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सदन की बैठक में फैसला: तय समय में संपत्ति अपने नाम न करवाने वालों को छह माह की मोहलत

Fri, 27 May 2022 09:55 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 27 May 2022 09:55 PM IST
सार

पार्षदों ने सदन में कॉलानियों में भेजे गए संपत्ति कर को लेकर भी प्रस्ताव रखा। पार्षदों ने कहा कि पिछले तीन साल का कर एक साथ कॉलोनियों में अचानक भेज दिया गया है।

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Important decisions of Chandigarh Municipal Corporation House meeting
निगम सदन की बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में कोई संपत्ति खरीदने के बाद तय समय सीमा के अंदर उसे अपने नाम न करवाने पर नगर निगम प्रतिदिन 10 रुपये जुर्माना लगाता है। शुक्रवार को सदन की बैठक में तय हुआ कि निगम ऐसे सभी नोटिसों को रद्द करेगा और छह माह बाद नए नोटिस जारी करेगा। इस बीच विज्ञापनों के माध्यम से सभी को संपत्ति अपने नाम करवाकर उसके दस्तावेज निगम में जमा कराने की अपील की जाएगी। छह माह बाद निगम प्रतिदिन 10 पैसे के हिसाब से जुर्माना लगाएगा।

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पार्षद महेश इंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि एक व्यक्ति शहर में कोई संपत्ति खरीदता है और वह तय तीन माह में उसे अपने नाम नहीं करवाता है या किसी के देहांत के बाद उसके परिजन संपत्ति को छह माह में अपने नाम नहीं करवाते हैं तो निगम उन पर प्रतिदिन के हिसाब से 10 रुपये का जुर्माना लगाता है जबकि वह व्यक्ति संपत्ति को अपने नाम किए बिना समय से पानी बिल, संपत्ति कर जमा करवाता है। ऐसे में अचानक से उस पर इतना बोझ डालना ठीक नहीं। इस पर सदन ने सहमति जताई। बाद में तय हुआ कि जुर्माने की राशि घटाकर 10 पैसे प्रतिदिन कर दी जाए, पुराने नोटिस रद्द हों और लोगों को छह माह तक जागरूक किया जाए।
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आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि सदन एक तरह से वन टाइम सेटलमेंट चाहता है। इस प्रस्ताव को सिर्फ सरकार ही पास कर सकती है। अब प्रशासन इस पर सहमति देगा तभी यह लागू होगा। ज्ञात हो कि निगम ने इस समय काफी नोटिस लोगों को भेजे हुए हैं, इस कारण वह अपनी संपत्ति चाहकर भी नहीं बेच पा रहे हैं क्योंकि उनके जुर्माने की राशि ही 50 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
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कॉलोनियों का संपत्ति कर माफ करने का प्रस्ताव 
पार्षदों ने सदन में कॉलानियों में भेजे गए संपत्ति कर को लेकर भी प्रस्ताव रखा। पार्षदों ने कहा कि पिछले तीन साल का कर एक साथ कॉलोनियों में अचानक भेज दिया गया है। इसके लिए जुर्माने को पूरी तरह माफ किया जाए। वहीं आवासीय संपत्ति कर को पूरी तरह और व्यावसायिक संपत्ति कर को 50 प्रतिशत माफ किया जाए। जो राशि बचे उसे कुछ किस्तों में जमा कराने को कहा गया। 


आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2015 में कॉलोनियों और गांव का कर माफ कर दिया था। उसके बाद वर्ष 2018 में एक नई अधिसूचना जारी कर गांव को छोड़कर सभी जगह कर लगाने को कहा। कोविड के कारण दो साल सर्वे नहीं हो सका। इस वर्ष गांवों में कर लगाने का आदेश हो गया इसलिए दोनों जगह नोटिस भेजे हैं। गांवों में केवल व्यवसायिक नोटिस भेजे गए हैं।

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