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दर्द के सामने न झुकने की जिद: तीन साल की उम्र में हुआ एसिड अटैक, आंखों की रोशनी खोई... काफी ने नहीं मानी हार
Wed, 14 May 2025 01:06 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 14 May 2025 01:06 PM IST
सार
काफी जब तीन साल की थी उनके पड़ोसियों ने उन पर तेजाब फेंक दिया था। काफी की दोनों आंखों की रोशनी चली गई, इसके बाद वे चंडीगढ़ ब्लाइंड स्कूल में आई और ऑडियो बुक्स के सहारे सफलता हासिल की है।
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अपने माता पिता के साथ काफी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महज तीन साल की उम्र में एसिड अटैक का शिकार हुई 'काफी' ने न सिर्फ दर्द को सहा, बल्कि उसे अपनी ताकत बना लिया। चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित ब्लाइंड स्कूल की यह होनहार छात्रा अब 12वीं कक्षा में 95.6 फीसदी अंक लाकर स्कूल टॉपर बनी है।
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ऑडियो बुक्स के सहारे पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उनका सपना एक दिन आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करना है। उनके साथ सुमंत ने 94 और गुरशरण सिंह ने 93.6 फीसदी अंक लेकर दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया है।
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पड़ोसियों ने होली के दिन फेंका था तेजाब
काफी एक एसिड सर्वाइवर हैं और जब वह महज तीन साल की थी तब हिसार के गांव बुढाना में पड़ोस में रहने वाले तीन लोगों ने जलन के चलते होली के दिन तेजाब फेंक दिया था। जिसके चलते वह नेत्रहीन हो गई थी और उसका पूरा मुंह और बाजू बुरी तरह से झुलस गए थे लेकिन काफी ने हार नहीं मानी। पहले गांव में ही पढ़ाई शुरू की। छठी कक्षा में उन्हें चंडीगढ़ के ब्लाइंड स्कूल में दाखिला मिल गया। इसके बाद से वह मन लगाकर पढ़ाई करने लगीं।उन्होंने स्कूल की तरफ से मुहैया कराये जाने वाले ऑडियो बुक से पढ़ाई की और 12वीं कक्षा में 95.6 फीसदी अंक हासिल किए हैं। वह स्कूल टॉपर बनी हैं। उन्होंने दसवीं में 95.20 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। 17 वर्षीय काफी ने बताया कि अब वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स करना चाहती हैं। बताया कि यहां तक पहुंचने का सफर इतना आसान नहीं रहा। उनके पिता अनुबंध पर चंडीगढ़ स्थित मिनी सचिवालय हरियाणा में चपरासी की नौकरी कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एंट्रेंस टेस्ट भी दिया है। वहीं, स्कूल में 94 फीसदी अंकों के साथ सुमंत दूसरे और 93.6 फीसदी अंकों के साथ गुरशरण सिंह रहे तीसरे स्थान पर रहे हैं।