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‘56 का हो गया.. अब कभी प्रोफेसर नहीं बन पाऊंगा’
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चंडीगढ़। हर कोई चाहता है कि उसे नौकरी मिले और समय-समय पर तरक्की। यही ख्वाब पीयू यूसोल में तैनात पंजाबी के शिक्षक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भूपिंदर सिंह उर्फ पाली भूपिंदर ने देखे थे, लेकिन वे पूरे नहीं हो सके। पीयू ने पदोन्नति के लिए तीन साल पहले साक्षात्कार तो करवाया, लेकिन उसका पत्र आज तक जारी नहीं हुआ। डॉ. भूपिंदर की आयु 56 साल हो गई। कहते हैं कि अब वह कभी प्रोफेसर नहीं बन सकेंगे। पूरा भविष्य पीयू के कुछ लोगों ने प्रभावित कर दिया। अब मैं चाहता हूं कि पूरे प्रकरण की जांच हो।
डॉ. पाली भूपिंदर देश-दुनिया में अपनी कला के जरिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई फिल्में, नाटक लिखे और नाम कमाया। कई जगहों पर पीयू उनके नाम से जानी गई। पीयू के वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि उन्हें समय पर हर लाभ देना पीयू का काम था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनके रास्ते रोके गए। पंजाबी के शिक्षक हैं और उनकी पहचान है। ऐसे में पीयू को उनके अनुभव का लाभ लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
19 तक पीयू ने फैसला न लिया तो करेंगे प्रदर्शन, कलाकारों को प्रदर्शन में आने की अपील
डॉ. भूपिंदर का कहना है कि उनके विभाग ने दो साल तक पदोन्नति की फाइल आगे ही नहीं बढ़ाई। 19 जुलाई से पहले पीयू निर्णय नहीं लेती है तो वह प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने सभी कलाकारों से कहा है कि उनके समर्थन में खड़े हों और प्रदर्शन में आएं। उनका आरोप है कि पंजाबी लोगों के साथ विश्वविद्यालय में भेदभाव किया जा रहा है। कुछ लोग उन्हें आगे बढ़ता हुआ नहीं देख सकते। कहते हैं कि पीयू के कई लोग और पीड़ित हैं, जो कभी भी अपनी नौकरी छोड़ सकते हैं।
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डॉ. पाली भूपिंदर देश-दुनिया में अपनी कला के जरिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई फिल्में, नाटक लिखे और नाम कमाया। कई जगहों पर पीयू उनके नाम से जानी गई। पीयू के वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि उन्हें समय पर हर लाभ देना पीयू का काम था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनके रास्ते रोके गए। पंजाबी के शिक्षक हैं और उनकी पहचान है। ऐसे में पीयू को उनके अनुभव का लाभ लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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19 तक पीयू ने फैसला न लिया तो करेंगे प्रदर्शन, कलाकारों को प्रदर्शन में आने की अपील
डॉ. भूपिंदर का कहना है कि उनके विभाग ने दो साल तक पदोन्नति की फाइल आगे ही नहीं बढ़ाई। 19 जुलाई से पहले पीयू निर्णय नहीं लेती है तो वह प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने सभी कलाकारों से कहा है कि उनके समर्थन में खड़े हों और प्रदर्शन में आएं। उनका आरोप है कि पंजाबी लोगों के साथ विश्वविद्यालय में भेदभाव किया जा रहा है। कुछ लोग उन्हें आगे बढ़ता हुआ नहीं देख सकते। कहते हैं कि पीयू के कई लोग और पीड़ित हैं, जो कभी भी अपनी नौकरी छोड़ सकते हैं।
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