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जाम से छुटकारा चाहिए तो शहर के 9 चौकों पर बनाएं अंडरपास
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चंडीगढ़। ट्राइसिटी में बढ़ते ट्रैफिक पर लगाम लगाने के लिए यूटी प्रशासन व्यापक मोबिलिटी प्लान तैयार कर रहा है। इसके लिए रेल इंडिया तकनीकी एवं आर्थिक सेवा (राइट्स) ने ट्राइसिटी में सर्वे कर रही है। शुरुआती सर्वे में राइट्स ने शहर के कुल 15 चौकों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति से निपटने के लिए सुधार की सिफारिश की है, जिनमें से 9 चौक पर अंडरपास बनाने का प्लान दिया गया है। इन चौकों पर ही सबसे अधिक ट्रैफिक रहता है।
मोबिलिटी प्लान की स्टडी को लेकर वीरवार को सलाहकार धर्मपाल की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें राइट्स कंपनी ने प्रेजेंटेशन दी। रिपोर्ट के अनुसार, 15 चौक पर वाहनों के उचित नियंत्रण से ट्रैफिक समस्या का समाधान किया जा सकता है, जबकि नौ चौक पर अंडरपास बनाने होंगे। शॉर्ट टर्म पार्किंग मैनेजमेंट प्लान पर भी काम किया जाएगा। कंपनी का चंडीगढ़, मोहाली व पंचकूला में विस्तृत ट्रैफिक एंड ट्रेवल और हाउस होल्ड सर्वे पर काम कर रही है। सर्वे के आधार पर ही कंपनी की तरफ से आखिरी रिपोर्ट जमा की जाएगी। इसके बाद ड्राफ्ट मोबिलिटी प्लान तैयार किया जाएगा।
प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए कौन सा विकल्प बेहतर होगा, उसका पता कराने के लिए ये स्टडी फायदेमंद होगी। बैठक में परिवहन सचिव, वित्त सचिव, एसएसपी ट्रैफिक, निदेशक परिवहन, चीफ इंजीनियर व चीफ आर्किटेक्ट समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे। प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि वीरवार को बैठक में कंपनी ने अपनी स्टडी पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दी है। इसमें स्टडी प्रोग्रेस, लैंड यूज पैरामीटर्स, प्राथमिक सर्वेक्षण और इसका उपयोग, पार्किंग प्रबंधन को लेकर उपाय और ट्राइसिटी के लिए सर्विस लेवल बेंचमार्क आदि पर अपने सुझाव दिए हैं।
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स्टडी के बाद ही विकल्प पर आगे बढ़ेगा प्रशासन
शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए मोनो रेल, मेट्रो रेल या अन्य कौन सा विकल्प बेहतर होगा, ये स्टडी के बाद ही पता चलेगा। जानकारी के अनुसार राइट्स कंपनी वर्ष 2009 से अब तक के बदले पहलुओं को देखते हुए स्टडी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसमें देखा जाएगा कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग की बसों में रोजाना सफर करने वाले लोगों की संख्या 2009 से अब तक कितनी बढ़ी है। अब रोजाना कितने लोग बसों में सफर करते हैं। रजिस्टरिंग व लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) में तब से अब तक पंजीकृत वाहनों की संख्या को देखा जाएगा। अब हर दो से ढाई महीने में 15 हजार नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। इसके अलावा रोजाना चंडीगढ़ में दाखिल होने वाले वाहनों के फ्लो को भी देखा जाएगा। इन सभी पहलुओं को देखते हुए ही ये स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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मोबिलिटी प्लान की स्टडी को लेकर वीरवार को सलाहकार धर्मपाल की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें राइट्स कंपनी ने प्रेजेंटेशन दी। रिपोर्ट के अनुसार, 15 चौक पर वाहनों के उचित नियंत्रण से ट्रैफिक समस्या का समाधान किया जा सकता है, जबकि नौ चौक पर अंडरपास बनाने होंगे। शॉर्ट टर्म पार्किंग मैनेजमेंट प्लान पर भी काम किया जाएगा। कंपनी का चंडीगढ़, मोहाली व पंचकूला में विस्तृत ट्रैफिक एंड ट्रेवल और हाउस होल्ड सर्वे पर काम कर रही है। सर्वे के आधार पर ही कंपनी की तरफ से आखिरी रिपोर्ट जमा की जाएगी। इसके बाद ड्राफ्ट मोबिलिटी प्लान तैयार किया जाएगा।
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प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए कौन सा विकल्प बेहतर होगा, उसका पता कराने के लिए ये स्टडी फायदेमंद होगी। बैठक में परिवहन सचिव, वित्त सचिव, एसएसपी ट्रैफिक, निदेशक परिवहन, चीफ इंजीनियर व चीफ आर्किटेक्ट समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे। प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि वीरवार को बैठक में कंपनी ने अपनी स्टडी पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दी है। इसमें स्टडी प्रोग्रेस, लैंड यूज पैरामीटर्स, प्राथमिक सर्वेक्षण और इसका उपयोग, पार्किंग प्रबंधन को लेकर उपाय और ट्राइसिटी के लिए सर्विस लेवल बेंचमार्क आदि पर अपने सुझाव दिए हैं।
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स्टडी के बाद ही विकल्प पर आगे बढ़ेगा प्रशासन
शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए मोनो रेल, मेट्रो रेल या अन्य कौन सा विकल्प बेहतर होगा, ये स्टडी के बाद ही पता चलेगा। जानकारी के अनुसार राइट्स कंपनी वर्ष 2009 से अब तक के बदले पहलुओं को देखते हुए स्टडी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसमें देखा जाएगा कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग की बसों में रोजाना सफर करने वाले लोगों की संख्या 2009 से अब तक कितनी बढ़ी है। अब रोजाना कितने लोग बसों में सफर करते हैं। रजिस्टरिंग व लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) में तब से अब तक पंजीकृत वाहनों की संख्या को देखा जाएगा। अब हर दो से ढाई महीने में 15 हजार नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। इसके अलावा रोजाना चंडीगढ़ में दाखिल होने वाले वाहनों के फ्लो को भी देखा जाएगा। इन सभी पहलुओं को देखते हुए ही ये स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।