चंडीगढ़ः जज नोट कांड में तीन और गवाह मुकरे, सीबीआई की बढ़ी परेशानी
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बहुचर्चित जज नोट कांड मामले की सुनवाई शनिवार को सीबीआई कोर्ट में हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष के तीन गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए, जिससे सीबीआई की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। व्यापारी संजीव बंसल की पत्नी रेनू बंसल, उनके भाई राज कुमार जिंदल और एडवोकेट संतोष त्रिपाठी ने अपने बयान अदालत में दर्ज कराए।
23 सितंबर 2008 को राज कुमार जिंदल ने सीबीआई को दिए अपने बयान में बताया था कि 16 अगस्त 2008 को उसे अखबारों से मामले के बारे में पता चला, जिसके बाद वह अपने भाई संजीव के घर पहुंचा। संजीव के दोस्त रविंदर को ही जज निर्मल यादव के घर पैसे पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
राजकुमार को पता चला था कि 13 अगस्त को संजीव दिल्ली गया था, जहां रविंदर ने उसके साथ लंच किया। उस वक्त संजीव ने रविंदर को 15 लाख रुपये का पैकेट जज निर्मल यादव तक पहुंचाने के लिए सौंपा था। रविंदर ने पैसों का पैकेट मुंशी प्रकाश राम को दे दिया। मुंशी ने गलती से पैकेट जज निर्मलजीत कौर के घर पहुंचा दिया था, जबकि पहुंचाना था निर्मल यादव के घर। निर्मलजीत कौर ने मामले की सूचना पुलिस को दी।
खबर मिलने के बाद राजकुमार ने जब अपने भाई संजीव बंसल से बात की तो उसने कहा कि वह पुलिस के पास सरेंडर करने जा रहा है। राज कुमार ने यह बयान साल 2008 को सीबीआई में दर्ज कराया था, लेकिन शनिवार को वह मुकर गया। उसने कहा कि कभी भी उसने ऐसा बयान नहीं दिया और न ही सीबीआई ने उसे कभी बुलाया ।
आरोपी संजीव बंसल की पत्नी रेनू बंसल भी अपने बयान से मुकर गई। साल 2008 को रेनू ने दो सितंबर और छह दिसंबर को सीबीआई को दर्ज अपने बयान में बताया था कि संजीव ने उसे फोन पर 15 लाख रुपये मुंशी प्रकाश राम को देने को कहा था। यह पैसे आठ से साढ़े आठ बजे के बीच देने के लिए कहा था।
साथ ही यह भी बोला था कि जब मुंशी आए तो उसे कहना कि यह पैसे रविंदर ने दिए हैं। इस दौरान रेनू ने मुंशी को यह भी कहा था कि संजीव ने यह पैसे निर्मल यादव को देने के लिए कहा है। शनिवार को वह साल इस बात से मुकर गई। उसने कहा कि सीबीआई ने उसे कभी नहीं बुलाया और न ही बयान दर्ज किए। तीसरे गवाह जीरकपुर निवासी संतोष त्रिपाठी ने कहा कि अगस्त 2008 से लगभग पांच महीने पहले वह लीगल वर्क सीखने संजीव के ऑफिस जाता था। उसके प्लेन पेपर पर साइन लिए गए थे।
यह है पूरा मामला
13 अगस्त 2008 को हाईकोर्ट के जज निर्मलजीत कौर के घर दिल्ली के एक व्यापारी रविंद्र कुमार की ओर से 15 लाख रुपये भेजे गए थे। जज ने इसकी सूचना चंडीगढ़ पुलिस को दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि प्रकाश राम नाम के एक व्यक्ति ने पैकेट उन्हें दिया था। चंडीगढ़ पुलिस के बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई की जांच में सामने आया कि वह रुपये जज निर्मल यादव को देने थे। गलती से रुपए जज निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गए। उसके बाद सीबीआई ने प्रकाश राम को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। तब जाकर मामले का खुलासा हुआ।