001 को गमाडा ने जमीन का अवार्ड सुनाया था। इस दौरान 1264.84 एकड़ के करीब जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसमें एक एकड़ के बदले किसानों को दस लाख रुपये ऑफर किए गए थे।
जमीन चार गांवों मौली बैदवान, सोहाना, रायपुर खुर्द और लखनपुर की एक्वायर की जानी थी। अधिकतर किसानों ने गमाडा द्वारा दिया मुआवजा ले लिया था, लेकिन गांव सोहाना और मौली के कुछ किसानों ने नोटिफिकेशन को राज्य सरकार द्वारा 1996 में बनाई गई फार्मर फ्रेंडली स्कीम के विपरीत बताया। साथ ही वे मामले को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ले गए थे। कई साल मामला अदालत में चला, लेकिन 2011 में हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा जारी की गई नोटिफिकेशन को सही ठहराया। साथ ही फैसला सरकार के पक्ष में सुनाया।
सीवरेज और सड़कों का काम होगा प्रभावित
इसके बाद किसान ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सिविल रिट पटिशन दायर कर दी थी। इसका अब फैसला किसानों के पक्ष में आ गए। हालांकि गमाडा के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अभी उन्होंने फैसले की कॉपी नहीं देखी है। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नहीं लिए थे जमीन के पैसे
इस मामले में कानूनी जंग लड़ रहे किसान हित बचाओ कमेटी के कनवीनर डीपी सिंह बैदवान ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 2013 में बनाए गए जमीन अधिग्रहण एक्ट लागू किए जाने के बाद जमीन मालिक जसमेर सिंह, करनैल कौर, सुमेध सिंह सैनी, पाल सिंह, स्वर्ण सिंह, गुरनाम सिंह, कुलवंत कौर समेत कई लोगों ने अलग-अलग केस सुप्रीम कोर्ट में दायर कर किया था। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। उन्होंने जमीन का कब्जा नहीं छोड़ा था। न ही उन्होंने गमाडा से मुआवजा लिया था। ऐसे में उनके हितों का ध्यान रखा जाए।
पांच सेक्टरों में ही पड़ती है 102 एकड़ जमीन
डीपी सिंह बैदवान ने बताया कि यह 102 एकड़ जमीन सेक्टर-76, 77, 78, 79 और 80 में पड़ती है। जमीन छोटे-छोटे टुकड़ों में है। जहां पर किसानों द्वारा अभी तक भी खेती की जा रही है। उन्होंने बताया कि शेष जमीन गमाडा के हाथ में है। जहां पर लोगों के घर, सड़कें, मार्केट और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से गमाडा की प्लानिंग पूरी तरह बिगड़ जाएगी। क्योंकि यह 102 एकड़ जमीन विभिन्न एरिया में स्थित है। जहां पर गमाडा को सड़क से लेकर सीवरेज लाइन बिछाने की तैयारी में है। गमाडा ने लाखों रुपये की लागत से काम भी शुरू कर दिया है। ऐसे में अब उस काम में भी रुकावट आ जाएगी।