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कोरोना: स्वदेशी रैपिड टेस्टिंग किट का क्लीनिकल ट्रायल सफल, गंध बताएगी संक्रमण है या नहीं
Thu, 20 Aug 2020 11:08 AM IST
खुशबू गोयल
नवनीत छिब्बर, मोहाली
नवनीत छिब्बर, मोहाली
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 20 Aug 2020 11:08 AM IST
सार
- वैज्ञानिक डॉ महेंद्र बिश्नोई ने किया शोध
- पांच टैबलेट की होगी कोरोना की किट
- केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार
- पीजीआई की टीम भी प्रोजेक्ट में शामिल
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कोरोना वायरस की जांच
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कोरोना संक्रमण की प्राथमिक जांच के लिए स्वदेशी रैपिड टेस्टिंग किट की खोज का कार्य लगभग पूरा हो गया है। गंध पर आधारित इस किट के क्लीनिकल ट्रायल की सफलता के बाद अब मास टेस्टिंग की तैयारी की जा रही है। पांच टैबलेट वाली इस किट को नेशनल एग्री-फूड बॉयो टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (नाबी) में तैयार किया जा रहा है। इसमें पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों की टीम भी सहयोग कर रही है।
हालांकि केंद्र सरकार की मंजूरी व औद्योगिक उत्पादन के बाद यह आम लोगों तक पहुंच सकेगी। इसमें करीब 3 से 4 महीने का समय लगने की संभावना है। मोहाली के नाबी में गंध पर आधारित कोविड-19 रैपिड टेस्टिंग किट तैयार की जा रही है। यह प्रोजेक्ट नाबी के वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र विश्नोई का है। इसमें उनकी टेक्निकल टीम के अलावा पीजीआई के डॉक्टर सहयोग कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट का रिसर्च वर्क लगभग पूरा हो चुका है।
इस रैपिड टेस्टिंग किट में पांच टैबलेट होंगी, जिन्हें रसोई व घर में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मसालों व खाद्य पदार्थों से तैयार किया गया है। शुरुआत में इस किट में इस्तेमाल की गई चीजों को उनके मूल रूप में लिया गया था। इसके बाद कुछ खामियां व सवाल सामने आए थे, जिस पर रिसर्च के बाद लैब में इन चीजों के शुद्ध वर्जन तैयार किए गए और उन्हें पांच अलग-अलग टैबलेट की शक्ल दी गई।
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हालांकि केंद्र सरकार की मंजूरी व औद्योगिक उत्पादन के बाद यह आम लोगों तक पहुंच सकेगी। इसमें करीब 3 से 4 महीने का समय लगने की संभावना है। मोहाली के नाबी में गंध पर आधारित कोविड-19 रैपिड टेस्टिंग किट तैयार की जा रही है। यह प्रोजेक्ट नाबी के वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र विश्नोई का है। इसमें उनकी टेक्निकल टीम के अलावा पीजीआई के डॉक्टर सहयोग कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट का रिसर्च वर्क लगभग पूरा हो चुका है।
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इस रैपिड टेस्टिंग किट में पांच टैबलेट होंगी, जिन्हें रसोई व घर में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मसालों व खाद्य पदार्थों से तैयार किया गया है। शुरुआत में इस किट में इस्तेमाल की गई चीजों को उनके मूल रूप में लिया गया था। इसके बाद कुछ खामियां व सवाल सामने आए थे, जिस पर रिसर्च के बाद लैब में इन चीजों के शुद्ध वर्जन तैयार किए गए और उन्हें पांच अलग-अलग टैबलेट की शक्ल दी गई।
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हरी झंडी मिलते ही करेंगे किट का औद्योगिक उत्पादन
क्लीनिकल ट्रायल में सफलता मिलने के बाद डॉ. बिश्नोई और उनकी टीम उत्साहित है। अब उन्हें इस किट की मास टेस्टिंग का इंतजार है, जिसके लिए केंद्र सरकार व आयुष मंत्रालय से मंजूरी बाकी है। फिलहाल रिसर्च पेपर को इंटरनेशनल साइंस जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजा गया है। मास टेस्टिंग की सफलता के बाद केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने पर इस किट का औद्योगिक उत्पादन शुरू होगा। उसके बाद ही आम आदमी तक यह स्वदेशी रैपिड टेस्टिंग किट पहुंच सकेगी।
गंध से पता चलेगा कोरोना है या नहीं
नाबी में तैयार हो रही कोरोना की रैपिड टेस्टिंग किट से जांच के लिए किसी तरह का सैंपल लेने की जरूरत नहीं होगी। यह किट गंध पर आधारित है। इसमें पांच टैबलेट का सेट है। डॉ. महेंद्र बिश्नोई ने बताया कि जो व्यक्ति इस किट की पांच टैबलेट की गंध को महसूस कर सकता है, उसमें कोरोना के लक्षण नहीं हैं।
कोई व्यक्ति अगर दो या उससे ज्यादा टैबलेट की गंध को महसूस नहीं कर पाएगा, उसे तुरंत क्वारंटीन होने के साथ डॉक्टर के परामर्श की जरूरत होगी। ऐसे व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की संभावना रहेगी। इस स्वदेशी रैपिड किट के इस्तेमाल से कोई भी व्यक्ति खुद में कोरोना संक्रमण के लक्षणों की पहचान कर सकेगा।
गंध से पता चलेगा कोरोना है या नहीं
नाबी में तैयार हो रही कोरोना की रैपिड टेस्टिंग किट से जांच के लिए किसी तरह का सैंपल लेने की जरूरत नहीं होगी। यह किट गंध पर आधारित है। इसमें पांच टैबलेट का सेट है। डॉ. महेंद्र बिश्नोई ने बताया कि जो व्यक्ति इस किट की पांच टैबलेट की गंध को महसूस कर सकता है, उसमें कोरोना के लक्षण नहीं हैं।
कोई व्यक्ति अगर दो या उससे ज्यादा टैबलेट की गंध को महसूस नहीं कर पाएगा, उसे तुरंत क्वारंटीन होने के साथ डॉक्टर के परामर्श की जरूरत होगी। ऐसे व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की संभावना रहेगी। इस स्वदेशी रैपिड किट के इस्तेमाल से कोई भी व्यक्ति खुद में कोरोना संक्रमण के लक्षणों की पहचान कर सकेगा।