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Chandigarh News: पीड़ादायक 40 साल की कानूनी लड़ाई के बाद इंसाफ, सेवा का 50 प्रतिशत वेतन मिलेगा

Sat, 22 Jun 2024 04:41 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2024 04:41 AM IST
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Justice after 40 years of painful legal battle, will get 50 percent salary of service
-लेबर कोर्ट के फैसले के खिलाफ उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की याचिका खारिज
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-बर्खास्तगी का आदेश मनमाना, प्रबंधन को कर्मचारी की पीड़ा को समझना चाहिए : हाईकोर्ट

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। अपनी तरह से एक अलग मामले में बर्खास्तगी के 40 साल के दौरान लड़ी कानूनी लड़ाई के बाद कर्मचारी को सेवा की अवधि का 50 प्रतिशत वेतन जारी करने के अंबाला लेबर कोर्ट के फैसले पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोहर लगा दी है। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि याची को मनमाने तरीके से नौकरी से निकाल उसके साथ अन्याय किया गया था। मामला साल 1980 में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर नियुक्त फकीर चंद की बर्खास्तगी से जुड़ा है। याची को 1984 में सेवा मुक्त कर दिया गया था जबकि उसके जूनियर कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखा गया और बाद में नियमित कर दिया गया। इस फैसले को उसने अंबाला लेबर कोर्ट में चुनौती दी थी। याची ने कहा कि तय प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए उसे सेवा मुक्त किया गया है। अंबाला लेबर कोर्ट ने 2022 में उसके हक में फैसला सुनाते हुए उसे सेवा मुक्त करने की तिथि से बहाल करने तथा सेवा अवधि का 50 प्रतिशत वेतन जारी करने का हरियाणा सरकार को आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। निगम का तर्क था कि 1988 में जब नए दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की भर्ती की गई थी तब फकीर चंद को साक्षात्कार के लिए उपस्थित होने का अवसर दिया गया था। वह इसे पास नहीं कर सके और उन्हें उपयुक्त नहीं पाया गया क्योंकि उनके पास अनिवार्य आईटीआई डिप्लोमा नहीं था। हाईकोर्ट ने अपील को खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि वरिष्ठ को बिना किसी आधार निम्न दर्जे पर नहीं रखा जा सकता, क्योंकि इससे वरिष्ठ कर्मचारी को बहुत अपमान हो सकता है। प्रबंधन को कर्मचारी द्वारा झेली गई पीड़ा और पीड़ा को समझना और महसूस करना चाहिए। निगम के मनमाने तरीके के कारण कर्मचारी को लगभग 38 साल तक नौकरी से बाहर रहना पड़ा। ऐसे में हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ निगम की अपील को खारिज करते हुए लेबर कोर्ट के फैसले पर अपनी मोहर लगा दी।
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