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Sawan 2023: पंचकूला का सकेतड़ी मंदिर, यहां स्वयं प्रकट हुए थे भोलेनाथ, पांडवों को दिए थे साक्षात दर्शन
Mon, 24 Jul 2023 12:09 PM IST
निवेदिता वर्मा
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 24 Jul 2023 12:09 PM IST
सार
सकेतड़ी का यह शिव मंदिर प्रसिद्ध माता मनसा देवी मंदिर से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चंडीगढ़ मुख्य शहर से यह लगभग दस किलोमीटर दूर है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है।
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पंचकूला का सकेतड़ी मंदिर।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
सावन का पवित्र माह चल रहा है। हिंदू धर्म में इस माह को भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस साल तो सावन दो माह का है, ऐसे में शिवभक्तों को आराधना के लिए अधिक दिन मिलने वाले हैं।
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सावन के अवसर पर पंचकूला के गांव सकेतड़ी स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की खूब भीड़ जुटती है। इस प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर में पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान तक से श्रद्धालु आते हैं। आइए आपको इस मंदिर का इतिहास बताते हैं।
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चंडीगढ़ से 10 किलोमीटर दूर है मंदिर
सकेतड़ी का यह मंदिर प्रसिद्ध माता मनसा देवी मंदिर से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चंडीगढ़ मुख्य शहर से यह लगभग 10 किलोमीटर दूर है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है।
क्या है मंदिर का इतिहास
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान में भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे। माना जाता है कि अपने अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां तपस्या की थी। उनकी पूजा अर्चना से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे। इसके बाद भोलेनाथ यहां पिंडी के रूप में स्थापित हो गए थे। ऐसी मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है।