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राकेश टिकैत बोले- 26 जनवरी को ट्रैक्टर पर तिरंगा लगा लाल किले पर जलवा दिखाएंगे किसान

Thu, 24 Dec 2020 07:53 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बादली/बहादुरगढ़ (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, बादली/बहादुरगढ़ (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Thu, 24 Dec 2020 07:53 PM IST
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Kisan Andolan: Farmer Leader Rakesh Tikait reached Dhansa border Of Haryana
ढांसा बार्डर पर पहुंचे राकेश टिकैत।

किसान आंदोलन में अभी तेजी आएगी। किसान तीनों कानूनों को निरस्त करवाने के बाद ही चैन की सांस लेंगे। सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसान ट्रैक्टर तिरंगा लगाकर दिल्ली के लालकिला पर अपना जलवा दिखाएंगे। किसान नेता राकेश टिकैत ने बादली के ढांसा बार्डर पर पहुंचकर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार अभी किसानों की बात सुनने को तैयार नहीं है। 

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उन्होंने अंदेशा जताया कि 10 जनवरी तक सरकार उनकी मांगों पर विचार करेगी और बाद में तीनों कानूनों को निरस्त करेगी। खेतों में कामकाज के सवाल पर टिकैत ने कहा कि आंदोलन में बैठना और मांगों को मजबूत तरीके से सरकार के सामने रखना भी किसानों की खेती है। एक साल खेतों में काम नहीं करने के बजाय सड़कों पर बैठेंगे तो किसान फिर भी जिंदा रहेगा जबकि सरकार और उद्योगपतियों को मुश्किल हो सकती है। 
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खाप और किसान संगठनों की मांगें कभी भी अधूरी नहीं रही हैं। आंदोलन की मजबूती पर उन्होंने कहा कि किसानों की एकता ही उनकी मजबूती है। उन्होंने कहा कि अब टोल फ्री करवाना भी आंदोलन की रणनीति बन गया है और देश के सभी टोल को अगले तीन दिनों के लिए फ्री करवाया जाएगा। इस मौके पर टिकैत के साथ गुलिया खाप प्रधान विनोद बादली भी मौजूद रहे।

सरकार कृषि कानून निरस्त कर किसानों को राहत दे : दहिया 
सर्वजातीय सर्वखाप महिला महापंचायत की अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया का कहना है कि नए कृषि कानूनों से खेती कार्यों में लगी महिलाओं को भारी नुकसान हो सकता है। टीकरी बार्डर पर किसान आंदोलन को समर्थन देते हुए उन्होंने कहा कि महिला किसान अपने स्तर पर काले कृषि कानूनों का विरोध कर रही हैं। 


महिलाएं अपने खेत और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ ही विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो रही हैं। सरकार को अविलंब ये कानून निरस्त कर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का कानून सौगात के रूप में देना चाहिए। संतोष दहिया ने कहा कि महिलाओं को इन तीन कानूनों से बड़ा नुकसान हो सकता है।

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खाने-पीने की आवश्यक वस्तुएं कंपनियों के हाथ में जाने पर पेट भरना भी महंगा हो जाएगा। दूसरा जो भूमिहीन किसान ठेके पर लेकर किसानी करते हैं, वे बड़ी कंपनी के आगे नहीं टिकेंगे। कंपनियां पहले तो उन्हें लालच देंगी लेकिन फिर उन्हें फंसा लेंगी। कंपनियां अपने हिसाब से खेती कराएंगी। 

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