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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: रेलवे को ब्याज समेत मुआवजा देने के आदेश, यात्रा के दौरान गिरकर हुई थी शख्स की मौत

Mon, 24 Aug 2026 10:29 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Mon, 24 Aug 2026 10:29 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि रेलवे को यह साबित करना था कि मृतक बिना टिकट यात्रा कर रहा था। इसके लिए उसे स्वतंत्र साक्ष्यों के आधार पर जांच करनी चाहिए थी।

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Order to pay compensation to the Railways, including interest by HC
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत यात्री के पास से टिकट बरामद न होना उसके वैध यात्री होने के दावे को खारिज करने का आधार नहीं बन सकता। हाईकोर्ट ने रेलवे दावा अधिकरण का आदेश रद्द करते हुए मृतक के माता-पिता को मुआवजा देने का निर्देश दिया है। 

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साल 2016 का मामला
यह मामला वर्ष 2016 का है। जोनाथन जेम्स 2 जून 2016 को अमृतसर से लुधियाना जाने वाली ट्रेन में सवार हुए थे। हमीरा और दिलवां रेलवे स्टेशनों के बीच एक पुल से गुजरते समय वह चलती ट्रेन से नीचे गिर गए। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने रेलवे दावा अधिकरण में मुआवजे के लिए दावा दायर किया था। चंडीगढ़ स्थित अधिकरण ने शव से टिकट बरामद न होने के आधार पर दावा खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति हरकेश मनुजा ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने कहा कि चलती ट्रेन से गिरने पर यात्री के सामान और दस्तावेज भी गिर सकते हैं।

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रेलवे की जांच में कमी 
कोर्ट ने कहा कि रेलवे को यह साबित करना था कि मृतक बिना टिकट यात्रा कर रहा था। इसके लिए उसे स्वतंत्र साक्ष्यों के आधार पर जांच करनी चाहिए थी। रेलवे यह पता कर सकता था कि टिकट परीक्षक ने मृतक का टिकट देखा था या नहीं। ट्रेन के गार्ड, अन्य कर्मचारियों अथवा सहयात्रियों से भी जानकारी ली जा सकती थी।

मुआवजे का आदेश 
हाईकोर्ट ने माना कि रेलवे ने जांच के गंभीर प्रयास नहीं किए। किसी टिकट परीक्षक या रेलवे अधिकारी को गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। अदालत ने मृतक को वैध यात्री माना और उसकी मौत को रेलवे अधिनियम के तहत अप्रिय घटना की श्रेणी में रखा इसलिए मृतक के माता-पिता मुआवजे के हकदार हैं। अदालत ने उन्हें आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है जिस पर दावा दायर करने की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।

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