जेबीटी शिक्षक भर्ती: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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चौटाला शासनकाल में 3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती के मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि इन शिक्षकों के लिए कोई ठोस नीति निर्धारण में अगली सरकार ही समर्थ होगी। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी हरियाणा सरकार की ओर से अभी तक कोई नीति न बना पाने और समय मांगने पर की।
हाईकोर्ट ने कहा है कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। सरकार चुनाव से पहले जल्दबाजी में कोई नीति बनाती भी है तो इसका ठोस परिणाम नहीं निकलेगा, लिहाजा नई सरकार इस दिशा में बेहतर नीति निर्धारण कर सकेगी।
इसके साथ हाईकोर्ट ने सरकार को नीति बनाने के लिए समय दे दिया। मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी। सोमवार को यह मामला जस्टिस एसके मित्तल के नेतृत्व वाली डिवीजन बेंच के समक्ष आया था। हाईकोर्ट ने शिक्षकों को हटाने पर रोक जारी रखी है।
सरकार ने खड़े कर दिए थे हाथ
इस मामले में एक बार फिर सरकार ने असमर्थता जताते हुए कोई निर्णय लेने पर हाथ खड़े कर दिए थे और हाईकोर्ट को ही कोई निर्णय देने का आग्रह करते कहा था कि हाईकोर्ट का फैसला सरकार को मान्य होगा, लेकिन तत्कालीन जस्टिस जसबीर सिंह की डिवीजन बेंच ने 15 जुलाई को हरियाणा सरकार को फैसला लेने को कहा था कि या तो जेबीटी को राहत दे या फिर समस्या के समाधान को कोई ठोस नीति बनाए।
जेबीटी शिक्षकों की भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसमें अनियमितता मिलने पर एकल बेंच ने नई मेरिट लिस्ट बनाने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस मेरिट में जो नहीं आए, उन्हें नौकरी से हटा दिया जाए। इस फैसले को शिक्षकों ने अपील के जरिए डिवीजन बेंच में चुनौती दी।
इस मामले में पहले कई बार सुनवाई हुई और बाद में डिवीजन बेंच ने एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी थी और साथ ही हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपने स्तर पर ही कोई बीच का रास्ता निकाले।