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जालंधर का वृंदा देवी मंदिर: 40 दिन की पूजा से पूरी होती है हर मनोकामना, तुलसी विवाह पर होता है समागम
Thu, 27 Jul 2023 03:47 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 27 Jul 2023 03:47 PM IST
सार
वृंदा देवी मंदिर के विषय में लोक मान्यता है कि यहां 40 दिनों तक श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। जलंधर की नगरी जालंधर के विषय में पुराणों में उल्लेख मिलता है कि यहां 12 तालाब हुआ करते थे और शहर में प्रवेश के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था।
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जालंधर का वृंदा देवी मंदिर।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पंजाब के प्रमुख शहरों में शामिल जालंधर में कई मंदिर हैं। इन्हीं में से एक है असुरराज जलंधर की पत्नी देवी वृंदा का मंदिर जो मोहल्ला कोट किशनचंद में स्थित है। मान्यता है कि यहां एक प्राचीन गुफा थी, जो सीधी हरिद्वार तक जाती थी।
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वृंदा देवी का स्वरूप है तुलसी
इस मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार भगवान विष्णु द्वारा सतीत्व भंग किए जाने पर वृंदा ने यहीं आत्मदाह कर लिया था। उनकी राख के ऊपर तुलसी के पौधे का जन्म हुआ था। तुलसी देवी वृंदा का ही स्वरूप है जिसे भगवान विष्णु लक्ष्मी से भी अधिक प्रिय मानते हैं। इस मंदिर में तुलसी विवाह पर विशेष समागम होता है।
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40 दिन की पूजा से पूरी होती हर मनोकामना
वृंदा देवी मंदिर के विषय में लोक मान्यता है कि यहां 40 दिनों तक श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। जलंधर की नगरी जालंधर के विषय में पुराणों में उल्लेख मिलता है कि यहां 12 तालाब हुआ करते थे और शहर में प्रवेश के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था। इस स्थान की चारदीवारी के बाहर एक पुराना तालाब था जो अन्नपूर्णा मंदिर को छूता था तथा एक तरफ ब्रह्मकुंड की सीमा से लगता था। आज भी यहां पुरानी छोटी ईटों की सीढ़ियां बनी हुई हैं।
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सागर मंथन में माता लक्ष्मी के साथ उत्पन्न हुआ था जलंधर
जलंधर के विषय में अन्य स्थानों पर यह उल्लेख मिलता है कि सागर मंथन के समय देवी लक्ष्मी के साथ जलंधर भी उत्पन्न हुआ था। यह असुरों का हिमायती था और वर्तमान जालंधर नगरी इसकी राजधानी थी।