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Kali Mata Mandir: हरियाणा में है मां काली का प्राचीन मंदिर, जिनके नाम पर बसा कस्बा, पांडवों से जुड़ी मान्यता

Wed, 26 Jul 2023 04:53 PM IST
ajay kumar डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 26 Jul 2023 04:53 PM IST
सार

कहा जाता है कि माता के हजारों हाथ-पैर थे। सभी देवताओं ने आदिशक्ति को अपना एक-एक शस्त्र दिया। विष्णु ने चक्र, शिव ने त्रिशूल, ब्रह्मा ने कमंडल, इंद्र ने वज्र, शेषनाग ने शेषफांस, यमराज ने यमफांस शस्त्र माता को अर्पित किए।

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Kalka kali mata temple: Know about Shaktipeeth Kali Mata Temple of kalka
प्राचीन श्री काली माता मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की सीमा पर हरियाणा का एक छोटा सा कस्बा है कालका। यह कस्बा बेहद खास और पौराणिक है। यहां एक सुप्रसिद्ध काली माता मंदिर है। मान्यता के अनुसार इस कस्बे का नाम कालका भी इसी मंदिर की वजह से पड़ा। देश-विदेश से श्रद्धालु माता के दरबार में नतमस्तक होने आते हैं। मान्यता यह है कि यहां मांगी हर मुराद पूरी होती है। 

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मंदिर की यह है मान्यता 

जानकारों के अनुसार सतयुग में महिषासुर, चंड-मुंड, शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे राक्षसों का उपद्रव बढ़ गया था। देवताओं ने भी गुफाओं में शरण ले ली थी। एक दिन सभी देवताओं ने आदिशक्ति श्री जगदंबा मातेश्वरी की स्तुति की। प्रसन्न होकर माता एक बालक के रूप में प्रकट हुईं। देवताओं का दुख सुनकर माता ने अपने स्वरूप को विकराल किया।  

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कहा जाता है कि माता के हजारों हाथ-पैर थे। सभी देवताओं ने आदिशक्ति को अपना एक-एक शस्त्र दिया। विष्णु ने चक्र, शिव ने त्रिशूल, ब्रह्मा ने कमंडल, इंद्र ने वज्र, शेषनाग ने शेषफांस, यमराज ने यमफांस शस्त्र माता को अर्पित किए। इसके बाद माता जगदंबा रणभूमि में उतरीं और महिषासुर समेत सभी दैत्यों का संहार कर कालका की भूमि पर आईं। कालांतर में कालका में काली माता के नाम से प्रसिद्ध हुई।

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पांडवों से जुड़ी मान्यता 

द्वापर युग में पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास हुआ था। उस दौरान वह विराट नगर में 12 वर्ष तक रुके थे। उस समय केवट राजा के राज्य में गाय की बहुत सेवा की जाती थी। वहीं एक श्यामा नाम की गाय रोजाना अपने दूध से माता की पिंडी का अभिषेक करती थी। यह करिश्मा देख पांडव आश्चर्यचकित रह गए और पांडवों ने इसी स्थान पर मंदिर की स्थापना की। कहा जाता है कि यह वही माता का मंदिर है। 

कैसे पहुंचे

कालका स्थित प्राचीन काली माता मंदिर तक पहुंचना बेहद आसान है। यहां आप हवाई मार्ग से पहुंच सकते हैं। सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चंडीगढ़ है। एयरपोर्ट से यह मंदिर लगभग 34 किमी दूर है। वहीं आप कालका तक ट्रेन से सफर कर सकते हैं। खास बात यह है कि माता के दर्शन के बाद आप यूनेस्को विश्व विरासत में शामिल कालका-शिमला रेल ट्रैक का भी अनुभव ले सकते हैं। वहीं चंडीगढ़ स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 24 किमी है। अगर आप बस, कार और बाइक से यहां आना चाहते हैं तो दिल्ली-शिमला हाइवे से पहुंच सकते हैं।  

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