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चंडीगढ़ सैनिक रेस्ट हाउस में लाखों की हेराफेरी, चहेतों को फर्जी बिल पर लाखों का भुगतान
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 27 Jun 2018 10:58 AM IST
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पैसे की हेराफेरी
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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चंडीगढ़ सैनिक रेस्ट हाउस में घोटाले में बड़ा मामला सामने आया है। एक विभागीय अफसर ने अपने चहेतों के फर्मों के नाम पर बिल बाउचर काटकर लाखों का बैंक से भुगतान करा दिया। शिकायत मिलने के बाद प्रथम दृष्ट्या मामला सही पाए जाने पर प्रशासन ने पूर्व अफसर को रिटायरमेंट के बाद सैनिक रेस्ट हाउस की ओर से मिलने वाले सभी वित्तीय लाभ व सुविधाएं रोक दी हैं। प्रकरण को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने बीते दो साल में सैनिक रेस्ट हाउस से हुई आय और व्यय का सोशल ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को पुख्ता सुबूतों के साथ भेजी गई शिकायत में बताया गया कि जुलाई 2016 से मई 2018 के बीच रेस्ट हाउस के खाते से धन की जमकर निकासी हुई है। शहर के सेक्टर-22 में स्थित एक हैंडलूम की शॉप से खरीदारी के नाम पर फर्जी बिल बाउचर लगाकर लाखों का भुगतान बैैंक खाते से हुआ है। खाते के नंबर सहित विभिन्न मदों में हुए भुगतान का पूरा ब्यौरा प्रशासन को दिया गया है।
पूर्व अधिकारी के सभी वित्तीय लाभ पर रोक
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सैनिक रेस्ट हाउस से इस मामले में जानकारी मांगी, लेकिन अभी तक जानकारी देने के नाम पर प्रशासन को केवल गुमराह ही किया गया है। इसके चलते डीसी ने तत्कालीन सैनिक रेस्ट हाउस के अफसर को रिटायरमेंट के बाद यहां से मिलने वाले सभी लाभ व सुविधाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इसके साथ ही प्रशासन में बीते दो साल में सैनिक रेस्ट हाउस होने वाली आय का कहां और किन मदों में व्यय हुआ है। इसका सोशल ऑडिट कराने के निर्देश जारी किए हैं।
इसलिए होते हैं सैनिक रेस्ट हाउस
जिला सैनिक रेस्ट हाउस का निर्माण कार्य राज्य सरकार और केंद्रीय सैनिक बोर्ड संयुक्त रूप से मिलकर करवाता है। निर्माण कार्य में होने वाले खर्च पर दोनों की बराबर की हिस्सेदारी होती है। दूर-दूर से पेंशन व मेडिकल सहित अन्य कामों के लिए जिला मुख्यालय आने वाले सैनिकों को इधर-उधर भटकना नहीं पडे़, इसलिए जिला मुख्यालय पर सैनिक रेस्ट हाउस का निर्माण कार्य कराया जाता है। यहीं पर बाहर से आने वाले सैनिक रुकते हैं।
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डीसी केनिर्देश पर बीती 31 मई को रिटायर हुए सैनिक रेस्ट हाउस के अधिकारी के रेस्ट हाउस की ओर से मिलने वाले सभी वित्तीय लाभ को रोक दिया गया है। बीते दो साल में हुए आय व व्यय के सोशल ऑडिट का काम पूरा होने के बाद ही प्रशासन के निर्देश पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
- मोहन सिंह, सुपरिंटेंडेंट, जिला सैनिक रेस्ट हाउस
जिला सैनिक रेस्ट हाउस में बीते दो साल में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत डीसी सहित कई विभागीय अधिकारियों से की गई है। रेस्ट हाउस में खर्च के नाम पर अपने चहेतों को बिल बाउचर पर फर्जी तरीके से लाखों का भुगतान किया गया है। इसके सारे साक्ष्य भी प्रशासन को दिए गए हैं।
- वेंकटेश नारायण शिकायतकर्ता, जनरल सेक्रेटरी एक्ससर्विसमैन
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पूर्व अधिकारी के सभी वित्तीय लाभ पर रोक
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सैनिक रेस्ट हाउस से इस मामले में जानकारी मांगी, लेकिन अभी तक जानकारी देने के नाम पर प्रशासन को केवल गुमराह ही किया गया है। इसके चलते डीसी ने तत्कालीन सैनिक रेस्ट हाउस के अफसर को रिटायरमेंट के बाद यहां से मिलने वाले सभी लाभ व सुविधाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। इसके साथ ही प्रशासन में बीते दो साल में सैनिक रेस्ट हाउस होने वाली आय का कहां और किन मदों में व्यय हुआ है। इसका सोशल ऑडिट कराने के निर्देश जारी किए हैं।
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इसलिए होते हैं सैनिक रेस्ट हाउस
जिला सैनिक रेस्ट हाउस का निर्माण कार्य राज्य सरकार और केंद्रीय सैनिक बोर्ड संयुक्त रूप से मिलकर करवाता है। निर्माण कार्य में होने वाले खर्च पर दोनों की बराबर की हिस्सेदारी होती है। दूर-दूर से पेंशन व मेडिकल सहित अन्य कामों के लिए जिला मुख्यालय आने वाले सैनिकों को इधर-उधर भटकना नहीं पडे़, इसलिए जिला मुख्यालय पर सैनिक रेस्ट हाउस का निर्माण कार्य कराया जाता है। यहीं पर बाहर से आने वाले सैनिक रुकते हैं।
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डीसी केनिर्देश पर बीती 31 मई को रिटायर हुए सैनिक रेस्ट हाउस के अधिकारी के रेस्ट हाउस की ओर से मिलने वाले सभी वित्तीय लाभ को रोक दिया गया है। बीते दो साल में हुए आय व व्यय के सोशल ऑडिट का काम पूरा होने के बाद ही प्रशासन के निर्देश पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
- मोहन सिंह, सुपरिंटेंडेंट, जिला सैनिक रेस्ट हाउस
जिला सैनिक रेस्ट हाउस में बीते दो साल में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत डीसी सहित कई विभागीय अधिकारियों से की गई है। रेस्ट हाउस में खर्च के नाम पर अपने चहेतों को बिल बाउचर पर फर्जी तरीके से लाखों का भुगतान किया गया है। इसके सारे साक्ष्य भी प्रशासन को दिए गए हैं।
- वेंकटेश नारायण शिकायतकर्ता, जनरल सेक्रेटरी एक्ससर्विसमैन