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पाकिस्तानी जेल में मौत: शव मिला नहीं, मुआवजे पर विवाद शुरू
हितेन्द्र शर्मा/अमर उजाला, गुरदासपुर
Updated Mon, 18 Apr 2016 04:10 PM IST
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पंजाब का किरपाल सिंह की पाक जेल में मौत
- फोटो : फाइल फोटो
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पाकिस्तान की जेल में बंद किरपाल सिंह की मौत के बाद उनका शव अभी पहुंचा नहीं है, परिजनों में मुआवजे को लेकर आपसी विवाद शुरू हो गया है। एक तरफ जहां भतीजा अश्विनी कुमार व उसका परिवार किरपाल सिंह का शव भारत लाने के लिए दिल्ली में पहुंचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ किरपाल सिंह के भाई भाई रुप लाल व कुछ अन्य परिवारिक सदस्यों ने अश्विनी पर मुआवजा हासिल करने के लिए उन्हें नजर अंदाज करने का आरोप लगाया है।
रुप लाल आज शिवसेना के साथ डीसी गुरदासपुर प्रदीप कुमार सभ्रवाल को उक्त मामले में मांग पत्र देने पहुंचे थे। भतीजे अश्विनी कुमार ने बताया कि उनका अपने ताऊ रुप लाल से कोई विवाद नहीं है, पूरा परिवार एकजुट है तथा सदमे में डूबा हुआ है। उन्हे किसी मुआवजे का लालच नही है। बस सिर्फ मृतक का शव हमें मिल जाये ताकि 24 साल बाद हम उनकी मृतक देह के ही दर्शन कर सके और रीति रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कर सकें।
गौरतलब है कि गुरदासपुर के गांव मुस्तफाबाद सैदां निवासी किरपाल सिंह 1991 से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल बंद था। दो साल बाद घर आए पत्र में पता चला कि वो जिंदा है और पाकिस्तान की जेल में बंद है। उसके बाद से वह अपने गोद लिए भतीजे अश्विनी को लगातार पत्र भेजता रहा। किरपाल की डिमांड के मुताबिक अश्विनी ने 30-35 बार उसे पार्सल भी भेजे। 11 अप्रैल की रात अश्विनी को सीआईडी के माध्यम से सूचना मिली कि किरपाल की पाकिस्तान में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई है।
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रुप लाल आज शिवसेना के साथ डीसी गुरदासपुर प्रदीप कुमार सभ्रवाल को उक्त मामले में मांग पत्र देने पहुंचे थे। भतीजे अश्विनी कुमार ने बताया कि उनका अपने ताऊ रुप लाल से कोई विवाद नहीं है, पूरा परिवार एकजुट है तथा सदमे में डूबा हुआ है। उन्हे किसी मुआवजे का लालच नही है। बस सिर्फ मृतक का शव हमें मिल जाये ताकि 24 साल बाद हम उनकी मृतक देह के ही दर्शन कर सके और रीति रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कर सकें।
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गौरतलब है कि गुरदासपुर के गांव मुस्तफाबाद सैदां निवासी किरपाल सिंह 1991 से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल बंद था। दो साल बाद घर आए पत्र में पता चला कि वो जिंदा है और पाकिस्तान की जेल में बंद है। उसके बाद से वह अपने गोद लिए भतीजे अश्विनी को लगातार पत्र भेजता रहा। किरपाल की डिमांड के मुताबिक अश्विनी ने 30-35 बार उसे पार्सल भी भेजे। 11 अप्रैल की रात अश्विनी को सीआईडी के माध्यम से सूचना मिली कि किरपाल की पाकिस्तान में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई है।
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पुतला जलाने के बाद डीसी को ज्ञापन
पाक जेल में पंजाब के किरपाल सिंह के शव के लिए विरोध प्रदर्शन
- फोटो : फाइल फोटो
किरपाल की मौत के बाद पहली बार सामने आए उसके भाई रूप लाल, भतीजे तरसेम लाल, दूर के रिश्ते की बहन बलजीत कौर ने शिव सेना इंकलाब के राष्ट्रीय प्रमुख अमित अग्रवाल के साथ मिलकर डीसी कार्यालय के समक्ष पाकिस्तान का झंडा फूंका और डीसी को ज्ञापन सौंपते हुए किरपाल का शव भारत लाने व उसकी मौत की पूरी जांच की केंद्र सरकार से मांग की।
गृह मंत्रालय से जगी आस
किरपाल सिंह का शव भारत लाने के लिए भतीजा अश्विनी कुमार परिवार के साथ गत दिन से दिल्ली गया था। उसने बताया कि वह दिल्ली में विदेश मंत्रालय के ज्वाईंट सचिव गोपाल बादला, सुष्मा स्वराज, राजनाथ सिंह और केजरीवाल से मिले।
जिन्होंने विश्वास दिलाया है कि जल्द ही पाकिस्तान सरकार से संपर्क करके किरपाल का शव आज-कल में ही भारत लाया जाएगा और उन्हें सुपुर्द कर दिया जाएगा। उन्होने कहा कि इस मौके पर सतवंत सिंह की बहन दलबीर कौर ने हमारा पूरा साथ निभाया है।
गृह मंत्रालय से जगी आस
किरपाल सिंह का शव भारत लाने के लिए भतीजा अश्विनी कुमार परिवार के साथ गत दिन से दिल्ली गया था। उसने बताया कि वह दिल्ली में विदेश मंत्रालय के ज्वाईंट सचिव गोपाल बादला, सुष्मा स्वराज, राजनाथ सिंह और केजरीवाल से मिले।
जिन्होंने विश्वास दिलाया है कि जल्द ही पाकिस्तान सरकार से संपर्क करके किरपाल का शव आज-कल में ही भारत लाया जाएगा और उन्हें सुपुर्द कर दिया जाएगा। उन्होने कहा कि इस मौके पर सतवंत सिंह की बहन दलबीर कौर ने हमारा पूरा साथ निभाया है।