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‘कब्र जिन्हां दी जीवे हू’ में दिखी आजादी के लिए बलिदान देने वालों की कहानी
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चंडीगढ़। अजमेर औलख थिएटर फेस्टिवल के तीसरे दिन रविवार को पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में नाटक ‘कब्र जिन्हां दी जीवे हू’ का मंचन हुआ। नाटक के लेखक हंसा सिंह थे और इसका निर्देशन क्रांतिपाल सिंह ने किया। मंच पर नाटक में नव चिंतन कला मंच ब्यास के कलाकारों ने अभिनय किया। यह नाटक उन शहीदों का समर्पित रहा, जिन्होंने देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर कर दिए।
नाटक 1914 में गदर पार्टी के पहले प्रधान बाबा सोहन सिंह भकना की जिंदगी पर आधारित रहा, जिन्होंने अंग्रेजों से भारत को आजाद करने के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया। नाटक दिखाने का मकसद आज की युवा पीढ़ी को यह बताना था कि आजादी के लिए कितनी कुर्बानियां दी हैं, तब जाकर हमें आजादी मिली। बाबा सोहन सिंह भकना ने अंग्रेजों से लड़ने के लिए अमेरिका में जाकर गदर पार्टी बनाई। इसके बाद वापस भारत आकर देश को आजाद करने में जुट गए। इस बीच वह गिरफ्तार भी हुए और उन्होंने अपनी जिंदगी के 35 वर्ष जेल में बिताए।
नाटक बाबा सोहन सिंह भकना के तीन रोल अलग अलग कलाकारों ने निभाए। इनमें बचपन का रोल हरसिमरन कौर, जवानी का रोल जोरावर सिंह और बुजुर्ग में रोल प्रीतपाल सिंह ने निभाया। वहीं नाटक में काम करने वाले अन्य कलाकारों में तरुण, वरुण शर्मा, सुखदेव सिंह, सतनाम सिंह, हरमीत कौर और हरजीत कौर शामिल रहे। अजमेर औलख थिएटर फेस्टिवल पंजाब कला भवन में 9 फरवरी तक मेहताब सोसाइटी की ओर से आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों की ओर से हंसा सिंह नाट सम्राट का अवार्ड थिएटर जगत से जुड़े सर्वश्रेष्ठ कलाकार को दिया जाएगा।
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क्रांतिपाल सिंह बोले- पिता का लिखा यह आखिरी नाटक
नाटक के निर्देशक क्रांतिपाल सिंह ने बताया कि यह उनके पिता का लिखा आखिरी नाटक था। नाटक लिखते लिखते वह इस दुनिया को अलविदा कह गए। पुत्र होने के नाते यह नाटक तैयार करवाया। चंडीगढ़ में नाटक का पहला शो रहा।
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नाटक 1914 में गदर पार्टी के पहले प्रधान बाबा सोहन सिंह भकना की जिंदगी पर आधारित रहा, जिन्होंने अंग्रेजों से भारत को आजाद करने के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया। नाटक दिखाने का मकसद आज की युवा पीढ़ी को यह बताना था कि आजादी के लिए कितनी कुर्बानियां दी हैं, तब जाकर हमें आजादी मिली। बाबा सोहन सिंह भकना ने अंग्रेजों से लड़ने के लिए अमेरिका में जाकर गदर पार्टी बनाई। इसके बाद वापस भारत आकर देश को आजाद करने में जुट गए। इस बीच वह गिरफ्तार भी हुए और उन्होंने अपनी जिंदगी के 35 वर्ष जेल में बिताए।
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नाटक बाबा सोहन सिंह भकना के तीन रोल अलग अलग कलाकारों ने निभाए। इनमें बचपन का रोल हरसिमरन कौर, जवानी का रोल जोरावर सिंह और बुजुर्ग में रोल प्रीतपाल सिंह ने निभाया। वहीं नाटक में काम करने वाले अन्य कलाकारों में तरुण, वरुण शर्मा, सुखदेव सिंह, सतनाम सिंह, हरमीत कौर और हरजीत कौर शामिल रहे। अजमेर औलख थिएटर फेस्टिवल पंजाब कला भवन में 9 फरवरी तक मेहताब सोसाइटी की ओर से आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों की ओर से हंसा सिंह नाट सम्राट का अवार्ड थिएटर जगत से जुड़े सर्वश्रेष्ठ कलाकार को दिया जाएगा।
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क्रांतिपाल सिंह बोले- पिता का लिखा यह आखिरी नाटक
नाटक के निर्देशक क्रांतिपाल सिंह ने बताया कि यह उनके पिता का लिखा आखिरी नाटक था। नाटक लिखते लिखते वह इस दुनिया को अलविदा कह गए। पुत्र होने के नाते यह नाटक तैयार करवाया। चंडीगढ़ में नाटक का पहला शो रहा।