Punjab: देशद्रोह मामले में जगतार सिंह हवारा बरी, आरोपी के खिलाफ नहीं मिले सबूत, मोहाली में दर्ज हुआ था केस
1998 में पंजाब के मोहाली में दर्ज देशद्रोह केस में जगतार सिंह हवारा को बड़ी राहत मिली है। मोहाली की अदालत ने हवारा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इससे पहले चंडीगढ़ की अदालत भी देशद्रोह के दो मामलों में हवारा को बरी कर चुकी है।
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पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के हत्यारे जगतार सिंह हवारा पर चल रहे देशद्रोह के एक मामले की सुनवाई गुरुवार को एडिशनल सेशन जज की अदालत में हुई। अदालत में बहस पूरी होने के बाद सबूतों के अभाव में जगतार सिंह हवारा को बरी कर दिया गया। जगतार हवारा के वकील जसपाल सिंह मंझपुर ने बताया कि मामला 1998 का है।
सोहाना थाने में जगतार सिंह हवारा पर सरकार के खिलाफ विद्रोह करने, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने, माहौल खराब करने, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी में बाधा डालने, अपराध करने का प्रयत्न करने व साजिश रचने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
वकील मंझपुर ने बताया कि इस मामले में उन्होंने वर्ष 2018-19 में स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद सेशन कोर्ट में हवारा की अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, उसे रद्द कर दिया गया था। इसके बाद 2021 में हाईकोर्ट में हवारा की अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की लेकिन हाईकोर्ट ने जमानत याचिका मंजूर नहीं की। मगर सेशन कोर्ट को इस मामले में जल्द चालान पेश करने का निर्देश दिया।
वर्ष 2022 में पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। इसमें आईपीसी की धारा 124ए व 153ए शामिल नहीं थी। हवारा ने अपने वकील के माध्यम से धारा 124ए व 153ए डिस्चार्ज करने की अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। इसके बाद आईपीसी की धारा 225, 511, 120बी के तहत पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। अदालत ने सबूतों के अभाव में हवारा को इन धाराओं में बरी कर दिया है।
1995 में बम ब्लास्ट में की थी हत्या, काट रहा है सजा
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में बम धमाके में हत्या कर दी गई थी। मामले में जगतार सिंह हवारा को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वह इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है। जगतार सिंह हवारा के खिलाफ मोहाली के सोहाना पुलिस थाने में 13 जून 1998 में देशद्रोह समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
हवारा ने बताया था कि सोहाना में दर्ज इस एफआईआर की उसे जानकारी नहीं थी। इसकी जानकारी उसे तिहाड़ जेल प्रशासन की सूची के जरिए मिली थी। हवारा ने जानकारी मिलने के बाद 2019 में मोहाली की अदालत में एक अर्जी दायर कर केस के स्टेटस की जानकारी मांगी थी। इस केस के अन्य छह आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं।